ब्लॉगसेतु

अमिय प्रसून मल्लिक
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साकी इस क़दर न पिलाओ कि खुमार छा जाएइन आँखों को करना फिर इंतज़ार आ जाएपीता हूँ प्यार भुलाने को, कहीं ऐसा न होकि इस ज़ालिम शराब पर ही प्यार आ जाए।मैं जानता था, इस पाक मुहब्बत का भी कोई नूर निकलेगामेरी सादगी, मेरी दीवानगी का नतीजा ज़रूर निकलेगाहाँ, उम्मीद नहीं थी जो और...
अनीता कुमार
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खुली वसीयतइसके पहले कि तालू से चिपके,ये पटर पटर चलती जबां,सुन मेरी वसीयत बेटा बैठ यहां,कुछ बातें तुझसे कहनी हैं,जो मेरे मरने से पहले और मरने के बाद तुझे निभानी हैं,जब जीवन धारा सूखने लगे, जबां न चले,करवट मौह्ताजी हो, आखँ न खुले,तुझसे मेरी विनती है,इन रिसती सासों को...
 पोस्ट लेवल : कविता
महेश कुमार वर्मा
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Thanks Kadambini for informatin of blogging. I am a new blogger.
 पोस्ट लेवल : कादम्बिनी
महेश कुमार वर्मा
321
I am a new bloger. In this blog I send many topics for discussion. Please waitThanks
अनीता कुमार
405
प्यार तेरा यही अंजामअभी हाल ही में एक खबर छपी थी, कलकत्ता से करीब 175 कि मी दूर कुमारबाजार में एक सर्कस चल रहा था-ओलंपिक सर्कस। सर्कस में एक हथिनी थी सावित्री। 29 अगस्त की मध्य रात्री में एक 26 वर्षिय जगंली हाथी आया, सावित्री को देखा, पहली ही नजर में दोनों को एक दू...
 पोस्ट लेवल : लेख
अनीता कुमार
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मैं मैं मास्टर चाबी हूँ, जब असल चाबी कहीं इधर उधर हो जाती है, मैं काम आती हूँ, मैं वो थाली हूँ, जिस में सहानुभुती के कुछ ठीकरे बड़े सलीके से सजा कर परोसे जाते है...
 पोस्ट लेवल : कविता
अनीता कुमार
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नेट परिवार के मेरे दोस्तों को मेरा नमस्कार, आदाब ,हैलो…मुझे भूल तो नहीं गये थे…। मैं एक बार फ़िर हाजिर हूँ एक और सस्मंरण ले कर। इसके पहले कि आप कहें अरे ये तो ट्रेवल और टूरिस्म का ब्लोग लगता है, मैं आप को बताना चाहुंगी कि अब लंबे अंतराल तक कोई सस्मंरण नहीं आने वाल...
 पोस्ट लेवल : लेख
सुनीता शानू
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विचारों की श्रंखलाटूटती ही नहीएक आता है एक जाता हैदिन भर हावी रहते हैलड़ते रहते हैअपने ही वज़ूद सेऔरविचारों का आना-जानापीछा नही छोड़तानींद में भीपिघलते रहते हैंरात भरस्वप्न में भीऔर नींद खुलने के साथहावी हो जाता है एक नया विचारपूरे दिन की कशमकश मेंजीतता वही हैजो ताकतव...
 पोस्ट लेवल : कुछ दर्द एसे भी
अमिय प्रसून मल्लिक
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रंजो- गम को पीना सीखो !अब तो हँसकर जीना सीखो !!इज़्ज़त जहाँ में जो हुई गलीज़फटे दामन को सीना सीखो !जिनके लिए है खुदगर्ज़ी अहमकरना उनपे यकीं ना सीखो !मिलेगी बेशक जहाँ में राहतबस बनना ग़मगीं ना सीखो !सैर कर हर शय में बेबाकअब ठहरना कहीं ना सीखो !-- "प्रसून"
अमिय प्रसून मल्लिक
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होकर तुमसे जुदा न रह पा रहा हूँ !अपनी बेमायगी किसी से न कह पा रहा हूँ !!चाहता है दिल वक़्त- बेवक्त साथ तेराअब ये तन्हाई बिल्कुल न सह पा रहा हूँ !तह- ए- दिल से चाहा था तुम्हें प्यार करनाक्या जाने क्यूँ इसकी न तह पा रहा हूँ !तेरा मुझको बेरुखी से क़यामत में छोड़ जानाचाह...