ब्लॉगसेतु

रात के अंधेरे में नहीं जन्मी उसका अस्तित्व भ&#236...
आजकल वर्चुअल लाइफ(virtual life) का भूत सब के सर पे चढ़ के बोल रहा है ,इसका मुख्य कारण फेसबुक(facebook) ,व्हाट्सएप (whatsapp)जैसे सोशल नेटवर्किंग साइट्स से बढ़ावा मिल रहा है .लोग अब अपने दोस्तों से मिलने जुलने की जगह 5 या 6 महीने के बाद फेसबुक से हाई कहना पसंद कर...
वक़्त एक ऐसी पहेली है जिसे कोई पकड़ ना पाया ना ही कोई भांप पाया ....कभी कभी लगता है वक़्त सामने होता तो क्या कहती कभी कभी सोचती हूँ वक़्त उस समय मिल जाता तो आज ये न करती, आज वो ना होता कोई नहीं जानता वक़्त किसी को कब कहाँ से कहाँ ले जा सकता है ,किस वक़्त किस्से आपकी मुल...
मज़हब –एक ऐसा शब्द जो किसी आम इंसान की ज़िन्दगी बदलने के लिए काफी है ,क्यूंकि ये हमारा मज़हब है जो किसी को मंदिर तो किसी को मस्जिद भेजता है, हमारा मज़हब हमें सिखाता  है की हम बचपन से गीता पढेंगे ,कुरान पढेंगे या  फिर बाइबिल ?? मज़हब के नाम पे लोग दंगे फसाद कर...
PARI: क्या हम आज़ाद है???: अभी –अभी 15 अगस्त बीता है,हमने 67 साल पूरे कर लिए आजादी के देखके बहुत ख़ुशी होती है. सबके मुंह से सुनके बहुत अच्छा लगता है की अब हम आज़ाद...
PARI: क्या हम आज़ाद है???: अभी –अभी 15 अगस्त बीता है,हमने 67 साल पूरे कर लिए आजादी के देखके बहुत ख़ुशी होती है. सबके मुंह से सुनके बहुत अच्छा लगता है की अब हम आज़ाद...
अभी –अभी 15 अगस्त बीता है,हमने 67 साल पूरे कर लिए आजादी के देखके बहुत ख़ुशी होती है. सबके मुंह से सुनके बहुत अच्छा लगता है की अब हम आज़ाद हैं, अंग्रजों की गुलामी से हमें आजादी मिल गयी है , पर सोचने वाली बात है क्या हम सच में पूरी तरह आज़ाद हैं?? इस प्रश्न पे मुझ...
PARI: ज़मीर बिक चुका है: ज़मीर बिक चुका है हमारा और अमीर बनने की नाकामयाब सी कोशिश कर रहे हैं खुद पर यकीं  नहीं और   यकीन कर रहे हैं .. हम बिक चुके है दुनिया के बा...
ज़मीर बिक चुका है हमारा और अमीर बनने की नाकामयाब सी कोशिश कर रहे हैं खुद पर यकीं  नहीं और   यकीन कर रहे हैं .. हम बिक चुके है दुनिया के बाज़ार में  इक सामान  की  तरह फिर भी इन्सान बनने  की नाकामयाब सी कोशिश कर रहे हैं … -...