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भारतीय संस्कृति में "बाबा" शब्द एक अहम् स्थान रखता है . बाबा शब्द फ़ारसी भाषा का शब्द है और इस शब्द को साधू संतों के लिए आदरसूचक शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है . बाबा शब्द जहन में आते ही एक ऐसे व्यक्ति का चित्र मानस पटल पर उभरता है जो तप और त्याग की मूर्ति हो...
जैसे ही सरकारें बदलती हैं वैसे ही नीतियाँ भी बदल जाती है, और आज तो स्थिति यहाँ तक पहुँच गयी है कि देश की राजनीति व्यक्ति केन्द्रित हो गयी है. जो आने वाले समय के लिए यह सबसे अन्धकारमय और खतरनाक पहलू है. गतांक से आगे...!!!!   व्यक्ति पर केन्द्रित होती राजनी...
मानव सभ्यता के विकास में दीवारों और पुलों की बहुत महती भूमिका है. उसने अपने आश्रय के लिए दीवारों का निर्माण किया और खुद को सुरक्षित महसूस किया, और पुलों का निर्माण कर उसने एक सीमा से दूसरी सीमा में प्रवेश किया. कभी-कभी तो मानव के यह अभिनव प्रयास सोचने पर विवश करते...
जीवन और साहित्य एक दूसरे के पर्याय हैं . जिस तरह जीवन की कोई सीमा नहीं , उसी तरह साहित्य को भी किसी सीमा में बांधना असंभव सा प्रतीत होता है . सीमा तो शरीरों की है . लेकिन भाव तो शाश्वत है , भाव मानव जीवन की अमूल्य पूंजी है और इसे अभिव्यक्त करने के माध्यम भी कई है ....
सूचना तकनीक के इस दौर में व्यक्ति की यांत्रिक चीजों पर बढती निर्भरता ने व्यक्ति के काम करने की कुशलता को भले ही कम किया हो लेकन उसे आसान जरुर बनाया है . आज अकेला व्यक्ति ही कई व्यक्तियों का काम कर सकता है . विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जाने वाली इस तकनीक ने वैश्व...
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जीवन में प्रार्थना का महत्व किसी से छुपा नहीं है . व्यक्ति जब जिन्दगी की जंग में हार जाता है तो वह अपने ईष्ट से प्रार्थना करता है और अगर हमारी प्रार्थना सच्चे मन से निकली होती है तो फिर स्वाभाविक है कि प्रार्थना पूर्ण हो जाये .....लेकिन भौतिक सुखों की प्राप्ति के...
गतांक से आगे.....रचनाकर्म में स्पष्टता का अपना महत्व है. हम कुछ भी सृजन कर रहे हैं लेकिन जितनी हमारी विषय और विचार के प्रति स्पष्टता होगी उतना ही हमारा सृजन बेहतर होगा. कालजयी सृजन निश्चित रूप से विषय के प्रति स्पष्टता का ही परिणाम होता है . पूर्वाग्रहों और पक्षपात...
गतांक से आगे.....जीवन का मंतव्य जब कला की साधना बन जाता है तो फिर जीवन उस कला में रम जाता है. फिर कला ही जीवन बन जाता है और ऐसा सर्जक निश्चित रूप से कला को नया आयाम देते हुए जीवन की सार्थकता को सिद्ध कर देता है. ब्लॉगिंग की जहाँ तक बात है यह तकनीक और कला का अद...
गतांक से आगे....जैसे ही सृजन का क्रम प्रारंभ हुआ वैसे ही उसे और बेहतर बनाने के लिए कुछ मूल बिंदु भी निर्धारित किये गए. यह आप किसी भी क्षेत्र में देख सकते हैं. संगीत, साहित्य, शिल्प, वास्तुशास्त्र, ज्योतिष, विज्ञान, योग आदि  ना जाने कितने आयाम हैं सृजन के, सभी...
सृजन मानव का स्वभाव है. यही उसकी चेतना का प्रतिबिम्ब भी है. मानव मन-मस्तिष्क में चलने वाली हलचल, भावनाओं और विचारों का अनवरत प्रवाह सृजन के माध्यम से बाहर की दुनिया में प्रवेश करता है. जब तक सब कुछ हमारे मन-मस्तिष्क में घटित हो रहा है, तक वह हमारा है. जैसे&nbs...