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मोदी के आने से अच्छे दिन आने वाले है नहीं बल्कि अच्छे दिन आ चुके है। चोरों के खिलाफ देश के चौकीदार बने मोदी ने इमरान की सत्ता को हिलाकर रख दिया है। वायु में अभिनंदन का झंडा गाड़कर अब भारत-पाक को शाह रूपी थल बम
ये कैसी आजादी है?मिलकर भी अधूरी सी...कुछ कमी से भरीनन्ही गुलामी में लिपटी आजादीभ्रष्टाचार के रंग चढ़ीमंहगाई से महंगी औरटैक्स से वजनदार आजादीकुछ छिनी भ्रष्ट राजनीति नेकुछ विदेशी घुसपैठियों नेशेष ले गया काश्मीर और पाकिस्तानअब बची है शेष देश को अखंडित रखने की आसविद्रो...
असम में एनआरसी (नेशनल रजिस्टर आॅफ सिटीजंस) का मुद्दा अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। कांग्रेस चुनावी मौसम का फायदा उठाकर इस मुद्दे को भुना रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि असम में बांग्लादेशीघुसपैठियों की संख्या हजारों में नहीं बल्कि लाखों में है। आँकड़ों...
फिल्म 'संजू' : एक आतंकी का महिमामंडन- डॉ. गायत्री शर्मा'संजू' फिल्म का जिस तरह से प्रचार-प्रसार किया गया था,उसे देखते हुए मेरे मन में भी इस फिल्म को देखने की उत्सुकता जागी लेकिन जब मैंने यह फिल्म देखी, तब मेरे सारे अरमान धराशायी हो गए। इस फिल्म की कहानी संजय दत्त न...
आज हम हैवानियत के किस स्तर पर खड़े है, वह कल्पनातीत है. इंदौर शहर के मुख्य बाजार राजबाड़ा में 4 माह की दुधमुँही मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म रौंगटे खड़े कर देने वाली घटना है. आए दिन इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति और पुलिस तथा कानून व्यवस्था का लचर होना मेरे मन में कई...
जम्मू- कश्मीर के ￰कठुआ में 8 वर्षीय आसिफा के साथ हवस के भूखे जानवरों ने जो दरिंदगी की, उसे बयां करने के लिए मेरे पास उच्चस्तरीय गंदे, अश्लील और घटिया शब्द नहीं है. माफ़ कीजिएगा पर इन बलात्कारियों को मैं तो जानवर कहकर ही सम्बोधित करुँगी. सच कहा जाए तो देवस्थान जैसी प...
रतलाम में हल्ला गुल्ला साहित्य मंच हे मालवी बोली व जल संरक्षण विषय पर संगोष्ठी दि सैफायर स्कूल परिसर में राखी. अणी आयोजन में गीनिया-चुनिया पण हउ-हउ कवि, विचारक और मालवीप्रेमी लोक्का भेरा विया. कार्यक्रम संचालन रो काम संजय जोशी जी ए मने दिदो थो. अणी वस्ते मैं म्हारे...
I;kjs nknw]                आप कैसे है? आज से ठीक एक साल पहले आप मुझे छोड़कर बहुत दूर चले गए और अपने पीछे जिंदगी की अमर खुशियों की सौगात छोड़ गए. 09 जुलाई 2016 का वो दिन अच्छे से याद है मुझे, ज...
लो आ गयी शरारतों वाली होली पिचकारियों के छिटो संग दोस्तों संग मौज-मस्ती और हँसी-ठिठौलीलो आ गयी ...किसी ने गालों पर मल दिया गुलाल मित्रता के चटक रंग से, मस्ती की भंग से तन-मन हुआ, हरा-पीला, गुलाबी-लाल निकली आज तंग गलियों में वही पुरानी टोली&...
 पोस्ट लेवल : poem gayatri गुलाल रंग होली holi
-          गायत्री शर्मा  अक्सर आयोजन लोगों को मिलाते हैं लेकिन कई बार अच्छे लोगों के मिल जाने से ही बेहतर आयोजन हो जाया करते हैं। जब अच्छे लोग मिलते हैं तो जाहिर तौर पर बातें भी अच्छी ही होती है। हमारे इस मंच की खा...