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चार अंगुल मस्जिद का वो हिस्सा जिसे सिकंदर लोधी ने तोड़ दिया था जब लोधी वंश के दिल्ली के  मुसलमान बादशाह सिकंदर लोधी ने जौनपुर पे हमला किया तो सबसे पहले शर्क़ी बादशाहों के महलों को तोडा और उसके बाद उसने जौनपुर की शर्क़ी समय की बनी मस्जिदों पे हमला क...
 पोस्ट लेवल : history of jaunpur
जौनपुर में बारिश के आते ही जहां एक तरफ चिड़ियों की चहचहाट और हरियाली का मज़ा आने लगता है तो वहीँ दूसरी तरफ गोमती का स्तर ऐसे बढ़ता है जैसे बिना रोक टोक ऊपर वाले के भरोसे छोड़ रखा हो और शहर का तो यह हाल है की नाले और सड़क के पानी का अंतर ही नहीं रह जाता | आप भी देखि...
 पोस्ट लेवल : jaunpur जौनपुर बारिश
जौनपुर के इतिहास के बारे में कुछ बहुत बड़ी बड़ी गलतफहमियां है जिसमे से एक यह भी है |जौनपुर आज़मगढ़ हाइवे पर सिपाह चौराहे से जब आप गुज़रते हैं तो आपकी नज़रें एक आलिशान मक़बरे की तरफ ज़रूर जाएंगी | इस मक़बरे के इतिहास को हकीकत में बहुत कम लोग जानते है और अक्सर इसे लोग दिल्ली...
 पोस्ट लेवल : editorial history of jaunpur
शर्क़ी दौर में अपने वतन बुखारा को छोड़ के मक़दूम बन्दगी शेख मारूक जौनपुर आये | आपके पिता शेख आरिफ शेर सवार शेख जलाल बुखारी की संतान में से थे | संत मक़दूम बन्दगी शेख मारूक ने जौनपुर में ही सांसारिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और घोर तपस्या करते करते मशहू...
जौनपुर के इतिहास से छेड़ छाड़ सोशल मीडिया में बिना इतिहास की जानकारी के धन कमाने के लिए वीडियो बनाने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा | ऐसे में लोगों को सत्य क्या है यह बताने की कोशिश कर  रहा हूँ और हर सप्ताह एक सत्य सामने लाया जायगा | इस बार बहुचर्...
जौनपुर शहर से १६ किलोमीटर दूर इलाहाबाद  रोड  पे एक इलाक़ा पड़ता है फतेहगंज जहां सई नदी के तट पे बेहद सुन्दर बर्गुजर पुल  बना हुआ है जिसका अब इस्तेमाल तो नहीं होता लेकिन इसकी सुंदरता आज भी बरक़रार है | इस पुल को मुगलों के दौर में ख्वाजा दोस्त न...
 पोस्ट लेवल : बर्गुजर पुल history of jaunpur
विश्व के हर शहर हर देश का अपना एक इतिहास होता है जिसमे सत्ता हासिल करने के लिए आपसी युद्ध और समझोतों की बहुत बड़ी भूमिका हुआ करती है | बहुत बार सभ्यताएं बदल जाती हैं आबाद शहर खंडहरों में और खंडहर आबादी में बदल जाय करते हैं | शासक कोई भी हो उसका भी अपना एक धर्म...
 पोस्ट लेवल : editorial
नवाबों के वक़्त का मक़बरा मीर रुस्तम अली खां अभी अच्छी हालत में है | मीर रुस्तम अली खां अफगान जाती के थे और उनका निवास स्थान भदोही था | आप नवाब सआदत  अली खान के समय में जौनपुर बनारस गाज़ीपुर की ज़मींदारी के नाज़िम थे और बाद में इसमें बहराइच ,राठ ,आजमगढ़ इत...
मुग़ल समय के जौनपुर के प्रशासक जमाल खान लोहानी का मक़बरा | मुग़ल बादशाह शाहजहां के दौर में जौनपुर के प्रशासक रहे जमाल खान लोहानी अफगान से सम्बन्ध रखते हैं और काम उम्र में ही मुईन खानखाना के साथ भारत आये और अपना ठिकाना अटाला मस्जिद के पास बनवाया | बाद में जब...
जौनपुर के हमाम दरवाज़ा स्थित एक मुगल समय की मस्जिद है जिसे पथ्थर वाली मस्जिद के नाम से जाना जाता है | यह मस्जिद अक्सर लोगों की नज़र में सड़क से नहीं आती जबकि काफी बड़ी है यह मस्जिद | इस मस्जिद को नवाब मोहसिन खान ज़ुलक़द्र ने मुग़ल बादशाह अकबर की दी हुयी जगह पे संन 1567 मे...