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चिन्तन मनुष्य की सहज प्रवृति है. यह गुण उसे प्रकृति द्वारा प्रदत्त है. चिन्तन के इसी गुण के बल पर उसने प्रकृति के रहस्यों को समझने की भरपूर कोशिश की है, और आज तक वह इस दिशा में अनवरत क्रियाशील है. उसके चिन्तन के अनेक आयाम हैं और हर एक आयाम का अपना एक महत्व है. दुन...
जहाँ हम अपनी प्राथमिकताओं को निर्धारित करके प्रेम करने की कोशिश करते हैं वहां हम सामने वाले को तो धोखा दे सकते हैं, लेकिन प्रेम का जो वास्तविक आनंद है उसे प्राप्त नहीं कर सकते. ऐसी स्थिति में हमें अपने मन को एक बार नहीं हजार बार टटोलने की आवश्यकता होती है. लेकिन जो...
प्रेम एक ऐसा शब्द जो हमारे जीवन का अहम् हिस्सा है, एक ऐसा भाव जिसके बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते, और एक ऐसा जूनून जो हमें जीवन के मायने सिखाता है. प्रेम मनुष्य ही नहीं बल्कि हर प्राणी के जीवन का आधार है. दुनिया में जो कुछ भी हमारी समझ में आज तक आया है, वह...
यह भी एक सच है कि व्यक्ति जीवन में चाहे जितनी भाषाओँ की जानकारी हासिल कर ले, उन्हें सीख ले, लेकिन जो सोचने और समझने की प्रक्रिया है वह तो उसकी मातृ भाषा के माध्यम से ही संपन्न होती है. इतना ही नहीं मातृ भाषा का प्रभाव उसके जीवन और उसके व्यक्तित्व पर हमेशा झलकता रहत...
अपने आस-पास ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में नजर दौड़ाकर देखता हूँ तो सम्पूर्ण क्रियाएं मुझे शब्दों की ही अभिव्यक्ति लगती हैं. लेकिन इससे और आगे बढ़ते हुए देखता हूँ तो सब कुछ मुझे ‘शब्द’ ही नजर आता है. कहीं गहरे में उतरकर देखता हूँ तो मुझे वह अवधारणा साकार होती हुई नजर आ...
अक्सर जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे हम कहते हैं कि उसने देह त्याग दी. लेकिन यह सच नहीं है, देह का साथ आत्मा छोड़ देती है और शरीर निर्जीव हो जाता है, उसकी सारी इन्द्रियाँ काम करना बंद कर देती हैं और ऐसी स्थिति में हम उस शरीर को निर्जीव कह देते हैं, जो कि स्वाभा...
हालाँकि जहाँ तक आत्मा की बात है उस विषय में हमें स्पष्ट हो जाना चाहिए कि यह ही सम्पूर्ण ब्रह्मंड में फ़ैली चेतना का ही एक रूप है. गतांक से आगे ....!!! यह आत्मा इस चेतन सत्ता का ही प्रतिरूप है, दूसरे शब्दों में ऐसा भी कह सकते हैं कि यह आत्मा इस पांच तत्व परमसत्त...
इस धरा पर ही नहीं सम्पूर्ण ब्रहामंड में जो कुछ भी है यह सब मिटने वाला है. जो भी पैदा हुआ है या निर्मित हुआ है उसे एक दिन अपने वास्तविक स्वरूप में आना ही है. जिन तत्वों से उसका निर्माण हुआ है उन तत्वों को एक दिन निश्चित रूप से अपने स्वरूप में लौटना ही है, इसलिए यह क...
गतांक से आगे वह बात तो भविष्य को बदलने की करते हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान और इतिहास की कोई ख़ास समझ नहीं होती, बस वह एक राग अलापते हैं और उसी के बल पर अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश करते हैं. उनका सिर्फ एक ही मकसद है ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपनी आवाज पहुंचाना, ज्...
वैसे तो परम्पराओं के प्रति आकृष्ट होना कोई बुरी बात नहीं है, वह हमारे जीवन और आधार का हिस्सा हैं, हमें उनका निर्वाह करना चाहिए, लेकिन वक़्त और हालात को देखते हुए, उनकी प्रासंगिकता और व्यावहारिकता को देखते हुए. वर्ना हममें इतना भी साहस होना चाहिए कि हम उन पुरानी, अव्...