ब्लॉगसेतु

एक देशगान-आज़ादी का पर्व बड़ा हैआज़ादी का पर्व बड़ा हैमज़हब के त्योहारों से ।आसमान को रंग दोअपने आज़ादी के नारों से ।मातृभूमि के लिए मरा जोवह सच्चा बलिदानी है,जो दुश्मन से हाथ मिलाएखून नहीं वह पानी है,भारत माँ से माफ़ी माँगेंकह दो अब ग़द्दारों से ।हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई...
चित्र-गूगल से साभारएक गीत-परदेसी केसर का एक फूल लानापरदेसीकेसर काएक फूल लाना ।धरती कीज़न्नत कोनज़र से बचाना ।शतदल कीगंध उठेमीठी डल झील से,पदमा सचदेवलिखेंकविता तफ़सील से,बंजारेघाटी केबाँसुरी बजाना ।हाथ मेंतिरंगा लेनीलगगन उड़ना,आतंकीआँधी सेले त्रिशूल लड़ना,बर्फ़ानी बाबाहरआ...
विश्व नेता -माननीय मोदी जी कश्मीर  पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन विपक्ष के कुछ सांसद अपने ही देश के ख़िलाफ़ बयान देकर राष्ट्र की अस्मिता से खिलवाड़ ही नहीं सही मायने में राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं । सरकार के साहसिक निर्णय के साथ...
एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके अब बारूदी गन्ध न महके खुलकर हँसे चिनार |हवा डोगरी में लिख जाये इलू -इलू या प्यार |जलपरियाँ लहरों से खेलें गयीं जो कोसों-मील ,फिर कल्हण की राजतारंगिणी गायेगी डल झील ,नर्म उँगलियाँ छेड़ें...
चित्र -साभार गूगल एक गीत -कहीं देखा गाछ पर गाती अबाबीलें ढूँढता है मन हरापन सूखतीं झीलें |कटे छायादार तरु अब  ठूँठ ही जी लें |धूप में झुलसे हुएचेहरे प्रसूनों के ,घर -पते बदले हुए हैं मानसूनों के ,कहीं देखा गाछ...
चित्र-साभार गूगलएक प्रेमगीत-सात रंग का छाता बनकरसात रंग काछाता बनकरकड़ी धूप में तुम आती हो ।अलिखितमौसम के गीतों कोमीरा जैसा तुम गाती हो ।जब सारासंसार हमाराहाथ छोड़कर चल देता है,तपते हुएमाथ पर तेराहाथ बहुत सम्बल देता है,आँगन मेंचाँदनी रात में,चौरे पर दिया -बाती हो ।कभ...
चित्र-एक गीत-नदियाँ सूखीं मल्लाहों की प्यास बुझाने मेंराजनीति कीबिगड़ी भाषाकौन बचाएगा ?आगजनीमें सब शामिल हैंकौन बुझाएगा ?राजनीति का,बच्चों कास्कूल बचाना होगाशहरों मेंअब गीतमौसमी जंगल गाएगा ।राहजनी मेंरामकृष्ण केसपनों का बंगाल,ख़त्म हुईकानून व्यवस्थालगता यह पाताल,विधि...
चित्र-साभार गूगलएक गीत-पियराये पत्तों सेपियरायेपत्तों सेहाँफती जमीन ।उड़ा रहींराख-धूलवादियाँ हसीन ।दूर कहींमद्धम सावंशी का स्वर,पसरा हैजंगल मेंसन्नाटा-डर,चीख रहेपेड़ों कोचीरती मशीन ।सूख रहींहैं नदियाँसौ दर्रे ताल में,अधमरीमछलियाँहैं मौसम के जाल में,फूलों मेंगन्ध नहीं...
चित्र-साभार गूगलएक गीत-मौसम का बासीपन टूटेहँसनाहल्की आँख दबाकरमौसम का बासीपन टूटे ।हलद पुतीगोरी हथेलियोंसे अब कोई रंग न छूटे ।भ्रमरों केमधु गुँजन वालेआँगन में चाँदनी रात हो,रिश्तों मेंगुदगुदी समेटेबच्चों जैसी चुहुल,बात हो,अर्घ्य जलेतुलसी चौरे परकोई मंगल कलश न फूटे...
गीत कवि माहेश्वर तिवारी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती बाल सुन्दरी तिवारी के साथहिंदी के सुपरिचित गीतकवि माहेश्वर तिवारी को समर्पित एक गीतफूलते कनेरों मेंएक दियाजलता हैआज भी अंधेरों में ।पीतल कीनगरी मेंफूलते कनेरों में ।छन्द रहेप्राण फूँकआटे की मछली में,घटाटोपमौसम मेंकौंध...