ब्लॉगसेतु

संध्या शर्मा का नमस्कार.........तिल और गुड की मिठास आप सभी के जीवन को मिठास और आनंद से भर दे और मकर संक्रांति के सूर्योदय के साथ एक नए सवेरे का शुभारम्भ हो इसी कामना के साथ आप सभी को ब्लॉग वार्ता परिवार की ओर से  मकरसंक्रांति, लोहड़ी एवं पोंगल की  हार...
संध्या शर्मा का नमस्कार.... क्या "स्त्री" होना अपराध है ? दिन भर ताना सुन कर भी, कितनी खुश होती है वो... बिना 'खाने' के दिन गुजर जाता है उसका... बिना 'शिकायत' के जिंदगी गुजार देती है 'वो'... फिर भी उस पर ये 'इन्सान' इतना 'शैतान' क्यों है ? हैवान क्यों है ? क्या...
संध्या शर्मा का नमस्कार...."तिल और गुड घ्या गोड-गोड बोला"   त्यौहार की उमंग और आकाश में लहराती, हिचकोले खाती रंग - बिरंगी पतंग आप सभी के जीवन को नए उत्साह और आनंद से भर दे और मकर संक्रांति के सूर्योदय के साथ एक नए सवेरे का शुभारम्भ हो इसी कामना के साथ आप...
संध्या शर्मा का नमस्कार....... किसी देहरी आज अँधेरा न रहने दें आओ बस्ती झोपड़ियों में दीप जलाएं। अपनों के तो लिये सजाये कितने सपने, सोचा नहीं कभी उनका जिनके न अपने, भूखे पेट गुज़र जाती हर रातें जिनकी, चल कर के उनमें भी एक आस जगाएं। बना रहे हैं जो दीपक औरों की खात...
संध्या शर्मा का नमस्कार.... 'पूर्णस्य पूर्णमादाय ' कहने से तात्पर्य यह है की यदि तुम स्वयं इस सत्य की अनुभूति कर सको कि वही ' पूर्ण ' तुम्हारे साथ साथ इस विश्व ब्रह्माण्ड के कण कण में भी प्रविष्ट है तो फिर उस ' पूर्ण ' के बाहर शेष बचा क्या ? इसी को कहा गया - ' प...
संध्या शर्मा का नमस्कार... जब-जब ओस की बूँदें बेचैन होंगी घास के मुरझाये पत्तों पर ढरकने को धीरे से धरती भी छलक कर उड़ेल देगी भींगा-भींगा सा अपना आशीर्वाद और बूँदों के रोम-रोम से घास का पोर-पोर रच जाएगा हरियाली की कविता से तब-तब मैं पढ़ ली जाऊँगी उन तृप्ति की तारों...
संध्या शर्मा का नमस्कार... रात की झील पर.....तैरती उदास कि‍श्‍ती हर सुबह आ लगती है कि‍नारे मगर न जाने क्‍यों ये जि‍या बहुत होता है उदास ..... ऐ मेरे मौला कहां ले जाउं अब अपने इश्‍क के सफ़ीने को तेरी ही उठाई आंधि‍यां हैं है तेरे दि‍ए पतवार.... कहती हूं तुझसे अब सु...
संध्या शर्मा का नमस्कार....बड़ा बेदम निकलता है... - हँसी होंठों पे रख, हर रोज़ कोई ग़म निगलता है... मगर जब लफ्ज़ निकले तो ज़रा सा नम निकलता है... वो मुफ़लिस खोलता है रोटियों की चाह मे डिब्बे...लीजिये प्रस्तुत है, आज की वा...
संध्या शर्मा का नमस्कार...लम्हा - लम्हा जिंदगी कुछ यूँ सिमट गई , जो मज़ा था इंतजार में अब सज़ा बन गई | दर्द और ख़ुशी के बीच दूरियां जो बड गई , दिलो के दरमियाँ मोहोब्बत कम हो गई | चिठ्ठी - तार बीते जमाने की बात हो गई , आधुनिक दौड़ में वो बंद किताब हो गई | कुछ सवा...
संध्या शर्मा का नमस्कार......कभी जो हम नहीं होंगे ....!!! - .... कहो किस को बताओगे ...? वो अपनी उलझने सारी ... वो बेचैनी में डूबे पल ...? वो आँखों में छुपे आँसू ...? किसे फिर तुम दिखाओगे ...ब्लॉग जगत में कल का पूरा...