ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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(१)मेरी तपस्या की अवधि लम्बी रही,रहा घनघोर अँधेरा ,सुबह - नए प्रश्न की शक्ल लिएखड़ी रही..........वो तो चाँद से दोस्ती रहीइसलिए सितारों का साथ मिला -तपस्या पूरी हुई,सितारे आँगन में उतर आए !(२)तुमने मुझे 'अच्छी'कहातो घटाएं मेरे पास आकर बैठ गयीं,मेरी सिसकियों को अपने ज...
मुन्ना के पाण्डेय
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आज फाईनली वह दिन आ ही गया ,जब हमारे सुंदर-सुदर्शन चेहरों को चुना जाना है। अभी-अभी रामजस कॉलेज और ला-फैकल्टी से घूम कर आया हूँ,वैसे आज के दिन यूनिवर्सिटी का मजेदार चेहरा दिख जाता है(मैं ये नही कह रहा कि बाकी दिन यहाँ मुर्दनी छाई रहती है,मगर आज तो कमाल का दिन होता है...
संगीता पुरी
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ज्योतिषी महामानव या भगवान का अवतार नहीं हर जिले में अनिवार्यत: एक जिलाधीश होता है , किन्तु कई जिलों में भटकने के बाद भी एक सही ज्योतिषी से भेंट नहीं हो पाती , ऐसा लोगों का मानना है। इस विरलता का यह अर्थ कदापि नहीं कि ज्योतिषी कोई महामानव या भगवान का अवतार होता है ,...
Arvind Mishra
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National Council of Science and Technology Communication (NCSTC), New Delhi Indian Science Fiction Writers’ Association (ISFWA), Faizabad Indian Association of Science Fiction Studies (IASFS), Vallore Announce The First Ever National Discussion Science Fiction...
 पोस्ट लेवल : Conference
मुन्ना के पाण्डेय
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सांस्कृतिक जीवन में जितना प्रभावित मुझे भिखारी ठाकुर ने किया है,उतना शायद ही किसी और ने। बाद के समय में हबीब साहब के रंग-प्रयोग ने बड़ा प्रभावित किया मगर भिखारी तो बस भिखारी ही थे। लगभग एक साल बाद घर जाने पर गावं की एक शादी में जाने का मौका मिला । जैसा कि मेरे यहाँ...
 पोस्ट लेवल : बिदेसिया के बात
महेश कुमार वर्मा
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ये रिश्ता चीज होती है क्या -------------------------------पता नहीं चलता ये रिश्ता चीज होती है क्या अरे कोई तो बताए ये रिश्ता चीज होती क्या था कभी भाई-भाई का रिश्ता कभी न बिछुड़ने वाला रिश्ता जो हमेशा साथ-साथ खेलता हमेशा साथ-साथ पढ़ता हमेशा साथ-साथ खाता हमेशा साथ-साथ...
rashmi prabha
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आकाश की ऊँचाई ,धरती का आँचल ,चाँद की स्निग्धता ,तारों की आँख मिचौली ,हवाओं की शोखी ,शाम की लालिमा ,पक्षियों का घर लौटना.....क्रमवार मैं इसमें जीती हूँ !पर्वतों का अटल स्वरुप ,इंसानों का अविस्मरनीय परिवेश -मैं बहुत कुछ सीखती हूँ....मैं एकलव्य की तरहइनसे शिक्षा लेती...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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पिछले दिनों मैने एक पोस्ट लिखी थी- “कुछ कचोटते प्रश्न…” यह आलेख एक ऐसे परिवार के ऊपर आधारित था जहाँ पति-पत्नी दोनो नौकरीशुदा थे; और उनकी ८-९ माह की बच्ची की देखभाल एक वेतनभोगी नौकरानी के हाथों में थी। उस ‘धाय माँ’ के हाथों प्रताड़ित होती मासूम को देखने के बाद मेरे म...
अनीता कुमार
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मोरया रे बप्पा मोरया रेकल गणेश चतुर्थी है। महाराष्ट्र में गणेश पूजा का महत्त्व उतना ही है जितना बंगाल में दुर्गा पूजा का। चारों तरफ़ हर्षोल्लास का वातावरण है, ये बिगुल है कि त्यौहारों का मौसम आ चला। अब बीच में श्राद्ध पक्ष को छोड़ दें तो दिवाली तक सब तरफ़ रौनक रहेगी।...
 पोस्ट लेवल : लेख
सुनीता शानू
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हिन्दी-मीडिया पर प्रकाशितऎ गणपत चल दारू ला, क्या परोस रहे हैं हम और आप अपने बच्चों को" एक टी वी चैनल पर रामायण का विज्ञापन दिखाया जाता है, कि आईये हम अपने बच्चों का भविष्य संवारें, परन्तु जैसे ही रामायण शुरू होती है बच्चे मुँह बना उठ खड़े होते है और वहाँ स्थान ले ले...
 पोस्ट लेवल : व्यंग्य लेख