ब्लॉगसेतु

अनीता कुमार
0
आलोक जी का रावणआलोक जी के रावण को देख एक दृश्य मेरे जहन में कौंध रहा है, आप भी देखिए।रावण ज्ञानद्त्त जी के सैलून जैसे ड्ब्बे में सफ़र कर रहा था, फ़र्क सिर्फ़ इतना था कि ज्ञानदत्त जी अकेले सफ़र करने का मजा लूट सकते हैं साथ में सिर्फ़ अर्दली और रावण लालू की तरह लंबी चौड़ी...
 पोस्ट लेवल : इधर उधर की
Raam Mishra
0
Chapter 3: verse 28-29 तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः। गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते॥२८॥   But, O mighty-armed, he who knows the real nature of the constituent qualities (gunas) and their functions, understands that qualities move amidst...
 पोस्ट लेवल : Chapter 3 । अध्याय ३
महेश कुमार वर्मा
0
हमें यह नहीं भूलना चाहिए की हर सफलता के पीछे किसी-न-किसी रूप में एक महिला का हाथ रहता है । आज पुरुष वर्ग घर में जहाँ अपने हरेक कार्य के लिए एक महिला पर निर्भर रहते हैं वहीं अनावश्यक कभी वह आपे से बाहर होकर उसी महिला को तरह-तरह के यातना व प्रताड़ना देने लगते हैं । उ...
 पोस्ट लेवल : महिला विचार
अमिय प्रसून मल्लिक
0
शराब पी- पीकर साकी हम बड़े हुए हैंआज मयखाने में शरीफों संग खड़े हुए हैंसबकी आँखों में देखो इक नश्शा-सा है,कौन जानता है, सारे-के-सारे मरे हुए हैं!बोतल संग लिपटकर हम हर बार ज़िन्दा हुएमाना कि अपनों की नज़र में शर्मिंदा हुएपर मय के साथ सोहबत रही पाक मेरी,हाँ, शरीफ़ों की न...
Raam Mishra
0
Chapter 3: Verse 26-27न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम्।जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन्॥३-२६॥The wise should not confuse the mind of ignorant who are attached to fruits of action. He should engage them in all actions while performing his (own) dutie...
 पोस्ट लेवल : Chapter 3 । अध्याय ३
संजीव तिवारी
0
‘अगासदिया’ के संपादक व प्रसिद्ध कहानीकार डॉ.परदेशीराम वर्मा जी नें वर्तमान में देश के विलक्षण धनुर्धर एवं मंचीय योद्धा कोदूराम वर्मा के समग्र अवदानों को केन्‍द्र में रखकर उन पर रजत जयंती विशेषांक प्रकाशित किया है, जिसमें रमेश नैयर, डॉ.डी.के.मंडरीक, डॉ.विमल कुमार पा...
अविनाश वाचस्पति
0
जीत के फीतेबाहर न निकलने पाएअपनी हार सेइतने हार पहनाए भारत नेहार पहना पहना करहराया खिलाड़ियों नेन तो वे खेल पाएन हमें खेलने से रोक पाएवे आस्ट्रेलियाहम भारतवे हारेहम जीतेवे बीतेहम सुभीतेक्रिकेट मेंटांक दिएजीत के फीते
अविनाश वाचस्पति
0
जीत की सरगमतुक्का नहीं थासच है यहहम जीते हैंहम जीतेंगेसदा विजयी हमसुनो जीत की सरगमगम आस्ट्रेलिया कोसर हमारा ऊपरवे चाहे उछलेंहम संयतवेतेज गतिहम जीतकभारत हैं हम
संजीव तिवारी
0
छत्‍तीसगढ में पारंपरिक रूप में गाये जाने वाले लोकगीतों में जसगीत का अहम स्‍थान है । छत्‍तीसगढ का यह लोकगीत मुख्‍यत: क्‍वांर व चैत्र नवरात में नौ दिन तक गाया जाता है । प्राचीन काल में जब चेचक एक महामारी के रूप में पूरे गांव में छा जाता था तब गांवों में चेचक प्रभावित...