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नोट: किसी शायर के शेर नहीं हैं ‘उलूक’ के लकड़बग्घे हैं पेशे खिदमतशराफत ओढ़ कर झाँकें आईने में अपने ही घर के और देखें कहीं किनारे से कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा है----------------------------पता मुझको है सब कुछ अपने बारे में कहीं से कुछ खुला हुआ थोड़ा सा किसी और को बता ही...
भटकता क्यों है लिख तो रहा है पगडंडियाँ ही सही इसमें बुरा क्या है  रास्ते चौड़े बन भी रहे हैं भीड़ के लिये माना अकेले चलने का भी तो कुछ अपना अलग मजा है जरूरी नहीं है भाषा के हिसाब से कठिन शब्दों में रास्ते लिखना रास्ते में ही जरूरी है चलना किस ने कहा है सरल शब्...
 पोस्ट लेवल : कमल लूट बेवकूफ उलूक
अच्छा है सबसे खुद से बात कर खुद को समझाना मतलब कही गयी अपनी ही बात का सारे अबदुल्ला नाच रहे हों जहाँ दीवाने हो कर बेगानी शादियों में मौका होता है बैण्ड के शोर के बीच खुद से खुद की मुलाकात का कभी नंगे किये जायें सारे शब्द ऐसे ही किसी शोर में उधाड़ कर खोल उनके भी उतार...
ये लिखना भी कोई लिखना है उल्लू ? कभी आँख बन्द कर के एक आदमी में उग आये भगवान पर भी लिख लिखना सातवें आसमान पहुँच जायेगा लल्लू कभी अवतरित हो चुके हजारों लाखों एक साथ में उसके हनुमान पर भी लिख सतयुग त्रेता द्वापर कहानियाँ हैं पढ़ते पढ़ते सो गया कल्लू ? कभी पतीलों में इ...
यार यस यस को समझ और यस यस करने की आदत डाल कुछ बनना है अगर तो बाकी सब पर मिट्टी डाल बुद्धिजीवी होने का प्रमाणपत्र है है तो निकाल नहीं भी है अगर तो भी कोई नहीं है बबाल समझ ले बस यार यस यस करने की आदत डाल यारों का यार होता है नंगा सबसे बेमिसाल होता है चाहिये होता है त...
 पोस्ट लेवल : यार यस यस
कुछ दिनों से लगातार हो रही खुजली के इलाज के बावत किसी चिकित्सक के पास जाने का मन बनाते बनाते ‘उलूक’ एक “चिट्ठा ज्योतिष” के चिट्ठे से टकरा गया नौ ग्रहों का छोड़कर अगला एक दसवें ग्रह का बहीखाता साथ में लेकर आ गया ग्रह पूर्वा के नाम से जाना जाने वाला...
मजबूरी है बीच बीच में थोड़ा थोड़ा कुछ लिख देना भी जरूरी है उड़ने लगें पन्ने यूँ ही कहीं खाली हवा में पर कतर देना जरूरी है हजूर समझ ही नहीं पाते हैं बहुत कोशिश करने के बाद भी कि यही जी हजूरी है फितूरों से भरी हुयी है दुनियाँ यहाँ भी और वहाँ भी कलम लिखने वाले की खुद ही...
कौन जायज कौन नाजायज प्रश्न जब औलाद किस की पर आ कर खड़ा हो जाये किस तरह खोज कर जायज उत्तर को लाकर इज्जत के साथबैठाया जायेकौन समझाये किसे समझाये लिखने लिखाने से कब पता चल पाये कौन जायज नाजायज और कौन नाजायज जायज सिक्का उछालने वाले के सिक्के में...
गाँव में शरीफों से बच रही है रजिया बात नहीं बताने की इज्जत उतारने वाला शहर में भी एक शरीफ ठेकेदार निकला शरीफों को आजादी है संस्कृति ओढ़ने की और बिछाने की दिनों से शरीफ साथ में है पता भी ना चला और रोज ही शराफत से एक नया अखबार निकला शरीफों को सिखा दी है शरीफ ने क...
गिरोहों से घिरे हुऐ अकेले को घबराना नहीं होता है कुत्तों के पास भौंकने के लिये कोई बहाना नहीं होता है लिखना जरूरी है सच ही बस बताना नहीं होता है झूठ बिकता है घर की बातों को कभी भी कहीं भी सामने से लाना नहीं होता है जैसा घर में होता है और जैसा बताना नहीं होता है...