ब्लॉगसेतु

 यह 2000 के अंतिम महीनों की बात होगी जब पटना स्टेशन के निकट सीटीओ के मीडिया सेन्टर में पहली बार राजस्थान पत्रिका के पटना से संवाददाता और मित्र प्रियरंजन भारती ने मनोचिकित्सक डॉ.विनय कुमार से यह कहकर परिचय कराया था कि ये भी अच्छी गजलें लिखते हैं। उस समय मैं पटन...
 पोस्ट लेवल : मनोवेद विनय कुमार
(कात्यायनी के लिए जो कहती हैं कि आलोकधन्वा ने मार्क्‍सवाद ठीक से नहीं पढ़ा)मैंने मार्क्‍स को नहीं पढ़ानहीं जानता कि मार्क्‍सवाद क्या हैमगर कविताएँ लिखता हूँग़लत करता हूँ क्याकहाँ जाकर दिखाऊँअपनी कविताएँक्रेमलिन कहाँ हैकहाँ है बीजिंगउसका रास्ता नागपुर होकर जाता है क...
नया साल (राजूरंजन प्रसाद की कविताओं में पहाड़ के बाद यह बहुत  पसंद है मुझे)कहते कि नया साल आया पहले से थोड़ा ज़्यादा मुस्कायाखिला चेहरा गाल कुछ लाल हुआमहसूस किया पहले से ज्यादा बढ़ा ताप उसका हंसने के क्रम मेंलगा खिंचा-खिंचाचेहरा अपना सुकुमारतन गईं भवें, ब...
मैंहिन्‍दू हूंइसलिए वे मुसलमान और ईसाई हैंजैसे मैं चर्मकार हूंइसलिए वेबिरहमन या दुसाध हैंआज हमारा होनादेश-दिशा के अलगावों का सूचक नहींहम इतने एक से हैंकि आपसी घृणा हीहमारी पहचान बना पाती हैमोटा-मोटी हम जनता या प्रजा हैंहम सिपाही पुजारी मौलवी ग्रंथी भंगीचर्मकार...
 पोस्ट लेवल : हिंदू
कितनी लंबी है महापुरूषों की कतारपर हायइतने महापुरूष मिलकरपैदा नहीं कर सकेएक महास्त्री...! फेसबुक/15-2-2015 महास्‍त्री पर चर्चा Anupama GargMukul ji wonderful!!!महास्त्री - - -कितनी लंबी है महापुरूषों की कतारपर हायइतने महापुरूष मिलकरपैदा नहीं कर सकेएक महास्त्री...आ...
वेद इतिहास हैं या आख्‍यान हैं इस पर शास्‍त्रों में अच्‍छी बहस है। 14वीं सदी के सायणाचार्य के पूर्व के दर्जनों वेदाचार्य जिनमें ईसापूर्व 7वीं सदी के प्रथम आचार्य यास्‍क (जिनका ग्रंथ उपलब्‍ध है इस अर्थ में प्रथम), आचार्य स्‍कंद स्‍वामी, भटट भास्‍कर, उद्गीथ, दुगाचार्य...
 पोस्ट लेवल : यास्‍क सायण वेद
एक थी मिनी एक था काबुलीवाला । अरे, वो टैगोर की मिनी नहीं यह इक्‍कीसवीं सदी के एक पगले अफसानानिगार की मिनी थी। वह अफसानानिगार यूं ही कहानियों के प्‍लाट की खोज में भटकता फिरता था इधर उधर तो एक सुबह टकरा गया था उससे। अपनी रौ में वह चला जा रहा था यूं ही कि अचानक कि...
 पोस्ट लेवल : कथा
चांदनी की रहस्यमयी परतों को दरकाती सुबह हो रही है जगो और पाँवों में पहन लो धूल मिट्टी ओस और दौड़ो देखो-स्मृतियों में कोई हरसिंगार अब भी हरा होगा पूरी रात जग कर थक गया होगा संभालो उसेउसकी गंध को संभालो जगो कि कुत्ते सो रहे हैं अभी और पक्षी खोल रहे हैं दिशाओं के द्वा...
 पोस्ट लेवल : सुबह