ब्लॉगसेतु

दीपखुद को जलाताकिसी दूसरे को प्रकाश सेसरावोर करने के लिएरिश्ता दीप का उससे कोई नहींन ही कोई चाह है उससेन कोई बदले का भावफिर भीदीपउसे प्रकाश दे रहा हैसिर्फ अपने कर्तव्य की पूर्ति के लिए.दीपशिक्षा है संसार के लिएजो खुद को जलाकरमार्ग बना रहा है दूसरों के लिएअँधेरा चाह...
वर्षों पहले पहाड़ दुर्गम था, दूर होना कोई प्रश्न नहीं था?था तो पहाड़ का दुर्गम होना. सोचता था..... कभी पहाड़ की चोटी तक पहुंचा तो छू लूँगा आसमान हालाँकि यह भी भान था कि पहाड़ होता है वीरान.फिर भी पहाड़ मुझे खींचता था अपनी ओरया कभी ऐसा भी हुआ मैं खुद ही खिंच गया पहाड़ की...
गत अंक से आगे... मन वचन और कर्म के पहलुओं को समझाने की कोशिश कई तरीकों से की जाती. गाँव के बुजुर्ग गाँव के हर बच्चे के साथ अपने बच्चे जैसा व्यवहार करते, इसलिए बच्चों के पास कोई अवकाश नहीं होता था कि वह किसी के साथ उदंडता से पेश आये. अगर कभी ऐसी भूल हो भी जाती थी तो...
गत अंक से आगे.... गाँव में जीवन का क्रम जन्म से लेकर मृत्यु तक एक दूसरे के सहज सहयोग पर आधारित होता. लेकिन फिर भी कहीं पर मानवीय स्वभाव और स्वार्थ जरुर सामने आता, और यह जीवन की वास्तविकता भी है. फिर भी गाँव में जीवन सदा ही सुखद और सहज महसूस होता. कहीं कोई भागदौड नह...
गाँव से बाहर रहते हुए मुझे लगभग 16 वर्ष हुए हैं. 2000 से 2005 के बीच के समय में साल में लगभग दो से तीन महीने गाँव में गुजरते थे. लेकिन 2005 के बाद यह सिलसिला महीने भर का हो गया और अब पिछले तीन-चार सालों से कुछ ऐसा सबब बना है कि साल दो साल में 10-15 दिनों के लिए ही...
जीवन एक सफर है और शरीर इस सफर का एक पड़ाव. भारतीय दर्शन में निहित तत्व हमें इस पहलू की जानकारी बखूबी देता है. जीव और शरीर दोनों को अलग करके देखें तो भारतीय दर्शन की पक्की मान्यता है कि शरीर की यात्रा सीमित है और जीव की यात्रा अनन्त है....
गतअंक से आगे... इस यात्रा का अनुभव अद्भुत है, लेकिन यह महसूस तब होता है जब हम इसे महसूस करना चाहते हैं. अधिकतर तो मनुष्य के साथ यह होता है कि वह जैसे-जैसे जीवन की यात्रा को तय करता है, वैसे-वैसे उसके दिलो-दिमाग पर कई तरह की परतें जमती जाती हैं. उसके मन में कई तरह क...
मनुष्य चेतना का प्रतिबिम्ब है और यही इसकी वास्तविक पहचान है. वैसे अगर चेतना के इस दायरे को मनुष्य से बाहर की दुनिया पर भी लागू किया जाए तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. जब हम इस बात को स्वीकारते हैं कि इस सृष्टि के कण-कण में इसे रचने वाली चेतना समाई है तो सभी...
इतिहास शब्द जहन में आते ही हम अतीत के विषय में सोचना शुरू करते हैं. संभवतः हम अतीत के विषय में जानने और समझने के लिए कल्पना का सहारा कम ही लेते हैं. कल्पना की ऊँची उड़ान तो भविष्य के लिए है. अतीत के लिए तो सोच है, समझ है, तर्क है और अंततः अतीत तथ्य पर आकर रुकता है औ...
राह चलतेजीवन के सफ़र मेंमंजिल को तय करतेमिले मुझे लोग कईअपनी-अपनी विशेषता से भरपूरजिनमें अक्स देखा मैंनेअपनी भावनाओं का, अपने विचारों कासमर्थन का-विरोध काप्रेम का-नफरत का, अच्छे और बुरे का भीजितने नज़ारे हैं,इस जहान में-उस जहन मेंजितने अनुभव हैं, दुनिया मेंएक-एक कर स...