ब्लॉगसेतु

ज़िन्दगी जी लिया हमने गमों को पी लिया हमने होश में हम जब आयेदिल को सी लिया हमने मैखाना भी ख़ाली था पैमाना भी ख़ाली था भरी थी जिन आंखों में इश्क़ वो निगाहें बड़ा सवाली था कहा दिल का भी मान लोअपने जज़्बातों को थाम लो न करो सरेआम...
 पोस्ट लेवल : पैमाना मैखाना
मैंने इस सादगी ए ज़िन्दगी से पल्ला झाड़ लियाज़िन्दगी की सच्चाई ने मुझमें कटुता भर दियाजिस किरदार को हमने बड़े मासूमियत से संजोयाउसकी बचपने में लोगों ने जहर है घोल दियाबड़ी इत्मिनान की नींद कभी सोया करते थे हमनींद की गलियारे में कभी सरपट दौड़ा करते थे हममन के किसी कोने मे...
कभी समंदर तो कभी दरिया बन केकभी आग तो कभी शोला बन केज़रूरतमंदों ने खूब गले लगाया था मुझेकाम आया हूँ मैं जाने कैसे कैसे उनकेपर अब मैं जो थोड़ा स्वार्थी बन गया हूँउन्हें नश्तर की तरह अब मैं चुभ रहा हूँसुनना  छोड़ दिया जब से उनका दर्दे फ़सानातेवर उनके...
 पोस्ट लेवल : समंदर फ़साना
शून्य का मैं खोज हूँ शून्य का मैं ओज हूँ शून्य  के रथ पर सवार शून्य का मैं आज हूँ शून्य का कपाट हूँ शून्य सा विराट हूँ शून्य सा ही क्षुद्र मैं शून्य का ललाट हूँ अवसाद में है शून्यता विषाद में है शून्यता प्...
अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहींउसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद हैकर भी लूँ नींदों से वाबस्ताख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है  रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जोघूँट पानी का न उतरा हद हैकर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमनेहुए फिर भी बदनाम हद हैदो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के च...
सारे किस्से बयाँ न हो पाता कभीदिल के कब्र में हजार किस्से दफ़्न हैंइतने करीब भी न थे कि बुला पाऊँ तुम्हेंइतने दूर भी न थे कि भुला पाऊँ तुम्हेंपुराने जख्मों से मिल गयी वाहवाही इतनीकि अब उसे नये जख्मों की तलाश हैमेरी चाहत है मैं रातों को  रोया न करूंया रब मेरी इस...
 पोस्ट लेवल : जख्म तलाश कब्र
ख़्वाब तेरी किरचियाँ बन आँखों को अब चुभने लगीगम की आँधियाँ इस तरह ख्वाबों के धूल उड़ा गएमंज़िल पास थी रास्ता साफ था दो कदम डग भरने थेगलतफहमी की ऐसी हवा चली सारे रास्ते धुंधला गएबड़े शिद्दत से फूलों में बहार-ए-जोबन आयी थीवक्त के साथ मिरे गजरे के सारे फूल मुरझा...
मेरी  धड़कनों से वो ज़िंदा ...  जो हुईज़िंदा हुई क्या मुझ पे ही वो बरस पड़ी!!देख लिया इस शहर को  जो करीब सेबोल दिया असलियत तो भीड़ उबल पड़ी !!सम्भाला ही था आईने को सौ जतन सेकाफ़िये में तंग हुई उलझन में हूँ पड़ी !!ख़ुदाया तूने मुझ...
 पोस्ट लेवल : शहर गुनाह काबिल
ज़िन्दगी से कुछ इतने क़रीब हुएकि आईने से भी  हम अजनबी हुएरोशनी जो आँखों की नजर थीदिखाया नहीं कुछ जो बत्ती गुल हुएआ पँहुचे है ऐसी जहाँ में हमना ख़ुशी से ख़ुश औ' ना ग़म से ग़मसभी रास्तें  मिल जाते है जहाँउस जगह से रास्तों सा अलग हुएअच्छे-बुरे,सही-गलत पहचान न सके...
 पोस्ट लेवल : ग़म मशहूर नज़्म ज़िन्दगी
हर दर के दरवाज़ों की भी अपनी कहानी होती हैकहीं बूढ़े सिसकते मिलते है और कहीँ जवानी रोती हैआंगन-खिड़की है फिर भी दरवाज़ों का अपना खम हैकोई हाथ पसारे बाहर है कोई बाँह फैलाये अंदर हैहर दरवाजे के अंदर जाने कितनी जानें बसतीं हैंबच्चे बूढ़े और जवानों की खूब रवानी रहती &n...
 पोस्ट लेवल : kavita darwaja