ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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महिला आरक्षण विधेयक के अन्दर आरक्षण की माँग को लेकर हंगामा करने की जरूरत नहीं है। देश ही आरक्षण के सहारे चल रहा है।मुस्लिमों की बात हो रही है, दलित-पिछड़ों की बात हो रही है....... तो विवाद के बजाय आरक्षण हमें भी दे दो। हम हिन्दू हैं हमें भी आरक्षण दे दो, हम सिख हैं...
sangeeta swarup
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वजूद के टुकड़े क्या बांटेंगी उदास शामें और ग़मज़दा रातें जिसने टुकड़े टुकड़े जोड़ कर ही बनाया हो वजूद अपना .
 पोस्ट लेवल : chhoti nazm.....sarwadhikaar surakshit
राजीव तनेजा
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  लीजिए साहिबान …अब ना कोई झमेला ..ना कोई टंटा…चूंकि आ पहुंची है हम तीन तिलंगों की फ़ौज ले के अपनी नई-नवेली..अनूठी ब्लॉग चर्चा   अब ना कोई लफडा…ना कोई खर्चा…पढ़ने को मिलेगी बस… उम्दा …अनूठी…अलबेली ब्लॉग चर्चा   अब ललित शर्मा जी की दुन...
seema sachdeva
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इक रात थी काली अंधियारीजीने की चाह से मैं हारीन खुला था आगे कोई पथलगा, थम गया है जीवन-रथन पास में था मेरे कोईमैं बिलख-बिलख कर बस रोईइक साथ में थे आंसु और गमनैना रहते थे हर दम नमफ़िर एक घडी ऐसी आईआंखें भी मेरी पथराईमैं गम थी या गम ही मैं थाकोई भेद न था , कोई भेद न था...
 पोस्ट लेवल : मैं और तन्हाई
संगीता पुरी
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अक्‍तूबर से ही गोचर में खास स्थिति को देखते हुए मैने मंगल ग्रह के बारे में लेखों की शृंखला प्रकाशित करनी शुरू की थी । 29 अक्‍तूबर 2009 को पकाशित किए गए आलेख में मैने जानकारी दी थी कि आनेवाले दो महीने महत्‍वाकांक्षी युवकों के लिए बडे ही खास रहेंगे। पूरे नव...
हिमांशु पाण्डेय
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दिनचर्या तेरी मेरी सेवा होकुछ ऐसी कमाई हो जाये।हे देव तेरा गुणगान मेरेजीवन की पढ़ाई हो जाये।।यह जग छलनामय क्षण भंगुरखिल कर झड़ जाते फूल यहाँ।अनूकूल स्वजन भी दुर्दिन मेंहो जाते हैं प्रतिकूल यहाँ।मेरे जीवन का सब कर्ता-धर्तासच्चा साँई हो जाये-हे देव तेरा गुणगान 0..........
 पोस्ट लेवल : भक्ति भजन
Amit K Sagar
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आज समाज धर्म या जाति के भंवर में ऐसा फंसा हुआ है कि उचित-अनुचित की सुध-बुध ही खो सी गयी है! धर्मान्तरण पर तो चर्चा खूब जोर-शोर से होती है लेकिन इस पर गौर नहीं किया जाता के ये हो ही क्यों रहा है!यदि हम देखे तो जो हिन्दू बहुत गरीब या अनपढ़ है वो ही धर्म परिवर्तन जैसी...
 पोस्ट लेवल : poem on castism dharm ya jaati
निर्मला कपिला
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व्यंग -- बुढापे की चिन्ता समाप्त आज कल मुझे अपने भविष्य की चिन्ता फिर से सताने लगी है। पहले 20 के बाद माँ बाप ने कहा अब जाओ ससुराल। हम आ गये। फिर 58 साल के हुये तो सरकार ने कहा अब जाओ अपने घर । हम फिर आ गये। फिर दामाद जी ने सोचा सासू मां अकेले मे हमे पुकारती रहेगी...
 पोस्ट लेवल : व्यंग