ब्लॉगसेतु

एक भी नहीं छिपता है ना मुँह छिपाता है सामने से आकर गर्व के साथ खड़ा हो कर मुस्कुराता है मुखौटा लगाने की जरूरत भी नहीं समझता है पकड़ा गया होता है फिर भी नहीं घबराता है सफेद कागज के ऊपर इफरात से फैला हुआ काला बहुत कुछ कितनी कितनी कहानियाँ बना बना कर तालियाँ बटोरता हुआ...
लिखना लिखाना ठीक है सब लिखते हैं लिखना भी जरूरी है सही है गलत कुछ कहीं वैसे भी होता ही नहीं है वहम है है कह लेने में कोई बेशर्मी भी नहीं है कुछ लेखक होते हैं पैदायशी होते हैं बुरा भी नहीं है कुछ लेखक पैदा नहीं होते है माहौल बना देता है क्या किया जा सकता है कहना नही...
"ब्लॉग उलूक पर पच्चीस  लाख कदमों  को शुक्रिया"भगवान बस भगवानों से ही रिश्ते बनाता है किसी आदमी से बनाना चाह लिया रिश्ता कभी उसने तो सब से पहले उसे एक भगवान बनाता है एक आदमी उसे जरा सा दमदार&...
बकबक-ए-उलूकसमझ में नहीं आता है जब कभी किसी बात पर कुछ कहने के लिये कह दिया जाता है ऐसे ही किसी क्षण एक पहाड़ बना दिया गया राई का दाना बहुत घबराता है  पता ही नहीं चल पाता है भटकते भटकते एक गाँ...
सुपुर्द-ए-खाक हो गये हों या जल कर राख हो गये हों ढूँढ कर निकाल कर लाये जायेंगे राख और मिट्टी हो गये कुछ खास फिर से जमीन से खोद कर धुलवाये जायेंगे विज्ञान के सारे ज्ञान का तेल निकाल कर पेल ले जायेंगे पर छोड़ेंगे नहीं मरे हुऐ भी फिर से जिन्दा करवाये जायेंगे अभी ब...
बरसों लकीर पीटना सीखने के लिये लकीरें समझने के लिये लकीरें कहाँ से शुरु और कहाँ जा कर खतम समझ लेना नहीं समझ पाना बस लकीरें समझते हुऐ शुरु होने और खतम होने का है बस वहम और वहम जो घर में है जो मोहल्ले में है जो शहर में है वही सब हर जगह में है और वही हैं सब के रहम-ओ-क...
कागज पर लिखा जमीन का कुछ भी उसके लिये बेकार होता है चाँद तारों पर जमा जमाया जिसका कारोबार होता है दुनियाँ जहाँ पर नजर रखता है बहुत ज्यादा समझदार होता है घर की मोहल्ले की बातें छोटे लोगों का रोजगार होता है बेमतलब कुछ भी कह डालिये तुरंत पकड़ लेता है कलाकार होता है मतल...
बहुत कुछ है लिखने के लिये बिखरा हुआ समेटना ठीक नहीं इस समयरहने देते हैंहोना कुछ नहीं है हिसाब का बेतरतीब ला कर और बिखेर देते हैं बहे तो बहने देते हैंदीमकें जमा होने लगी हैं फिर सेनये जोश नयी...
सोये हुये लोगों के लिये बहस का सूत्रhttps://jaagosonewalo.blogspot.com/बहस पर राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर की टिप्पणी नीचे हैराजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर = RAJA Kumarendra Singh Sengar15 अप्रैल 2019 को 12:23 amचुनाव वह कैसे लड़ रहा, कैसे नहीं. देश द्रोही वह...
पहाड़ी झबरीले कुछ काले कुछ सफेद कुछ काले सफेद कुछ मोटे कुछ भारी कुछ लम्बे कुछ छोटे कुत्तों के द्वारा घेर कर ले जायी जा रही कतारबद्ध अनुशाशित पालतू भेड़ों का रेवड़ गरड़िये की हाँक के साथ पथरीले ऊबड़ खाबड़ ऊँचे नीचे उतरते चढ़ते छिटकते फिर वापस लौटते मिमियाते मेंमनों को...