ब्लॉगसेतु

          नमस्कार दोस्तों!......कहते है, ''जान है तो जहान है!''......शायद सच ही है!...जिन्दगी के कुछ सपने है, कुछ लक्ष्य है, जिन्हें हासिल करने के लिए निरंतर लम्बे अरसे से गाँव- घर और अपनों से दूर यहाँ शहर में संघर्षरत हूँ! इस दरमियान मैंने...
उन तनहा ढलती शामो को, तड़प कर गुजरे, उन यादो को,जब ढूंढता था मै, हर चेहरे में तुम्हे,बस दिखती थी तुम ही तुम मुझे,वो तुम्हारे सादगी के सदके,छलकते आँखों के पैमाने,.और वो झूठी मुस्कान,आज तुम यूं ही छोड़ उन्हें, क्यों मेरी दुनिया से जाते हो?रुक जाओ!....न जाओ!....व...
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 पोस्ट लेवल : मेरे एड
             प्यारे बंधुओ!........धरती पर शायद ही कोई ऐसा इन्सान होगा,......जिसे दुःख न हो!.....जिसकी जिन्दगी में परेशानिया न हो!......तकलीफें न हो!......लेकिन इंसान को धरती का सबसे बुद्धिजीवी प्राणी यूं ही नहीं कहा गया है!......इ...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण
जैसा की जीवन में कंही- कभी, कुछ घटनाएं घट जाती है.अपने ऊपर बादल बनकर,कुछ विपदाएं घिर आती है.पथ जीवन की अकस्मात ही,कठिन चढ़ाई बन जाती है.जब हर अगले कल की चिंता,हमको दिन रात सताती है.असफलता पे असफलता ही,जब हमको मिलती जाती है.अपनी ही तकदीर हमारा, जब खिल्ली ख...
 पोस्ट लेवल : अनुभव
आज फिर कुछ ऐसा हुआ, जो सदियों से कुदरत का दस्तूर रहा है,बेटा खिल कर फूल बन गया और बाप मुरझा कर घूर रहा है!!जो कल खेल रहा था बचपन की गलियों में, आज वो बन चूका बड़ा है,और जो डूबा था जिम्मेदारी की जवानी में, वो बुढ़ापा बनकर खड़ा है!!आज खड़े है दोनों आमने- सामने, ये भू...
 पोस्ट लेवल : यथार्थ
कभी मेरी तन्हाई को जिसने है तोडा,कभी मेरे मन को है जिसने टटोला!कभी शाम बनकर जो ख्वाबों में आये,कभी चाँद बनकर है जिसने लुभाया!जिन्दगी की हकीकत या चाहे मेरा वहम हो,तुम ही तो मेरा प्रथम प्रेम हो!!!!!!!!!!!!!!ये गुमनाम राते, ये तनहाइयाँ,वो पिछली बातें, वो रूसवाइयां!कभी...
 पोस्ट लेवल : kalpana
        जब प्रकृति का हृदयस्पर्शी कोलाहल, भयानक सन्नाटे का रूप ले ले.......जब संसार का विस्तृत प्रकाश अपने विश्रामगृह मे चला जाए, जब गहन अंधकार की असीमित चादर से पूरा दृश्यमान संसार ढक जाए,........उस भयावह प्राकृतिक दृश्य को ''रात'' कहते है!.......
 पोस्ट लेवल : sansmaran
प्यारे दोस्तों!......कई बार जिन्दगी में हम कुछ ऐसा भी कर जाते है, जिससे हमें खुद पर नाज होने लगता है. जिन्दगी का वह लम्हा हमारे लिए यादगार बन जाता है.......ऐसा ही एक यादगार लम्हा मेरी जिन्दगी का आपके साथ बाँट रहा हूँ.......बात सन २००६ की है, जब मै ब्लूमिंग चिल्ड्रे...
 पोस्ट लेवल : संस्मरण
                                 सिक्के की आत्मकथा     ''......उफ़!.....जाने कब इस कब्र से आजादी मिलेगी......जाने कब मुझे बाहर की दुनिया देखना नसीब होगा!......जाने क...
 पोस्ट लेवल : सिक्के की आत्मकथा