ब्लॉगसेतु

 ईश्वर ने इंसान बनाया और उसे ज़ुबान दी, ज़ुबान के साथ ऐसा नायाब स्वरयंत्र दिया दिया जिसका इस्तेमाल वह बोलने के लिए करता है। बोलने के लिए शब्द चाहिए। अपने ख़्यालों के इज़हार के लिए भी शब्द चाहिए। अगर शब्द न होते तो हम अपने ख्यालों को कैसे व्यक्त करते, कैसे कह पाते,...
 पोस्ट लेवल : जगदीश बाली
 किसानों को कृषि उत्पाद बेचने की खुली आजादी देंगे कृषि सुधार कानून डॉ मामराज पुंडीरराजनितिक शास्त्र प्रवक्ता 9418890000mamraj.pundir@rediffmail.com आज विश्व को इन्सान से इन्सान को टच करने से फेलने वाली महामारी ने जकड़ रखा है ।इसलिए भारतीय संस्कृत...
 वो यात्रा जो सफलता से अधिक संघर्ष बयाँ करती है उन्हें नरेन्द्र मोदी कहते है  डॉ मामराज पुंडीरराजनितिक शास्त्र प्रवक्ता 9418890000mamraj.pundir@rediffmail.com आज भारत विश्व में अपनी नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। वो भारत जो कल तक गाँधी का...
 महिलाओं और छात्राओं की शिक्षा की दिशा में नई शिक्षा नीति मील का पत्थर साबित हो सकती है डॉ मामराज पुंडीरराजनितिक शास्त्र प्रवक्ता 9418890000mamraj.pundir@rediffmail.com हिंदुस्तान को विश्व शक्ति के रूप में उभारने  और भारतीय संस्कृति को विश्...
अनेक पत्र-पत्रिकाओं तथा पुस्तकों का सम्पादन कर चुके उच्च कोटि के साहित्यकार डा.प्रेमलाल गौतम के सम्पादन में बहुमुखी प्रतिभा के धनी तथा बहुआयामी व्यक्तित्व विभूषित ज्योतिर्विद् एवं समाजसेवी श्रीयुत स्वाधीन चन्द्र गौड के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को लेकर तैयार किये गये...
मेरे विद्यार्थी जीवन की बात है। एक बार बरसात की छुट्टियां खत्म हुईं। स्कूल सोमवार से शुरू होना था। रोहड़ू क्षेत्र का सबसे बहुत पुराना स्कूल है..पढाल। फिर पता चला कि शनिवार से ही शुरू हो जाएगा। मुझे लगा कि गृह कार्य जिन कॉपियों में किया है, उन्हें सोमवार को स्कूल ले...
विद्यार्थी के सर्वागीण विकास हेतु शिक्षा के साथ खेलें भी परमावश्यक हैं I हर खेल का अपना महत्त्व है व विद्यार्थी अपनी रूचि व कौशल के हिसाब से खेल का चयन करता है I वर्तमान स्कूली शिक्षा में लगभग सारे खेल विद्यार्थी के शारीरिक विकास के साथ जुड़े हैं – यहाँ बात करेंगे म...
एक आम अवधारणा है कि पेंशन बुढ़ापे का सहारा होती है I वर्तमान के साथ साथ , भविष्य की चिंता करना भी मानव का स्वभाव है I आज देश के लाखों कर्मचारी अपने व परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं I स्वभाविक भी है कि 30 -35 वर्षों तक सरकारी क्षेत्र में अपनी सेवा देने के पश्चात...
ईश्वर ने इस संसार में रहने के लिए केवल मनुष्य को ही पैदा नहीं किया। इस पृथ्वी पर केवल मनुष्य का एकाधिकार नहीं है। सृष्टि के उस सर्जक ने इस प्रकृति को विभिन्न तरह के प्राणियों से अलंकृत किया है। उसने इस जहां को छोटे से छोटे और बड़े से बड़े जीवों से भरा है। इन सभी जीवो...