ब्लॉगसेतु

सुमन कपूर
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टिप्पणी देना भी एक कला है ।जिस तरह अपने विचारों , अपने मन के भावों को शब्दों में पिरोकर हम लिखते हैं वो हमारी अपनी अनुभूती होती है अपने विचारों के प्रति .............वो विचार जो धीरे धीरे मानसपटल पर विचरते हुए लेखनी से कोरे कागज में रंग भर देते हैं ।उसी तरह हमारे भ...
 पोस्ट लेवल : मन के विचार
संगीता पुरी
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वैसे तो पूरे ब्रह्मांड में अक्‍सर ही कई प्रकार की दृश्‍यावलि बनती है , पर हम उन्‍हे अपनी आंखो से नहीं देख पाते हैं। प्रतिदिन दूरदर्शी यंत्र की सहायता से नासा द्वारा खींची गयी आसमान की वैसी कोई न कोई तस्‍वीर हम अपने कम्‍प्‍यूटर में देख सकते हैं। पर जब हमारे सौरमंडल...
 पोस्ट लेवल : शु्क्र ग्रह सामयिक
Ashok kumar
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कौन कहता है जमीँ सें,छुआ नहीँ जा सकता आँसमान।नहीँ था जब भूखा,इस तथ्य से था "अंजान";चन्द्रमा भी लगता था मुझे प्रेयसी के समान ।। शिकार को निकला था जंगल मेँ,भूख से था मैँ परेशान।गरिमा से ज्योति बिखेरता चन्द्रमा,लगता था मुझे एक बड़ी रोटी के समान।।www.vishwaharibsr.blogs...
 पोस्ट लेवल : चाँद की ख्वाहिश Kavita
Rajeev Sharma
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लेखन लिख लिख सब गए, लिखा कभी  नहीं  जाये जो लिखा पढ़ तुम भी लिखो लिखा सफल हो जाये
 पोस्ट लेवल : रचना
अरुण कान्त शुक्ला
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                                            &...
Roshan Jaswal
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शिव कुमार बटालवी के 75 वें जन्म दिन पर विशेष ।शुक्रवार 6 जुलाई को अचानक आज की ग़ज़ल पर क्लिक किया। शिव बटालवी के 75 वें जन्म दिन पर आलेख देख हैरत हुई कि मुझसे कैसे चूक हो गई। अपने से वादा किया था कि आज ही जाकर मैं भी कोई रचना डालूंगी। ख़ैर उस दिन नहीं हो पाया। कई व...
Rajeev Sharma
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संगी साथी सब चल पड़े चले मंजिल की ओर एक एक कर बिछड़ने लगे समीप ही मेरी ठोरदोस्तों की भीड़ न थी, जो हैं वो कम होते गएहोश आया तो पाया,  हम हम से हम होते गए  
 पोस्ट लेवल : रचना
वंदना अवस्थी दुबे
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"रमणीक भाई ठक्कर नहीं रहे "....... अखबार के नगर पृष्ठ का मुख्य समाचार था ये आज .' अरे!! रमणीक भाई नहीं रहे!! अब क्या होगा? ' समाचार पढ़ के आभा चिंतित हो उठी. ' क्या होगा माने ? आखिर जिंदा रहने की भी कोई लिमिट होती है. अट्ठासी साल के तो हो ही गए थे, और कितना जिंद...
 पोस्ट लेवल : कहानी
संगीता पुरी
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पिछले सारे लेखों में हमने समझा कि एक छोटी सी जन्‍मकुंडली किस प्रकार जातक के जन्‍म के समय आसमान के पूरे 360 डिग्री और उसमें स्थित सभी ग्रहों को स्‍पष्‍ट करती है। एक छोटे से चित्र में इतनी बातों को समाविष्‍ट कर उस व्‍यक्ति के जन्‍म के समय आसमान की पूरी स्थिति को समझन...
 पोस्ट लेवल : ज्‍योतिष सीखें
रेखा श्रीवास्तव
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****मेरी यह सच कहानी "साप्ताहिक हिंदुस्तान" में सितम्बर १९७८ के अंक में प्रकाशित हुई थी.****        रीना की नियुक्ति सबसे  पहले हमारे कालेज में ही हुई . उसके भोले से चेहरे को देखकर सोचा नहीं जा सकता है कि यह लड़की अपने २८ साल...
 पोस्ट लेवल : कहानी