ब्लॉगसेतु

***राजीव तनेजा***   “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “ओ….कुण्डी ना खड़का …सोणया सिद्धा अन्दर आ"… “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “अरे!…कौन है भाई?….ज़रा रुको तो सही…अभी खोलता हूँ…..पहले ज़रा नाड़ा तो ठीक से बाँध लूँ”… “ठक्क……ठक्क- ठक्क”…. “तनेजा जी!…दरवाज़ा खोलिए……खोलिए ना...
आदरणीय एवं माननीय  रूपचंद शास्त्री जी ,नमस्कार सबसे पहले तो मैं तहेदिल से आपका शुक्रगुजार हूँ और जीवनपर्यंत रहूँगा कि आपने मुझ जैसे अदना से ब्लॉगर द्वारा… आपके ब्लॉग पर की गई कुछ निरर्थक (आपके हिसाब से) एवं तीखी टिप्प...
***राजीव तनेजा***   मैँ हूँ बाल ब्रह्मचारी... कन्या हो या हो कुंवारी ब्याहता हो,,, या हो परित्यक्ता नारी नहीं परहेज़ मुझे किसी से सभी मुझको प्रिय सभी मुझको प्यारी हलकी हो  या हो भारी चौरसी हो  या हो ऑरी मि...
**राजीव तनेजा*** “ओह्हो…शर्मा आप?..आज ये सूरज अचानक पश्चिम से कैसे निकल पड़ा?…कहिए सब खैरियत तो है?”…“जी…बिलकुल”….“तो फिर आज अचानक…यहाँ कैसे?”…“कैसे क्या?…ये आपके सामने वाले पेट्रोल पम्प से स्कूटर में पेट्रोल भरवा रहा था कि अचानक ख्याल आया कि यहीं सामने वाली बिल्डि...
अपनी ब्लोगिंग के शुरूआती दिनों में एक ब्लॉग गीत लिखने की कोशिश की थी…मामूली फेर-बदल के बाद उसे आपके सामने पुन: पेश कर रहा हूँ… आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर ***राजीव तनेजा*** आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर...  आओ खेलें हम ब्लॉगर-व्लागर... सम-समायिक पे...
आज कल ब्लॉगजगत में जो हो रहा है या जो चल रहा है…उसे देख-सुन और पढकर कर अनायास ही ये पंक्तियाँ दिल से निकल पड़ी… आप सबके साथ बांटना चाहूँगा…     कोई सामने से वार करता है कोई छुप के प्रहार करता है तोड़ के भरोसा मेरा हर कोई खंजर दिल के आर-पार करता...
 पोस्ट लेवल : राजीव तनेजा तुकबंदी
  लीजिए साहिबान …अब ना कोई झमेला ..ना कोई टंटा…चूंकि आ पहुंची है हम तीन तिलंगों की फ़ौज ले के अपनी नई-नवेली..अनूठी ब्लॉग चर्चा   अब ना कोई लफडा…ना कोई खर्चा…पढ़ने को मिलेगी बस… उम्दा …अनूठी…अलबेली ब्लॉग चर्चा   अब ललित शर्मा जी की दुन...
हँसते रहो के फ्रंट डैस्क को अभी-अभी विश्वसनीय सूत्रों के जरिए अपुष्ट खबर मिली है कि देश-विदेश के जाने-माने हिंदी के ब्लॉगर कुछ दिन पहले मुंबई में इकठ्ठा हुए थे| क्या ये एक सोची-समझी साजिश के तहत एक ही मंच पर विराजमान थे?… या फिर इसे महज़ एक संयोग समझा जाए?...
हे प्रभु... ..  मुझे वर दे..मुझे वर दे...मुझे वर दे विनति तुझसे प्रभु है बस इतनी नहीं पसन्द मुझे दिखावा तू मुझे शील संयत संतुलित व्यवहार दे   नहीं चाहिए ‘जैम’ ‘बर्गर’ औ ‘पिज़्ज़ा’ मुझे तू मुझे पानीपत का ‘पचरंगा’ अचार दे नहीं पसंद सिक्कों की...