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फत्तन मियाँ दिखने में तो सींक-सलाई थे, लेकिन चीख़ने-शोर मचाने में अच्छे-अच्छों के छक्के छुड़ा देते थे। उन्होंने बड़ी-बड़ी लड़ाइयाँ अपनी इसी ताक़त के बल पर फतह कर रखी थीं। दोस्तों ने भी ख़ूब चढ़ा रखा था। इसी गुमान में वे सीना ताने-ताने फिरते थे। एक दिन इसी ग़लतफ़हमी में वे मु...
 पोस्ट लेवल : हास्य बाल कहानी
उत्तर प्रदेशान्तर्गत बाराबंकी ज़िले के उधैली नामक स्थान पर 17 सितंबर 1977 को जन्म। बचपन से ही पठन-पाठन और लेखन में रुचि। 13 वर्ष की अवस्था में पहली रचना ‘गर्मी’ `बाल कविता' दैनिक ‘स्वतंत्र भारत’ में प्रकाशित। ‘रेल के डिब्बे में’ बाल कविता संग्रह, ‘बरसा ख़ूब झमाझम पान...
 पोस्ट लेवल : जीवन वृत्त