ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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आपने ऐसे चित्र पहले कभी नहीं देखे होंगे, ये मेरा विश्वास है....जब आपको यह बताया जाए कि ये धरातल पर महज रंगीन चाक से बनायी गयी आकृतियाँ हैं न कि वास्तविकता, तो आप निश्चित ही दांतों तले उँगलियाँ दबा लेंगे. ये चित्र उकेरे हैं Julian Beever ने. Julian Beever इंग्लॅण्ड,...
 पोस्ट लेवल : Julian Beever Chalk drawings
S B Singh
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तुम फ़िर आनाहम फ़िर बैठेंगे चल करजमुना की ठंडी रेत परऔर करेंगे बातेंदेर तककविता की,कहानियों कीऔर तितलियों की तरहउड़ती फिरती लड़कियों की।तुम फ़िर आनामौसम के बदलने की तरहहम फ़िर बैठेंगे चल करकंपनी बाग़ कीकिसी टूटी बेंच परहरियाली की उस उजड़ रहीदुनिया के बीचदेर तक महकता रह...
संजीव तिवारी
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खबर है कि छत्‍तीसगढ के नक्‍सल प्रभावित क्षेत्र के दुर्गूकोंदल इलाके के गांव कोडेकुर्से में एक किसान लक्ष्‍मण चुरेन्‍द्र ने अपने खेतों के फसलों को बेंचकर बैंक में पैसा जमा करवाया था । अपनी पत्‍नी के इलाज के लिये उसने विगत दिनों बैंक से बीस हजार रूपया निकाला और गांव...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  हिन्दी और संस्कृत भाषा के प्रकाण्ड विद्वान, मनीषी, आचार्य और ग्रन्थकार पं. विद्या निवास मिश्र जी के सारस्वत जीवन पर ‘हिन्दुस्तानी’ त्रैमासिक का विशेषांक निकालने की तैयारी हिन्दुस्तानी एकेडेमी में की जा रही है। इसी सिलसिले में मुझे उनकी कुछ पुस्तकों को देखने...
girish billore
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संजीव तिवारी
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नव संवत्‍सर अभिनंदन
ganga dhar sharma hindustan
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HINDI POETRY BY GANGA DHAR SHARMA "HINDUSTAN"
वंदना अवस्थी दुबे
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चांद उठता है तो, तम दूर चला जाता है, नेह की छांव में गम दूर चला जाता है. चलती राहों पे अपना प्यार लुटाने वालो,इश्क की ओट में,ईमान छला जाता है.आर.आर.अवस्थी
 पोस्ट लेवल : मुक्तक
girish billore
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वंदना अवस्थी दुबे
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Thursday, March 26, 2009"अरे वाह साहब! ऐसा कैसे हो सकता है भला!! इतनी रात तो आपको यहीं हो गई, और अब आप घर जाके खाना क्यों खायेंगे?"’देखिये शर्मा जी, खाना तो घर में बना ही होगा। फिर वो बरबाद होगा।’’लेकिन यहां भी तो खाना तैयार ही है। खाना तो अब आप यहीं खायेंगे।’पापा...