ब्लॉगसेतु

रंग रंग राधा हुई, कान्हा हुए गुलालवृंदावन होली हुआ सखियाँ रचें धमालहोली राधा श्याम की और न होली कोयजो मन रांचे श्याम रंग, रंग चढ़े ना कोयनंदग्राम की भीड़ में गुमे नंद के लालसारी माया एक है क्या मोहन क्या ग्वालआसमान टेसू हुआ धरती सब पुखराजमन सारा केसर हुआ तन सारा ऋत...
 पोस्ट लेवल : उत्सव-पर्व
तुम मिले तो जिंदगी में रंग भर गए। तुम मिले तो जिंदगी के संग हो लिए। प्यार का भी भला कोई दिन होता है। इसे समझने में तो जिंदगियां गुजर गईं और प्यार आज भी बे-हिसाब है। कबीर ने यूँ ही नहीं कहा कि 'ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय' . प्यार का न कोई धर्म होता...
ओ प्रेम !जन्मा ही कहाँ हैअभी तू मेरे कोख से कि कैसे कहूँतुझे जन्मदिन मुबारकदुबका पड़ा हैअब भी मेरी कोख मेंसहमा-सहमा सा कि कैसे चूमूँमाथा तेराचूस रहा हैअब भी आँवल सेकतरा कतरालहू मेराकि कैसे पोषूँधवल सेनहीं जन्मना हैतुझे इसकलयुगी दुनिया मेंले चले मुझे कोई ब्रह्माण्ड क...
ये दुनिया हमारी सुहानी न होती,कहानी ये अपनी कहानी न होती ।ज़मीं चाँद -तारे सुहाने न होते,जो प्रिय तुम न होते,अगर तुम न होते।न ये प्यार होता,ये इकरार होता,न साजन की गलियाँ,न सुखसार होता।ये रस्में न क़समें,कहानी न होतीं,ज़माने की सारी रवानी न होती ।हमारी सफलता की सारी...
मेरे गीतों में आकर के तुम क्या बसे,गीत का स्वर मधुर माधुरी हो गया।अक्षर अक्षर सरस आम्रमंजरि हुआ,शब्द मधु की भरी गागरी हो गया।तुम जो ख्यालों में आकर समाने लगे,गीत मेरे कमल दल से खिलने लगे।मन के भावों में तुमने जो नर्तन किया,गीत ब्रज की भगति- बावरी हो गया। ...मेरे गी...
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर  आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती सुभाष प्रसाद गुप्ता की  कविताएं. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...जब से मैं रंगा हूँ तेरे प्रेम रंग में रंग रसिया,मेरा तन मन सब  इंद्रधनुषी होने  लगा हैIजब से मिला है धरकन तेरे...
ज़बां लफ्ज़े मुहब्बत हैदिलों में पर अदावत है ।न कोई रूठना मनानायही तुम से शिकायत है ।कि बस रोज़ी कमाते सबनहीं कोई हिकायत है ।मुहब्बत ही तो जन्नत हैअदावत दिन क़यामत है ।पढ़ो तुम बन्द आँखों सेलिखी दिल पे इबारत है ।ग़रीबों से जो हमदर्दी यही सच्ची इबादत़ है ।कभी य...
 पोस्ट लेवल : डा सुधेश ग़ज़ल
तुम अकेले रह गए तो भोर का तारा बनूं मै।मै अकेला रह गया तो रात बनकर पास आना।तुम कलम की नोक से उतरे हो अक्षर की तरह।मै समय के मोड़ पर बिखरा हूँ प्रस्तर की तरह।तुम अकेले बैठकर बिखरी हुई प्रस्तर शिला पर,सांध्य का संगीत कोई मौन स्वर में गुनगुनाना।एक परिचय था पिघलकर घुल ग...
'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर  आज  'वेलेंटाइन डे' पर  प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटती लीला तिवानी  की एक कविता. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा... प्रेम मन की आशा है, करता दूर निराशा है, चन्द शब्दों में कहें तो, प्रेम ज...
फिर वसंत की आत्मा आई,मिटे प्रतीक्षा के दुर्वह क्षण,अभिवादन करता भू का मन !दीप्त दिशाओं के वातायन,प्रीति सांस-सा मलय समीरण,चंचल नील, नवल भू यौवन,फिर वसंत की आत्मा आई,आम्र मौर में गूंथ स्वर्ण कण,किंशुक को कर ज्वाल वसन तन !देख चुका मन कितने पतझर,ग्रीष्म शरद, हिम पावस...