ब्लॉगसेतु

 सायरा बहुत ख़ुश है। आज उसके स्कूल में वार्षिकोत्सव है। वह नाटक में हिस्सा ले रही है। नाटक में वह भारत माता बनेगी। क़ादरी सर हफ्तों से प्रैक्टिस करा रहे हैं। वैसे तो वह उर्दू के टीचर हैं पर नाटक में उनकी ख़ास दिलचस्पी है। इसलिए माथुर मैम ने उन्हें ही नाटक की ज...
 पोस्ट लेवल : Deshbhakti Kahani Bal Kahani
 उस छोटे-से पहाड़ी गाँव में जीवन अभी पूरी तरह जागा नहीं था। जाड़े की सुबह थी। हल्का-हल्का उजास फूट रहा था। लोग रज़ाइयों में दुबके पड़े थे। अचानक सेना की गाड़ियों की घरघराहट और लाउडस्पीकरों की आवाज़ ने गाँव की शिथिलता तोड़ दी। लोग ठिठुरन भूलकर दरवाज़े पर भागे आए। गाड़ि...
 पोस्ट लेवल : Deshbhakti Kahani Bal Kahani
 पात्र-परिचय:                                     मैना, तोता, गिलहरी, बंदर, कौआ, चींट...
 पोस्ट लेवल : Enanki Paryawaran Bal Ekanki
करामत मियाँ की पाँचवीं औलाद भी लड़की पैदा हुई तो उनका दिल बैठ गया।दाई बाहर निकलकर आई और बोली, ‘‘बधाई हो भैया, घर में बरकत आई है।’’करामत मियाँ बुत बने बैठे रहे। ‘‘अबकी हज़ार रुपए और धोती का जोड़ा लिए बिना न मानूँगी। पिछली बार की तरह नहीं कि डेढ़ सौ पर टरका दिया था।...
 पोस्ट लेवल : muslim parivesh ki bal kahani Bal Kahani
दादी को हज पर जाने में अभी दो महीने बाक़ी थे, पर उसकी तैयारियाँ उन्होंने अभी से शुरू कर दी थीं। एक पुरानी अटैची, जिसके कुंडों में ताला लटक जाता था, को धूप दिखाकर, अंदर अख़बार बिछाकर तैयार कर लिया था, उसमें वह रोज़ कुछ न कुछ सामान रखा करती थीं। उनके साथ अब्बू भी हज को...
 पोस्ट लेवल : Deshbhakti Bal Kahani
...और रूनू रो पड़ी।  इतना रोई कि उसके आँसू गिरकर कमरे में फैलने लगे। हर ओर पानी ही पानी हो गया। पहले तो पानी दरवाज़े की दराज़ों से भागा। पर पतली-सी दराज़ से पानी कहाँ तक निकल पाता? जल्दी ही कमरा लबालब हो गया और पानी खिड़कियों से झरने की तरह गिरने लगा। दरवाज़े द...
          (गोंडवाना की महारानी दुर्गावती के उद्यान का दृश्य। महारानी एक सुंदर सरोवर के निकट अन्यमनस्क-सी बैठी हुई हैं। पीछे एक दासी खड़ी है। नेपथ्य से गीत-संगीत और उल्लास की ध्वनियाँ आ रही हैं।) दासी    :    अप...
पीपल का एक पेड़ था। ख़ूब घनेरा। उसकी लंबी और मोटी शाखाएँ दूर तक फैली हुई थीं।पतझर का मौसम आया तो उसके पत्ते पीले होकर झड़ने लगे। पत्तों से भरी घनी डालें तिनकों का जाल होकर रह गईं।सबसे ऊँची डाली पर बचा एक पत्ता टूटकर गिरने से डर रहा था। जब हवा का झोंका आता तो वह थर-थर...
‘‘भैया, मौलवी साहब आ रहे हैं..’’ असद छज्जे से झाँकता हुआ चिल्लाया।हमदान मोबाइल पर गेम खेलने में मगन था। असद की आवाज़ ने रंग में भंग कर दिया, पर उसने अपनी निगाह मोबाइल पर गड़ाए रखी।‘‘भैया...मौलवी साहब आ गए हैं...!!’’ असद ने एक-एक शब्द पर ज़ोर देकर दोबारा कहा।‘‘आ गए...
 पोस्ट लेवल : बाल कहानी कहानी
मियाँ मुनक्का रोज़ की तरह हकीम किशमिश के दवाख़ाने पहुँचे तो वह बेचैनी से टहलक़दमी कर रहे थे। मियाँ मुनक्का को देखते ही लपककर आए और दोनों कंधे थामते हुए बोले, ‘‘आ गए दोस्त! मैं बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।’’मियाँ मुनक्का हैरान रह गए। और दिनों में जब वह चाय...