ब्लॉगसेतु

एक ही निगाह में ,वो सब बता गया दर्द का पूछा तो ,मज़हब बता गया अंदाज़ा मुझे भी इंकार का ही था यक़ीन हुआ नाम गलत जब बता गया हाथ मिलाया तो नज़रें जेब पर थीं यार मिलने का यूं सबब बता गया लूटता रहा गरीबों को ताउम्र जो पूछने पर ख़ुद को साहब...
चंद पंक्तियाँ ,बेतरतीब ,बिखरी ,सिमटी हुई , आप खुद देखें
        
                                      चंद अल्फाज़ हैं ये                                &nb...
 चंद बिखरे सिमटे से आखर , कुछ बेतरतीब उनींदी उंघती सी पंक्तियाँ
चंद बिखरे सिमटे आखर , बेतरतीब ,बेलौस से , बात बेबात कहे लिखे गए , उन्हें यूं ही सहेज दिया है ........दो दरखत एक शाख के , एक राजा की कुर्सी बनी दूसरी बुढापे की लाठी 
अब नर्म धूप,मेरे आँगन भी,उतरने लगी है।टिमटिमाते तारों की रौशनी,और चाँद की ठंडक,छत पर,छिटकने लगी है।पुरबिया पवनें,खींच लाई हैं,जो बदली , वो,घुमड़ने लगी है।दर्पर्ण मांज रहा है,ख़ुद को,आलमारी भी,सँवरने लगी है ।फूलों के खिलने में,समय है,कलियों पर ही,तितलियाँ,थिरकने लगी...