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 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल- बुजुर्गों से अदब के साथ मिलना चाहिए हमको हरे पत्ते,महकते फूल ये मौसम सुहाना है यहाँ खुशबू के होठों पर तितलियों का ठिकाना है मैं उसके हाथ से तस्वीर उसकी छीन लाया हूँ सलीके से उसे अपनी किताबों में छिपाना है हरे नाखून,आँखें झील स...
  चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -मढ़ेंगे किस तरह इस मुल्क की तस्वीर सोने में मढ़ेंगे किस तरह भारत की हम तस्वीर सोने में लगे हैं मुल्क के गद्दार सब जादू औ टोने में यहाँ हड़ताल और धरना भी प्रायोजित विदेशों से पड़ोसी मुल्क से आती है बिरयानी भ...
सर्वप्रथम मेरा यह गीत नवनीत में आदरणीय श्री विश्वनाथ सचदेव जी ने प्रकाशित किया था |फिर मेरे गीत संग्रह में प्रकाशित हुआ |अभी हाल में फरवरी अंक में इंदौर से प्रकाशित वीणा में यह प्रकाशित है |  चित्र -साभार गूगल अबकी शाखों पर वसंत तुम एक गीत -अबकी...
 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -लिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैकोई राँझा-हीर तो कोई राधा रानी लिखता हैलिखने वाला अपने मन की प्रेम कहानी लिखता हैमीरा को भी सबने देखा अपनी-अपनी नज़रों सेकोई कहता जोगन कोई प्रेम दीवानी लिखता हैसब अपनी तकरीर में केवल बात...
 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल-हमारी आस्था चिड़ियों को भी दाना खिलाती हैगले में क्रॉस पहने है मगर चन्दन लगाती हैसियासत भी इलाहाबाद में संगम नहाती हैये नाटक था यहाँ तक आ गए संतों के हत्यारेसुपर्णखा बनके जैसे राम को जोगन रिझाती हैकोई बजरे पे कोई रेत में धँसकर नहा...
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-स्वर्ग सा इस देश का वातावरण हो जाएगाछल, कपट,और लोभ का यदि संवरण हो जाएगास्वर्ग सा इस देश का वातावरण हो जाएगाप्रकृति का सौंदर्य कम कर आपने सोचा कभीबाँध से नदियों के जल का अपहरण हो जाएगापंचवटियों में नया सोने का मृग फिर भेजकरवह बहुत खुश थ...
 चित्र-साभार गूगलएक प्रेमगीत-चिट्ठियाँ पढ़ते हुए सुनसान वाले दिनझुकीं नज़रेंगुलमोहरमुस्कान वाले दिन ।याद हैंअब भी मुलेठी पान वाले दिन।पुस्तकों केबीच मेंतस्वीर रखकर देखना,राह चलतेआदमी परएक कंकड़ फेंकना,चिट्ठियाँपढ़ते हुएसुनसान वाले दिन ।आईने कोदेखकरहँसना स्वगत...
 पोस्ट लेवल : एक प्रेमगीत
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-माँ का वह चूल्हा-धुँआ हर शाम होना चाहिएइश्क़ के आगाज़ का अंजाम होना चाहिए हर बड़े शायर को कुछ बदनाम होना चाहिएशायरी में इश्क़ ,खुशबू,हुस्न की बातें थीं कलअब ग़ज़ल में कुछ सबक,पैग़ाम होना चाहिएबाद मरने के, लबों पर हैं निराला और मज़ाजकुछ तो...
 बुरांसएक गीत-नदियों में कंचन मृग सुबहें वो शाम कहाँनदियों मेंकंचन मृग सुबहें वो शाम कहाँ ?धुन्ध कीकिताबों मेंसूरज का नाम कहाँ ?दुःख कीछायाएं हैंपेड़ों के आस-पास,फूल,गंधबासी हैशहरों का मन उदास,सिर थामेबैठा दिनढूंढेगा बाम कहाँ ?अल्मोड़ाकौसानीहाँफती मसूरी है,...
 काशी गंगा घाटएक गीत-देवगंगा हो हमारी या तुम्हारी नर्मदा होदेव गंगा हो हमारी यातुम्हारी नर्मदा हो ।घाट परउत्सव मनातीसंस्कृति यह सर्वदा हो ।कुम्भ ,छठ होया चतुर्थीचौथ का जलता दिया हो,पुण्य सबकोमिले चाहेपत्र का वह हाशिया हो,अमावस्यापंचमी का चाँद हो या प...