ब्लॉगसेतु

अविनाश वाचस्पति
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ब्लाग जगत में नित नये हिंदी के चिट्ठों का आगमन हो रहा है, हम उनका हार्दिक स्वागत करते हैं तथा उनसे कामना करते हैं कि वे अपने सार्थक ले्खन से ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे, चलिए मैं ललित शर्मा आपको कुछ नये चिट्ठों की सैर कराता हुं------सबसे पहले एक चिट्ठा लेते हैं संस्...
 पोस्ट लेवल : ललित शर्मा तेताला
महेश कुमार वर्मा
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22 मार्च 2010 को बिहार में बिहार दिवस मनाया गया. बिहार के स्थापना के 98 वीं वर्षगाँठ पर पहली बार मनाया जाने वाला इस बिहार दिवस का मुख्य कार्यक्रम बिहार सरकार की ओर से 22 , 23 व 24 मार्च 2010 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित किया गया. 24 .03 .2010 को बिहार दिवस क...
ललित शर्मा
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पुरुष का जीवन मातृशक्ति के ईर्द-गिर्द ही घुमता है, उसे सबकी सुननी पड़ती है, माँ का हक होता है पुत्र पर तो पत्नी भी उतना ही हक जताती है फ़िर पुत्री भी पिता पर अपना हक प्रदर्शित करती है, इन सब के बीच उसे एक कुशल नट की तरह संतुलन बनाना पड़ता है, जरा सी भी चुक हुई और गृहस...
 पोस्ट लेवल : मातृशक्ति
sangeeta swarup
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कल्पना के इन्द्रधनुष को किसी क्षितिज की दरकार नहीं ये तो उग आते हैं मन के आँगन के किसी कोने में .... http://blog4varta.blogspot.com/2010/03/4_25.html
rashmi prabha
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चलते-चलते सांय-सांय सी ख़ामोशीऔर वक़्त के आईने में मैं !बहुत धुंधला नज़र आता है सबकुछ डर लगता है !जीत की ख़ुशी और अल्पना परप्रश्नों के रंग बिखरे होते हैं...आदत है सहज हो जाने कीवरना..कुछ भी तो सहज नहीं !हर कमरे में डर और शोर का अंदेशा..स्वाभाविक ज़िन्दगी के साथ स...
हिमांशु पाण्डेय
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यूँ ही टहलते हुए नेट पर यहाँ पहुँच गया, शहनाई उस्ताद बिस्मिल्लाह खान और सितार के धुरंधर विलायत खान की जुगलबंदी में चैती धुन सुन कर अघा गया । आपके सामने ले आया हूँ ! सुनिये, रस पगिये । अभी कुछ दिन पहले ही अपने प्रिय संगीत-स्थल पर छन्नूलाल मिश्र जी की चैती का आनन्द...
अजय  कुमार झा
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    हमें क्या पता था कि आपको हमरी कट पेस्ट भी गुड बेटर बेस्ट लगने लगेगी । आप सब न एक दम झूठे हैं जो कुछ भी धर दें आप कह देते हैं बढिया है । अब हमको तो लगेगा ही कि बढिया है …लिया जाए आज की चर्चा भी झेलिए …     फलों से डर लगता है! प्रभु की दया से...
संजय भास्कर
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मेरा रंग दे बसंती चोला, माहे रंग दे। इन लाइनों को सुनने के बाद देश पर जान कुर्बान करने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू की यादें ताजा हो जाती हैं। दो साल पहले भी एक फिल्म रंग दे बसंती के जरिए देश के युवाओं में भ्रष्टाचार आदि से लड़ने की अलख जगाने का प्रयास किया...
 पोस्ट लेवल : आजादी के महानायक
अजय  कुमार झा
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मैंने बहुत बार अनुभव किया है कि जब समाचार पत्रों में किसी अदालती फ़ैसले का समाचार छपता है तो आम जन में उसको लेकर बहुत तरह के विमर्श , तर्क वितर्क और बहस होती हैं जो कि स्वस्थ समाज के लिए अनिवार्य भी है और अपेक्षित भी । मगर इन सबके बीच एक बात जो बार बार कौंधती है वो...
kumarendra singh sengar
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गनपत- क्या यार! क्यों शान्त-शान्त से बैठे हो? मुँहफट- कुछ नहीं यार! कल एक डे निकल गया और हमें कानों-कान खबर भी नहीं हो सकी। गनपत- कौन सा डे, बे? हम तो सारे के सारे डे, दिवस, त्यौहार अपनी डायरी में नोट किया घूमते रहते हैं। हमारी डायरी में तो कल के किसी डे-फे का कॉलम...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य छीछालेदर रस