ब्लॉगसेतु

मेथी का विवाह।एक निमंत्रण देख कर मन हुआ आवाककरेले ने ब्याह रचाया कोमल मेथी के साथ ,सजे-धजे बाराती लौकी ,भिंडी,आलू-प्याज,बेंगन जी इठला रहे थे, हुआ टमाटर शर्म से लाल,टेढ़ी-मेढ़ी अदरक ने पहना नया सूटगाजर मूली ढूंढ़ रहे थे अपने अपने बूट,नारियल ने जोटी से गूंथी चोटीकद्द...
जीवन पल-पल एक परीक्षामहाविलय की अग्रिम प्रतिक्षा।अतृप्त सा मन कस्तुरी मृग सा,भटकता खोजता अलब्ध सा,तिमिराछन्न परिवेश में मूढ मना सा,स्वर्णिम विहान की किरण ढूंढता,छोड घटित अघटित अपेक्षा ।जीवन पल-पल एक परीक्षा...महासागर के महा द्वंद्व सा ,जलता रहता बङवानल सा,महत्वाकां...
जब पेड़ों पर कोयल कालीकुहुक-कुहुक कर गाती थी,डाली-डाली डोल पपीहापी कहां  की राग सुनाता था,घनघोर  घटा घिर आती थीऔर मोर नाचने आते थे ,जब गीता श्यामा की शादी मेंसारा गांव नाचता गाता था ,कहीं नन्हे के जन्मोत्सव परढोल बधाई  बजती थी  ,खुशियां  सा...
एक और महाभारतगर्दिश ए दौर किसका थाकुछ समझ आया कुछ नहीं आया,वक्त थमा था उसी जगहहम ही गुज़रते रहे दरमियान,गजब खेल था समझ से बाहरकौन किस को बना रहा था,कौन किसको बिगाड़ रहा था,चारा तो बेचारा आम जन था,जनता हर पल ठगी सी खड़ी थीमहाभारत में जैसे द्युत-सभा बैठी थी,भीष्म ,धृ...
अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजे ।प्रभु मुझ में ज्वाला भर दीजे,बस  ऐसी  शक्ति  प्रभु  दीजे,अगले जनम मोहे बिटिया ही कीजे।आंख उठे जो लिए बेशर्मीउन आंखों से ज्योति छीन लूं ,बन अम्बे ,दानव मन काशोणित नाश करू कंसों का,अबला, निर्बल, निःसहाय नारी का ,संबल...
दर्पण दर्शनआकांक्षाओं के शोणितबीजों का नाशसंतोष रूपी भवानी केहाथों सम्भव हैवही तृप्त जीवन का सार है।"आकांक्षाओं का अंत "।ध्यान में लीन होमन में एकाग्रता होमौन का सुस्वादनपियूष बूंद समअजर अविनाशी।शून्य सा, "मौन"।मन की गति हैक्या सुख क्या दुखआत्मा में लीन होभव बंधनो...
कोरे मन के कागज परचलो एक गीत लिखते हैं,डूबाकर तूलिका भावों मेंचलो एक गीत लिखते हैं ।मन की शुष्क धरा परस्नेह नीर सिंचन कर दें,भुला  करके सभी शिकवेचलो एक गीत लिखते हैं।शब्द तुम देना चुन-चुन करमैं सुंदर अर्थों से सजा दूंगी,सरगम की किसी धुन परचलो एक गीत लिखते हैं।...
नौनिहाल कहाँ खो रहे हैंकहाँ गया वो भोला बचपनकभी किलकारियां गूंजा करती थीऔर अब चुपचाप सा बचपनपहले मासूम हुवा करता थाआज प्रतिस्पर्धा में डूबा बचपनकहीं बङों की भीड़ में खोताबड़ी-बड़ी सीख में उलझा बचपनबिना खेले ही बीत रहाआज के बच्चों का बचपन।       ...
अब सिर्फ देखिये, बस चुप हो देखिएपांव की ठोकर में,ज़मी है गोल कितनी देखिए।क्या सच क्या झूठ है, क्या हक क्या लूट है,मौन हो सब देखिए, राज यूं ना खोलिए,क्या जा रहा आपका, बेगानी पीर क्यों झेलिए,कोई पूछ ले अगर, तो भी कुछ ना बोलिए ।अब सिर्फ देखिए, बस चुप हो देखिए ।गैरत अप...
नशेमन इख़लासना मंजिल ना आशियाना पायावो  यायावर सा  भटक गयातिनका-तिनका जोडा कितनानशेमन इख़लास का उजड़ गयावह सुबह का भटका कारवाँ सेअब तलक सभी से बिछड़ गयासीया एहतियात जो कोर-कोरक्यूं कच्चे धागे सा उधड़ गया।।         कुसुम कोठारी।