ब्लॉगसेतु

एक थे संकटा प्रसाद जी। गांव की रामलीला में वह हमेशा रावण का रोल करते थे। लंबा-चौड़ा शरीर, बड़ी-बड़ी आँखें, भरी-भरी मूँछें। जब उन्हें सजा-बनाकर खड़ा किया जाता तो वह सचमुच रावण से कम न लगते।   संकटा प्रसाद जी थोड़े मंदबुद्धि के थे। बातों को थोड़ा देर से समझते थे।...
‘‘एक राक्षस था। ...लाल-लाल आँखें...बड़े-बड़े दाँत...बिखरे हुए बाल। सूरत ऐसी भयानक कि देखते ही आदमी का ख़ून सफेद हो जाए। एक दिन वह राक्षस नगर में घुस आया। चारों तरफ हाहाकार मच गया। लोग डर के मारे चिल्लाते हुए इधर-उधर भागने लगे। राक्षस सीधा राजमहल में जा घुसा और राजकुमा...
जब मैं कहानी पढ़कर रोया था28 फरवरी 1976 की एक भोर। रात का अँधेरा अभी पूरी तरह से छटा न था। लेकिन दूर पूरब में, जहाँ धरती और आकाश मिल रहे थे, उजाले की हल्की-सी रेखा खिंचने लगी थी। अँधेरे के जमे हुए धब्बों जैसे लग रहे पेड़ों में हलचल होने लगी थी और चिड़ियों का समूह सरज...
 पोस्ट लेवल : आत्म कथ्य जीवन वृत्त
कृष्णा कालोनी की दस मंजिला इमारत सूरज की पहली किरण के साथ जाग उठती थी। लोगों को ऑफिस जाने की जल्दी, बच्चों को स्कूल भागने की हड़बड़ी, दूधवाले और अखबार वाले की आवाजें--एक हलचल-सी पैदा कर देतीं जाती। लेकिन दस बजते-बजते कॉलोनी फिर सूनी हो जाती। सब अपने-अपने काम पर चले ज...
 पोस्ट लेवल : बाल कहानी
जमुनिया बाग के मेले में दो ही चीजें खास होती थीं--एक, जुम्मन मुरादाबादी के बर्तनों की दूकान और दूसरी, दूर-दूर से इकट्ठा होनेवाले पहलवानों का दंगल। जुम्मन की दूकान जहाँ सिर्फ अमीरों और शौकीनों का ही ध्यान अपनी तरफ खींच पाती थी, वहीं दंगल देखने छोटे-बड़े, अमीर-गरीब सभ...
 पोस्ट लेवल : कहानी बाल कहानी
...और मियाँ चिलगोज़ा लड़कों से उलझ गए।हुआ यह था कि वह बजरंगी की गुमटी पर पान खाने रुके थे। आदत थी कि पान लगवाते तो कत्था, चूना, ज़र्दा, इलायची, नारियल, क़िवाम--इतनी चीज़ें डलवाते कि बजरंगी को कहना पड़ जाता, ‘हकीम साहब, जो दो रुपए दिए हैं, कहिए तो वह भी डाल दूँ।’ आज भी जब...
वह कौन था ?जियांग बड़ी देर से चट्टान की ओट में खड़ा बारिश रुकने का इंतज़ार कर रहा था। अभी एक घंटा पहले आसमान बिल्कुल साफ था। जियांग को उम्मीद थी कि अँधेरा होते-होते वह घर पहुँच जाएगा। पर बादल ऐसे घिरे कि दो क़दम चलना मुश्किल हो गया। वह बार-बार आसमान की ओर लाचार दृष्टि...
गई भैंस पानी मेंएक दिन डेयरी पर पहुँचकर जब हकीम चिलगोजा को पता चला कि आज से दूध पैंतीस रुपए लीटर मिलेगा, तो बिफर पड़े। बड़बड़ाते हुए अपनी पाँच लीटर की डोलची, जिसमें वह सिर्फ पाव भर दूध लेते थे, उठाई और लौट पड़े। मारे ग़ुस्से के तय कर लिया कि आज से दूध का इस्तेमाल बंद। ब...
मियाँ चिलगोज़ा की मूँछेंहमारी क़स्बे में एक मियाँ चिलगोज़ा रहते हैं। रूप ऐसा कि जो देखे, देखता ही रह जाए। फुंदनोंवाली चौगोशिया टोपी, कमरतोइयों वाली शानदार अचकन और पैरों में मुड़े हुए घेतले जूते। जैसे कोई चलता-फिरता अजायबघर। मियाँ चिलगोज़ा से मशहूर उनकी मूँछें हैं। इतनी...
 पोस्ट लेवल : हास्य बाल कहानी
बब्बन पढ़ने-लिखने के मामले में जितना होशियार था, जीवन-व्यवहार के मामले में उतना ही बुद्धू। गणित की कठिन से कठिन प्रश्नावलियाँ हल करना उसके लिए चुटकियों का काम था, पर बाजार से दो रुपए का नमक लाने में उसे पसीने आ जाते थे। दूकानदार भी उसे बुद्धू जानकर ठग लेते थे।उससे द...
 पोस्ट लेवल : हास्य बाल कहानी