ब्लॉगसेतु

गीली सी मिट्टी से भर के अपनी मुट्ठी सोचा मैंने बनाऊँ माटी की मूरत ऐसी डूबूँ जिसको ढ़ालते-बनाते मैं ऐसे कि दिखे मुझे वह सपनों की दुनिया जैसी पर जरा सम्भलकरकहीं माटी न गिर जायगिरकर फिर वापसपहले जैसे न रह पाएमाटी संग पढ़ा, खेला-कूदा बड़ा हुआ मैंगूँथ-ग...
    लो फिर आ गया एक पर्व की तरह हमारा हिन्दी का महोत्सव। हर वर्ष की भांति 14 सितम्बर को हिन्दी चेतना जागृत करने, उसके प्रति निष्ठा व्यक्त करने और उसका सिंहावलोकन कर उसकी प्रगति पर विचार करने के उद्देश्य से लगाई गई प्रदर्शिनी, मेले, गोष्ठी, सम्मेलन एव...
प्रथम पूज्य गणपति जी की मूर्ति स्थापना के साथ ही पर्यावरण और हमारी झीलों को खतरनाक रसायनों से बचाने के उद्देश्य से मेरे शिवा ने इस बार गणेशोत्सव में अपने हाथों मिट्टी से एक-दो नहीं अपितु पूरी 30 गणेश प्रतिमाएं तैयार की हैं। पिछले 4-5 वर्ष से निरंतर प्लास्टर ऑफ़ पेरि...
बुरे संग प्रार्थना करने से भले लोगों संग मिलकर डाका डालना भलासुन्दर वस्त्र पहनकर नरक जाने से चिथड़े पहनकर स्वर्ग जाना भलाबेडौल लोहे को हथौड़े से पीट-पीटकर सीधा करना पड़ता हैशेर की मांद में घुसने वाला ही उसका बच्चा पकड़ सकता हैबूढ़ा भेड़िया जोर की चीख-पुकार सुन कभी नहीं ड...
 आज हरियाली अमावस्या है। हमारे हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन माह में पड़ने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या या श्रावणी अमावस्या कहते हैं। इसे  विशेष तिथि के रूप में माना जाता है। इस दिन लोग पूर्वजों के निमित्त पिंडदान एवं दान-पुण्य के कार्य करने के साथ ही...
बह चुके पानी से कभी चक्की नहीं चलाई जा सकती हैलोहे से कई ज्यादा सोने की जंजीरें मजबूत होती हैचांदी के एक तीर से पत्थर में भी छेद हो सकता हैएक मुट्ठी धन दो मुट्ठी सच्चाई पर भारी पड़ता हैनिर्धन मनुष्य की जान-पहचान बहुत मामूली होती हैगरीब की जवानी और पौष की चांदनी बेका...
कोरोना की मार झेलकर 10 दिन बाद हाॅस्पिटल से घर पहुंचा तो एक पल को ऐसे लगा जैसे मैंने दूसरी दुनिया में कदम रख लिए हों। गाड़ी से सारा सामान खुद ही उतारना पड़ा। घरवाले दूरे से ही देखते रहे, कोई पास नहीं आया तो एक पल को मन जरूर उदास हुआ लेकिन जैसे ही मेरे राॅकी की नजर मु...
ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो दुःख और रोग से अछूता रहता है थोड़ी देर का सुख बहुत लम्बे समय का पश्चाताप होता है एक बार कोई अवसर हाथ से निकला तो वापस नहीं आता है दूध बिखरने के बाद रोने-चिल्लाने से कोई फायदा नहीं होता है मनुष्य अपने भाग्य को नहीं उसका भाग्...
अबकी बार होली में  कोरोना ने है पकड़ाचुराकर सब रंग मेरे अपने रंग में है जकड़ा गले में ठूसी जा रही हैं रंग बिरंगी गोलियांमुंह बांधे उड़ी रंगत में आ जा रही टोलियांतन पर नर्सें कर रही इंजेक्शनी फुहारहॉस्पिटल में हर तरफ है कोरोना बहारजो मिले  खाना ठूसे तो पेट...
 न लालच, गुस्सा न शिकायत एक समभाव वाला जीव वहभारी मेहनत करने के बाद भीरूखा, सूखा खाकर खुश रहता है दुनिया भर का अत्याचार सहता है जुग-जुग से लोगों की सेवा करता है भला करके भी बुरा बनता है संत ऋषि विद्वानों से कम नहीं वहतभी तो ज्ञानी ध्या...