ब्लॉगसेतु

   छत पर सूखते कपड़ों से रह-रह कर टपक रहे पानी के छीटों से परेशान चींटी कभी दायें ओर मुड़ती-कभी बायें ओर। एकाध बार ठहर भी गई लेकिन छींटे थे कि फिर से आगे जाने के लिये मजबूर कर रहे थे। वहीं करीब ही उस काई लगी छत पर पिछले दो-तीन दिनों से पड़ा सूखा पत्ता अब...
 पोस्ट लेवल : Imagination कल्पना
कुछ फिल्में हमें वर्तमान घटनाओं से कुछ यूं जोड़ देती हैं कि लगता है जैसे ये अपने आसपास की ही बात हो। ऐसी ही एक अमेरिकन फिल्म है 1943 की The Ox-Bow Incident. फ़िल्म एक कस्बे की कहानी कहती है जहाँ शराबखाने में कुछ लोग जमा होते हैं और शराब के दौर में हाल फिलहाल में हु...
 पोस्ट लेवल : film फिल्म चर्चा
     एक दिन अनूप शुक्ल जी ने बातों ही बातों में कहा था कि - "वो लोग बहुत बदनसीब होते हैं जिन्हें कोई टोकने वाला नहीं होता"। सुनने में बहुत सामान्य सी बात लगती है लेकिन गहराई से सोचें तो यह बात बहुत मायने रखती है। न सिर्फ हम पर यह बात लागू होती है बल्...
 पोस्ट लेवल : Movie film review
 The ignorance of one voter in a democracy impairs the security of all. लोकतंत्र में एक मतदाता की अज्ञानता सभी की सुरक्षा को कम करती है। - जॉन एफ केनेडी     न्यूटन फ़िल्म देखते हुए कई बार पूर्व अमरिकी राष्ट्रपति केनेडी की ये बातें जेहन में...
 पोस्ट लेवल : film फिल्म चर्चा
मेरे घर के करीब हर साल जलने वाला रावण धीरे-धीरे ग्लेशियर की तरह खिसकता जा रहा है। पहले हर साल दशहरे के दिन मेरे स्कूल के बड़े मैदान में जलाया जाता था। बरसात खत्म होते साथ हरी-हरी घास के बीच जब अक्टूबर में चारों ओर टिड्डियां नज़र आने लगतीं, हेलिकॉप्टर वाले कीड़े...
 पोस्ट लेवल : current affairs समसामयिकी
मेरे गाँव में प्रधान के चुनाव के वक्त एक चुनाव चिन्ह चारपाई भी थी   काँग्रेस पार्टी वाला वह ‘खाट मर्मज्ञ’ जो कोई भी रहा हो लेकिन चुनावी सभाओं के लिये दिया गया उसका ‘खाट पंचायत’ वाला आईडिया कमाल का रहा । इसलिये भी कि अमूमन लोग किसी मसले पर खाट शब्द सु...
 पोस्ट लेवल : satire politics व्यंग्य राजनीति
    हैदराबाद के खूबसूरत संजीवैय्या पार्क में घूमते हुए एक जगह घास के खूबसूरत टीले नज़र आये। देखने से लगता था जैसे कश्मीर की वादी हो। कहीं सरपट ढलान तो कहीं तिरछी चढ़ाई। नर्म घास पर जूते उतार कर चलने का मन हुआ कि एकाएक बत्तखों का कुनबा खदबदाते हुए सामने से...
 पोस्ट लेवल : यात्रा हैदराबाद Travel
   अमूमन किसी जगह एक बार घूमने जाने के बाद हम चाहते हैं कि कुछ नई सी जगह देखी जाय लेकिन फूल-पत्तों, पेड़-पौधों, घास-फूस का मामला इससे थोड़ा अलग है। इनका आनंद तभी मिलता है जब उन्हीं को फिर से दुबारा देखा जाय किसी और मौसम में, किसी और टाईम-जोन में। इसलिये क...
 पोस्ट लेवल : प्रकृति हैदराबाद Nature
    कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ा जा रहा था कि अचानक एक पक्षी सामने से पंख फड़फड़ाते निकला और कुछ दूर जाकर तार पर बैठ गया। ध्यान से देखा तो यह हॉर्नबिल पक्षी था। अमूमन पूर्वांचल में ये पक्षी नहीं दिखता। तुरंत मोबाइल से उसकी तस्वीर खेंचा। एक ही क्लिक ले पा...
      इस बार गाँव जाने के बाद आदतन सुबह-सुबह साईकिल उठा कर चल दिया गाँव घूमने। घर से कहा गया कि कुछ खा-पीकर निकलो लेकिन जानता था कि देर हुई तो मई की चिलचिलाती धूप मुश्किल खड़ी कर देगी इसलिये चाय-नमकीन भकोस कर जल्दी-जल्दी निकल पड़ा। रास्ते में मदार, न...