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आधुनिक दौर में बच्चों में अध्ययन के प्रति समर्पण के साथ-साथ रचनात्मकता होना भी बहुत जरूरी है। यह रचनात्मकता ही हमें जिज्ञासु बनाती है और संवेदनशीलता को बरकरार रखती है। इसके लिए हमारे भीतर का बचपन जिन्दा रहना चाहिए। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के नि...
हाल ही में ज्ञान विज्ञान बुलेटिन का बाल साहित्य विशेषांक प्रकाशित हुआ है। इस अंक का विमोचन कौसानी में आयोजित राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी में हुआ। बाल साहित्य के पुरोधा से लेकर युवा बाल साहित्यकारों के महत्वपूर्ण आलेख पत्रिका में शामिल किए गए हैं। इसमें डाॅ0 राष्...
 पोस्ट लेवल : बाल-पत्रिका
आदिल के घर के पड़ोस में शर्मा अंकल रहते थे. उनका घर बहुत बड़ा था. बच्चे उनसे बहुत डरते थे. क्योंकि उनकी बड़ी बड़ी मूंछे थी जिसके कारण वो डरावने दिखते थे. उनका चेहरा हमेशा गुस्से में रहते थे. अंकल के अलावा उस घर में कोई ओर रहता था तो वो था रमेश भईया. वो अंकल के घर का सा...
 पोस्ट लेवल : बाल कहानी
 'स्वच्छ भारत' की संकल्पना को लेकर राष्ट्रीय डाक सप्ताह दौरान आयोजित फिलेटली दिवस पर स्कूली बच्चों ने  डाक टिकट बनाया। इलाहाबाद में 13 अक्टूबर, 2014 को आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने 'स्वच्छ भारत' के प्रति अपनी भावनाओं को खूबसूरत चित्रों में ढालते हुए...
डाक टिकट पर अभी तक आपने गांँधी, नेहरू या ऐसे ही किसी महान विभूति की फोटो देखी होगी। पर अब डाक टिकट पर आप की फोटो भी हो सकती है और ऐसा संभव है डाक विभाग की ’’माई स्टैम्प’’ सेवा के तहत। वाराणसी  में 6 सितम्बर, 2014 को माई स्टैम्प सेवा का उद्घाटन करते हुए इल...
हर किसी की चाहत होती है कि उसका बनाया चित्र डाक टिकट पर एक धरोहर के रूप में अंकित हो। भारतीय डाक विभाग ऐसे लोगों के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आया है, जहाँ डाक टिकट पर आप द्वारा बनाया मौलिक चित्र स्थान पा सकता है। इस संबंध में जानकारी देते हुए इलाहाबाद परिक्षेत्र...
शिक्षक दिवस पर पहली बार हुआ कि देश के प्रधानमंत्री ने स्कूली बच्चों को सम्बोधित किया हो। देशभर के बच्चों के साथ संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह मेरे लिए एक सौभाग्‍य की घड़ी है, कि मुझे उन बालकों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला है, जिनकी आंख...
भारतीय जीवन में संगीत का विशेष महत्व है। शास्त्रीय संगीत जो कि रागों पर आधारित है, देश में लोक जीवन का आधार रहा है। फिल्मों, म्यूजिक एलबमों, लोकगीतों आदि में इसके विभिन्न रूपों का प्रयोग किया गया है। यहाँ अनेक ऐसे संगीतकार हुए हैं जिन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत क...
हिंदी साहित्य में बड़ों के साथ-साथ, नन्हे-मुन्नों के लिए भी लेखन करने वालों की कमी नहीं है। बाल-साहित्य एक ऐसी विधा है, जहाँ बड़ों को भी बच्चा बनकर सोचना पड़ता है, अन्यथा लेखन में कृत्रिमता हावी हो जाती है।  उमेश चौहान जी  उन लोगों में से हैं, जो बड़ों के साथ...
 पोस्ट लेवल : बाल-गीत उमेश चौहान
मुरलीधर मथुराधिपति माधव मदनकिशोर. मेरे मन मन्दिर बसो मोहन माखनचोर. कृष्ण जन्माष्टमी पर हार्दिक बधाइयाँ !!