ब्लॉगसेतु

अनीता कुमार
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    कल युनुस जी के निमंत्रण पर हम पति समेत विविध भारती के  स्टुडिओ पहुंचे थे, हमारे अलावा बोधीस्तव और आभा जी और दो और जोड़े वहां पहुंचे थे। विविध भारती की पचासवीं वर्षगांठ के अवसर पर विविध भारती  कई खास कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है, पिछ्ले म...
rashmi prabha
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ज़िंदगी विषमताओं ,विरोधाभासों से भरी थी,कब सुबह हुई,कब रात!कुछ होश नही रहता था.....अन्दर से आती दुर्गन्ध से जानासारी इक्षायें मर चुकी थीं ,सड़ चुकी थीं......उसके ऊपर सलाहों,ताने-बानों कीमक्खियाँ भिनभिना रही थीं.......लेकिन कर्ण कवच ने साँसों की प्रत्यंचा थाम रखी थी!...
अनीता कुमार
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विमल जी की ठुमरी दोस्तों आप को याद होगा कुछ महीने पहले बम्बई में ब्लोगरस मीट हुआ था आई आई टी के प्रांगण में जब मनीष जी यहां आये थे और मैं, विमल, प्रमोद, अभय, विकाश, अनिल, युनुस जी उनसे मिलने गये थे। अब जब इतने संगीत प्रेमी एक जगह जमा हो तो गीतों की महफ़िल लगना तो...
 पोस्ट लेवल : लेख
सुनीता शानू
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दोस्तो रोजमर्रा की जिन्दगी में कहीं आप भी कुछ भूले तो नही? अगर लगता है कुछ भूल रहे है तो हो सकता है याद आ ही जाये आपको भी... एक छोटी सी पेशकश है...-घर से ऑफ़िस--ऑफ़िस से घर--आते जाते--हमेशा भूल जाता हूँ...-मगर आज सब याद है--बेटा ये लो तुम्हारा चॉकलेट--ठीक है न--मुन्न...
 पोस्ट लेवल : कुछ दर्द एसे भी
महेश कुमार वर्मा
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कहाँ जाऊंगा मैं तुम्हें छोड़कर नहीं रह सकता में तुमसे नाता तोड़कर चले न जाना तुम मेरा दिल तोड़कर आ जाना तुम मेरा अपना बनकर जी नहीं सकता मैं तुम्हें छोड़कर जी नहीं सकता मैं तुम्हें छोड़कर
 पोस्ट लेवल : कविता
अमिय प्रसून मल्लिक
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चाहे जहाँ में मैं भटकता ही फिरूं,मगर मेरी नज़र बस तेरी ओर होती है !सुनकर कभी देखना तुम मेरी आत्मा की आवाज़और समझना, क्यों है इसमे इतनी तपिश !तेरे कर्म-पथ की ना बाधा बनूँगा तुझे आवाज़ देकरकर्म की असफलता की तुम ख़ुद महसूस करना ख़लिश !क्योंकि प्रेम-भिक्षा मांगकर दिल खुद...
अमिय प्रसून मल्लिक
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पहले कभी न ऐसा लगा,दर्द न उठा कभी भीतर सेतेरी ख़ामोश आँखों नेपहले कभी शिक़ायत न की,पहले क्यूँ तेरी बातेंमैं उड़ा देता था हवाओं में,पहले तेरा वक़्त- बेवक्तहामी भरना हर बात में,अब क्यूँ तेरी समझपरिपक्व हो चली है,क्यों रहती थी तू पहलेमेरे साथ चिपककर हमेशा,क्यूँ मेरा साथ...
rashmi prabha
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मकसदों की आग तेज होमनोबल की हवाएँ होतो वो आग बुझती नहीं हैमंजिल पा कर ही दम लेती है...आँधियाँ तो नन्हें दीपक से हार जाती हैंसच है ,क्षमताओं को बढाने के लिएआँधी तूफ़ान का होना ज़रूरी होता है...प्रतिभाएं तभी स्वरूप लेती हैंजब वक़्त की ललकार होती है....जो ज़मीन बंज़र द...
महेश कुमार वर्मा
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यदि कोई नहीं है इस दुनिया में सच्चाई पर चलने वाला यदि कोई नहीं है इस दुनिया में सच्चाई का साथ देने वालायदि कोई नहीं है इस दुनिया में ईमानदारिता पर चलने वाला यदि कोई नहीं है इस दुनिया में निष्पक्षता पर चलने वाला यदि कोई नहीं है इस दुनिया में मुझको न्याय दिलाने वाला...
 पोस्ट लेवल : इच्छा कविता
rashmi prabha
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कुन्ती पुत्र कर्ण"सूत पुत्र" की धार परक्षत्रिय होने का क़र्ज़ चुकाता रहा।कर्तव्य ! परिवार ! राज्य के नाम परअपने "स्व" की परीक्षा देता गया कुन्ती की एक खामोशी नेउसके जीवन का सम्पूर्ण अध्याय बदल डालाहर कदम परएक परिचय के नाम पर अपमान का गरल पीता गयासगे भाइयों के होतेभ...