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मैं जब भी कहीं दूर पहाड़ की चोटी की तरफ देखता हूँ तो मुझे उसमें कोई बदलाब नजर नहीं आता, और जब उस पहाड़ की चोटी से दुनिया को देखता हूँ तो बहत कुछ बदला हुआ नजर आता है. ऐसे में एक ही स्थान के बारे में मेरे दो दृष्टिकोण उभरकर सामने आते हैं. जब मैं अपनी ही दुनिया में रहकर...
परिवर्तन प्रकृति का नियम है और यही इसकी पहचान भी है. प्रकृति अपने चक्र के अनुसार सदा बदलती रहती है और इसी कारण हमें इसमें कहीं पर भी पुरानापन नजर नहीं आता. सूरज नित नए रूप में हमारे सामने प्रकट होता है एक नयी ऊर्जा लेकर, तारों की टिमटिमाहट भी हमसे बहुत कुछ कहती है,...
आजकल जितने भी ऐसे छुटभये तैयार हुए हैं उनके कई तरह के नकारात्मक प्रभाव हमारे समाज और देश पर पड़ रहे हैं और जिस धर्म की आड़ में वह यह सब कुछ कर रहे हैं वह वास्तव में धर्म को स्थापित करने जैसा नहीं है, बल्कि भोले-भाले लोगों को अधर्म की तरफ ले जाने वाला मार्ग है. गतांक...
इतिहास ऐसे उदाहरणों से भरा पडा है, खासकर मध्यकाल के बाद का इतिहास जब इस देश की शासन व्यवस्था का जिम्मा विदेशी शासकों ने अपने हाथ में ले लिया था और अपने मकसद को पूरा करने के लिए वह तरह-तरह हथकंडे अपनाते थे और यह परम्परा आज तक भी जारी है. गतांक से आगे  भारत जैसे...
हमारी संस्कृति का कोई भी पहलू ऐसा नहीं जिसमें अध्यात्म शामिल न हो, धर्म की बात न हो, सब पहलूओं में सब कुछ शामिल होने के कारण भी हर पहलू की अपनी विशेषता होना भारतीय संस्कृति को अद्भुत बनाता है और यही इसकी जीवटता का सबसे सशक्त प्रमाण है. गतांक से आगे..!!भारतीय संस्कृ...
जन्मदिन हर किसी की जिन्दगी का अहम् दिन होता है. जीवन में चाहे कैसी भी स्थिति हो हम इस अवसर पर खासे रोमांचित होते हैं और माता-पिता के साथ-साथ ईश्वर को भी धन्यवाद देते हैं. जीवन में माता-पिता हमारे लिए पूजनीय होते हैं और ईश्वर अराध्य, माता-पिता साधन होते हैं तो ईश्वर...
भारतीय सभ्यता और संस्कृति को जब हम गहराई से विश्लेषित करते हैं तो इसकी जड़ें और गहरी होती जाती हैं, हम जितना इसको समझने की कोशिश करते हैं, उतना ही हमें ऐसा आभास होता है कि अभी हम कुछ जान ही नहीं पाए हैं और यही इस संस्कृति की विशेषता है. इसके पीछे स्पष्ट बात तो यह है...
आजादी का अगर सीधा सा अर्थ किया जाए तो इस मतलब होगा अपनी व्यवस्थाओं में जीना, लेकिन जिस भारत की आजादी का जश्न हम बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं (यह तो होना भी चाहिए) उसमें अगर हम आज तक के  (66 वर्षों) समय को गहराई से विश्लेषित करें तो पूरी सच्चाई एकदम स्पष्ट रूप स...
उसने बैगाना समझ कर भुला दियाआज फिर उसकी याद ने रुला दिया खुशियाँ तो हासिल नहीं हुई हमें उससेमोहब्बत के बदले गम का सिला दिया उनकी याद आती है अब हर सांस में दिल की नगरी में ऐसा गुल खिला दिया  उतरा नहीं है नशा इश्क का अब  भी जाम इलाही उसने&nb...
 पोस्ट लेवल : सिला याद ग़ज़ल मोहब्बत
किसी पक्षी को जब पिंजरे से बाहर की दुनिया में प्रवेश करते हुए देखता हूँ तो उसकी चहचहाहट का स्वर ही इतना मोहक और आनन्ददायक होता है कि मन झूम जाता है . उस पक्षी को हालाँकि उस पिंजरे में तमाम सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जो उसके जीवन को चलाने में सहायक होती हैं, लेकिन जब वह...