ब्लॉगसेतु

मुझे हमेशा अफ़सोस रहेगा कि तुम मम्मी से नहीं मिल सकीं. पता है, ये कोई तीन साल पहले की बात है. हालांकि इसकी शुरुआत उससे भी पहले हो चुकी थी. मुझे याद है वो अक्सर अपनी चीज़ों को इधर-उधर रखकर भूल जाती थीं. ये ख़ासकर उनके चश्मे के साथ होता था. हम सभी के साथ...
 पोस्ट लेवल : Stories
रमज़ान के पूरे तीस रोज़ों के बाद ईद आई है. महीने का आख़िरी दिन है. आबिद अपने कम्प्यूटर इंस्टिट्यूट के भीतर बैठा है. सामने मेज़ पर एक प्रोजेक्टर रखा है. ऊपर एक पंखा बेहिसी से मंडरा रहा है. सामने काले शेड वाला एक पारदर्शी दरवाज़ा है जिससे बाहर गुज़रती दुनियादारी दिख रही है...
 पोस्ट लेवल : Stories
किताबों के मामले में ये साल कुछ बहुत अच्छा नहीं रहा। इस साल बहुत थोड़ी सी किताबें पढ़ पाया। लेकिन इस साल पॉडकास्ट्स की दुनिया से मैं रूबरू हुआ। जो किताबें पढ़ीं और जो मेरे मनपसंद पॉडकास्ट्स हैं उनके नाम यहाँ दे रहा हूँ।किताबें:DraculaBram Stoker6Malevolent R...
  खरगोन, मेरा ननिहाल। उसी शहर में मेरी मम्मी का भी ननिहाल है जिसे सब लोग सरमण्डल का बाड़ा कहते हैं। बाड़ा अंग्रेजों के ज़माने की कोई सरकारी इमारत थी शायद। बीचों-बीच एक बड़ी इमारत थी और चारों तरफ चार बाड़े थे। दो आजू-बाजू, एक सामने और एक पीछे। चारों बाड़ों में क...
 पोस्ट लेवल : Memoir
Teg Hindustan KiHarpal Singh 'Arush'6Annihilation of Caste: The Annotated Critical EditionB. R. Ambedkar6Saaye Mein DhoopDushyant Kumar6Bhimrao Ambedkar : Ek JeevaniChristophe Jaffrelot6DHARAMVEER BHARTI KI LOKPRIYA KAHANIYANDharmveer Bharti4The Kite RunnerKhaled H...
 पोस्ट लेवल : Year-End-Books-Read
जो उट्ठेंगे तेरी महफिल से, कहाँ जाएंगे जहां गुमशुदा हर शख़्स गया, वहाँ जाएंगेकाँटों और पत्थरों से ना रोक पाओगेहम जब लेके अपनी हथेली पे जां जाएंगेक्या छुपा सकेंगे कभी मेरे गुनाह मुझसे ये आईने कभी इतने मेहरबां जाएंगेनफ़रतों के किस्सों से अब गिला क्या रक्खें जब मोहब्बतो...
 पोस्ट लेवल : Kavita Ghazal
 तस्वीरें पलटना भी बहाना हो गयाआईने में चेहरा अब पुराना हो गयाटूटे ख़्वाबों को दफ़्न कर दिया जब सेज़िंदगी का सफ़र भी सुहाना हो गयाकब तलक राह देखे कोई अच्छे दिनों कीछोड़ो कि अब मंज़र वो पुराना हो गयाभूखे पेटों के लिए सिर्फ़ गर्व की ही नेमतेंहाकिम का रोज़ का फ़साना हो गय...
 पोस्ट लेवल : Kavita Ghazal
एक राजा को एक बंदर इतना अच्छा लगा कि उसने अपनी हिफाज़त के लिए अपने सैनिकों को हटाकर उसे तैनात करवा लिया।एक दिन सोते वक़्त एक मक्खी राजा के ऊपर आ कर बैठ गई। चौकीदार बंदर ने राजा की तलवार उठा कर मक्खी पर हमला कर दिया। मक्खी उड़ गई। राजा मर गया।एक बंदर प्रेमी ने कहा कि ब...
 पोस्ट लेवल : Thoughts Stories
गली के मुहाने से मुड़ते हुए एक बारगी वो पहचान ही नहीं पाया कि ये वही गली है। उसने मुड़कर पीछे देखा। दूर-दूर तक कोई नज़र नहीं आ रहा था। पुलिस की गश्त का सायरन दूर किसी और सड़क पर बज रहा था। मेन रोड पर आड़ा पड़ा पीला बैरिकेट, सड़कों पर बिखरे पत्थर और काँच के टुकड़े, और उन सब...
 पोस्ट लेवल : Stories
एक शाम का गुमनाम होना अभी बाक़ी थाएक मोहब्बत का अंजाम होना अभी बाक़ी थाबड़े एहतिमाम से हर शाम जलाते थे चराग़उम्मीदों का नाक़ाम होना अभी बाक़ी थावो लेते ही न थे हमारे तजरबों से सबक़तनहाइयों में हर शाम होना अभी बाक़ी थाढूँढता फिरता था म'आनी अपने वजूद केतेरा नाम हमनाम होना अभ...
 पोस्ट लेवल : Kavita Ghazal