ब्लॉगसेतु

संगीता पुरी
118
भारतवर्ष में फैले अंधविश्‍वास को देखते हुए बहुत सारे लोगों , बहुत सारी संस्‍थाओं का व्‍यक्तिगत प्रयास अंधविश्‍वास को दूर करते हुए विज्ञान का प्रचार प्रसार करना हो गया है। मैं उनके इस प्रयास की सराहना करती हूं , पर जन जन तक विज्ञान का प्रचार प्रसार कर पाना इतना आसान...
prakash govind
307
..............................
 पोस्ट लेवल : C.M.Picture Quiz Result
संजीव तिवारी
64
कल किसी रामविचार कहे जाने वाले की अभद्रता और गंवारपन की खबर अखबार में पढ़ी तब से इसी विषय पर सोच रहा हूं। सोचता हूं कि दिन-रात पढ़ाई और मेहनत-मशक्कत करके क्या इसी दिन के लिए लोग प्रशासनिक सेवाओं में आते हैं कि उनके साथ कोई मारपीट करे और सरेआम उसका अपमान करे। इन क...
 पोस्ट लेवल : दीपक शर्मा
संजय भास्कर
218
प्रकृति की दुनिया निहायत खूबसूरत है। आप भी इसे महसूस करें !!
सुमन कपूर
300
                                            &...
 पोस्ट लेवल : कुछ कतरे जिन्दगी के
ललित शर्मा
262
नवरात्र पर्व पर आज सुनिए दुकालु राम यादव जी के द्वारा गाया गया जस गीत "महामाया के दर्शन कर लो"महामाया के दर्शन कर लोदुकालु राम यादव जी से साभारप्रस्तुतकर्ताशिल्पकार
kumarendra singh sengar
28
दृश्य देखिये इस लोकतंत्र का---------------- एक जिला ---- जालौनविधायक ----- चारविशेष ----- इसमें तीन राज्य सरकार दल बहुजन समाज पार्टी के हैं। -----------------------------------------------------------सांसद ---- चारलोक सभा से एकराज्य सभा से तीनविशेष ------ राज्यसभा...
विमलेश त्रिपाठी
299
रविन्द्र, सच सिर्फ वही नहीं होता जो दिखता है, उसके आगे भी सच के कई छोर होते हैं। मुझे इस बात का कोई मलाल नहीं कि तुम उन छोरों तक पहुँचने की कोशिश नहीं करते कभी ---कम से कम मेरे मामले में तो कभी भी नहीं। लेकिन यदि लंबे समय तक अगर तुम सचमुच लिखना चाहते हो तो सच के उन...
अनीता कुमार
503
एक कविता जो मुझे प्रेरणा देती हैहम तो बांस हैं,जितना काटोगे,उतना हरियायेंगे.हम कोई आम नहीं जो पूजा के काम आयेंगेहम चंदन भी नहींजो सारे जग को महकायेंगेहम तो बांस हैं,जितना काटोगे, उतना हरियायेंगे.बांसुरी बन के, सबका मन तो बहलायेंगे,फिर भी बदनसीब कहलायेंगे.जब भी कहीं...
 पोस्ट लेवल : एक कविता
seema sachdeva
769
दूर से देखा रथ आताब्रज वालों का ठनका माथालगा कान्हा आ रहा आज वहाँहो गये इक्ट्ठे थे जहाँ तहाँरथ देख के आगे भाग पड़ेलगा भाग्य हैं उनके जाग पड़ेकान्हा से मिलने की इतनी लगनउस तरफ था भगा हर इक जनपास से देखा तो चकित हुएयह तो अपना कान्हा है नहीँयह तो कोई और ही है रथ परक्य...