ब्लॉगसेतु

साल 2013 जैसे ही शुरू हुआ या उससे कुछ दिन पहले ही मीडिया ने देश के प्रधानमन्त्री को लेकर एक बहस छेड़ दी, और आज तक यह बहस अनवरत रूप से जारी है. संभवतः 2014 में जब तक चुनाव नहीं हो जाते तब तक यह जारी रहेगी. इसे बहस कहना तो सही नहीं है, आप कहेंगे क्योँ? तो मेरा सीधा सा...
गतांक से आगे  आत्मानुशासन जीवन की अनिवार्यता है. जो व्यक्ति इसे अपना लेता है वह अपने लिए और दूसरों के लिए प्रेरणा और ख़ुशी का कारण बनता है. जीवन का यह अनुभूत सत्य है जब हम आत्मानुशासन को साथ लेकर चलते हैं तो बहुत सी बुराइयों से बचे रह सकते हैं और अपने परिवार और...
पिछले अंक से आगे दुनिया के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ जब नारी और पुरुष को सामान समझा गया हो और यही बड़ी भूल है दुःख तो तब होता है जब घर में जन्म देने वाले माँ-बाप ही लड़की के साथ भेद भाव करते हैं. हालांकि आज के दौर में आप ऐसा कह सकते हैं कि स्थिति बदल गयी है तो...
गतांक से आगे इतिहास चाहे नारी के विषय में कुछ भी कहता है लेकिन हमें वर्तमान को देखने की जरुरत है, और यह भी सच है कि आज अगर हम सही और तर्कपूर्ण निर्णय ले पाएंगे तो निश्चित रूप से हमारा इतिहास गौरव करने लायक होगा. हमें इस बात को भी समझना होगा कि इतिहास के निर्माण में...
गतांक से आगे   हमारे देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के परिदृश्य पर अगर दृष्टिपात करें तो स्थितियां संतोषजनक नहीं है. व्यक्ति का सोच के स्तर पर संकीर्ण होना आने वाले भविष्य के लिए ही नहीं बल्कि वर्तमान के लिए भी दुखदायी साबित हो रहा है. ऐसी स्थिति में हमारे...
पिछले कुछ अरसे से नारी शब्द एक तरह से बहस का मुद्दा बना हुआ है. सड़क से संसद तक इस मुद्दे पर चर्चाएँ होती रही हैं. अख़बारों के प्रत्येक पृष्ठ पर उसकी दास्तान अभिव्यक्त की जा रही है और समाचार चैनल बहुत कलात्मक और रहस्यमयी ढंग से उसके जीवन की कहानी को लोगों को दिखा रहे...
एक रचनाकार ने किसी पुस्तक में बेशक अपनी व्यक्तिगत भावनाओं, अनुभूतियों और चिंतन को अभिव्यक्ति दी है , लेकिन जब वह कला के माध्यम से अभिव्यक्त  हुई है तो वह पाठक के लिए रोचक और उसके जीवन, उसकी दृष्टि को बदलने वाली होती है .....!! गतांक से आगे…!! एक पुस्तक के माध...
पुस्तक की महता का कोई पैमाना शायद आज तक निश्चित नहीं हो पाया है कि वह कितनी महत्वपूर्ण है, लेकिन एक संकेत देता चलूँ कि आज जिन रचनाकारों के सामने हम नतमस्तक होते हैं उन चिंतन और व्यक्तित्व अगर किसी माध्यम से हमारे सामने आया है तो वह हैं 'पुस्तकें' ....!गतांक से आगे...
संवाद स्थापित करना प्राणी की अनिवार्य और महत्वपूर्ण आवश्यकता है. अगर हम यह कल्पना करें कि जब संवाद स्थापित करने के साधन नहीं थे तो जीवन कैसा रहा होगा ? संवाद करना सिर्फ मनुष्य की ही नहीं, प्राणी मात्र की आवश्यकता है. हर एक प्राणी अपने भाव को प्रकट करता है और उसे प...
भारतीय जन जीवन को जब देखते हैं तो यहाँ पर शुभकामनाओं की बड़ी महता नजर आती है । सोने से लेकर जागने तक, शाम से सुबह तक, मृत्यु से जीवन तक, जड़ से चेतन तक, युद्ध से शांति तक, हार से जीत तक, प्रकृति से परमात्मा तक । शुभकामनाओं का यह सिलसिला अनवरत रूप से चलता र...