ब्लॉगसेतु

कुछ आवश्यक कारणों से  " चतुर्वर्ग फल प्राप्ति और वर्तमान मानव जीवन " वाली  इस पोस्ट का अगला भाग पोस्ट नहीं कर सका हूँ ....आप सबसे क्षमा याचना सहित यह कविता पोस्ट कर रहा हूँ ......!मनुष्य जो मुक्ति की,सुख,शांति की चाह रखता हैउसे मौत से डर लगता है?मन और बुद...
 पोस्ट लेवल : जीवन Kewal Ram मोक्ष कविता
जीवन की नियति और परिणति क्या है,  इस बात से सभी भली भांति अवगत हैं . लेकिन फिर भी हम सब कुछ जानते हुए अनजान बने रहते हैं . सब कुछ हमारे सामने घटित होता है .  फिर भी हम मूकदर्शक की भूमिका निभाते हैं . हमारे सामने ना जाने कितने ऐसे अवसर आते हैं जब हम जीवन...
याद  जब मोहब्बत की दिल को सोंप दिया तुम्हें , सहज ही और तब तुमने कहा ...... "बहुत याद आते हो तुम" एक अजीब सा अहसास हुआ आज जब जिन्दगी वीरान हो गयी तुम्हारी याद तडपाती है तुम तो हमेशा याद  रहते हो लेकिन ...........! एक अरसा हो गया खुद को या...
तन्हाई  मैंने तन्हाई में तुम्हें भूलने की कोशिश की पर जब मैं ...... अचेत अवस्था में तुमसे रूबरू हुआ तो गहरे में उतरकर मैंने महसूस किया कि मेरी रूह हो गयी हो तुम और ..... तुम्हारी यादें मेरा जीवन ! xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxराहें  आज जब जुदा हैं...
तुमसे  है  मेरी यही गुजारिश तुम मेरे ......ख्यालों में  मत आना . माना कि मैं हूँ तेरा दिवाना फिर भी करता हूँ प्रार्थना तुम मेरे ख्यालों में आकर मुझे मत सताना . तुम मेरे लिए अपने हो पर तुम्हारे लिए मैं हूँ बेगाना . कभी तुम मेरी दहलीज पर आकर देखना कि म...
जीवन एक अनवरत चलने वाली प्रक्रिया है. साँसों का यह सफ़र इंसान को किस पड़ाव तक ले जाए यह निश्चित नहीं है. जब तक साँसें चल रही है जीवन है, सांसें रुकी की नहीं जीवन समाप्त समझो. लेकिन साँसों के रुकने से जीवन समाप्त नहीं होता हमें यह बात समझ लेनी चाहिए. हालाँकि इस जीवन...
सूचना और तकनीक के इस दौर में रंगमंच की महता कम हो गयी. वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर अगर दृष्टिपात करें तो यह महसूस होता है कि मानव ने भौतिक विकास के कई आयाम हासिल किये हैं. भौतिक विकास की दृष्टि से मानव ने काफी उपलब्धियां हासिल की हैं और वह इन उपलब्धियों को निरंतर ह...
एक ग़ज़ल अपने कॉलेज के दिनों की डायरी से .....ख्यालों -ख्वाबों -सपनों का क्या है ?  ना जाने कब दिल में आ जाएँ और अपना प्रभाव छोड़ कर चले जाएँ , किसी की यादों में, हम सोचते रह जाएँ उनके बारे में कुछ यूँ .....! नादाँ हूँ बहुत तुम मुझे अपनाया करो गर हो जाए खता...
 पोस्ट लेवल : सोच प्रेम ग़ज़ल
पिछले अंक से आगे ......!            पहला और दूसरा अंक यहाँ देखेंपिछले दो अंकों में मैंने भ्रष्टाचार के विभिन्न पहलुओं  पर विचार किया , तथा यह प्रश्न मेरे मन में उभर कर आया कि भ्रष्टाचार को समाप्त करने के ल...
गतांक से आगे ..........!                    पहला अंक यहाँ देखेंभ्रष्टाचार की लीला भी अजीब है . यह कभी मेज के नीचे आता है तो कभी मेज के उपर , कभी पंच सितारा होटल में किसी...