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 चित्र साभार गूगलसृष्टि का संहार रोको/युद्ध कभी सुपरिणाम नहीं देताएक सामयिक गीत-क्या यही सुदिनधरा-गगनचाँद-सूर्यसब हुए मलिन ।नायक सेनरभक्षी हो गए पुतिन ।बारूदों सेसारी दुनिया को पाटो,कांतिहीनवीटो हैशक्तिहीन नाटो,मानवताचीख रहीक्या यही सुदिन ।दृष्टिहीनर...
 चित्र साभार गूगलएक प्रेमगीत-तुमने जिस दीप को छुआलौट गयीपल भर थी चाँदनीदूर अभी भोर के उजाले ।सिरहानेशंख धरे सोयेपर्वत की पीठ पर शिवाले ।यात्राओं मेंसूनापनचौराहों पर जादू -टोने,वासन्ती मेड़ों पर बैठीखेतों में गीत लगी बोने,सूरज कोप्यास लगी शायदझीलों से मेघ उ...
 चित्र साभार गूगलएक लोकभाषा गीत-प्रेम क रंग निराला हउवैसिर्फ़ एक दिन प्रेम दिवस हौबाकी मुँह पर ताला हउवैई बाजारू प्रेम दिवस हौप्रेम क रंग निराला हउवैसबसे बड़का प्रेम देश कीसीमा पर कुर्बानी हउवैप्रेम क सबसे बड़ा समुंदरवृन्दावन कै पानी हउवैप्रेम भक्ति कै चरम बिंदु...
 श्री पवन कुमार(I.A.S)निदेशक उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान,लखनऊविशेष  -पवन कुमार जी अपनी ग़ज़लों के लिए जाने जाते हैं लेकिन अभी हाल में एक उपन्यास 'मैं हनुमान 'प्रकाशित हुआ और काफी सराहा जा है | यह उपन्यास रामभक्त अजर अमर भक्त शिरोमणि हनुमान जी पर लिखा गया है...
 चित्र साभार गूगलएक गीत-फागुन की गलियों मेंचोंच मेंउछाह भरेजलपंछी तिरते हैं।शतदल केफूलों मेंअनचाहे घिरते हैं।होठों परवंशी केराग-रंग बदले हैं,पाँवों केघुँघरू सेकत्थक स्वर निकले हैं,स्वर केसम्मोहन मेंटूट-टूट गिरते हैं ।नए-नएफूलों कीगंध है किताबों में,कैसे कह दूँ...
 मेरा सद्यः  प्रकाशित तृतीय गीत संग्रह मेड़ों पर वसन्त अमेज़ॉन पर भी बिक्री हेतु उपलब्ध है।सादर ।आप सभी का दिन शुभ होपुस्तक -मेड़ों पर वसंत कवि /गीतकार -जयकृष्ण राय  तुषार प्रकाशक -साहित्य भण्डार ,प्रयागराज उत्तर प्रदेश सजिल्द मूल्य ४००&n...
 चित्र साभार गूगलभारत राष्ट्र,भारत की संस्कृति महान है।आज़ादी के लिए शहीद होने वाले महान पूर्वजों को कोटि- कोटि नमन !एक देशगान-हमें यही वरदान चाहिएभारत का गौरव,भारत कीसंस्कृति का अभिमान चाहिए ।वन्देमातरमगूँजे जिसमेंवह भारत बलवान चाहिए ।जिसकेसागर की लहरों स...
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-तुम्हारा चाँद, तुम्हारा ही आसमान रहाहवा में,धूप में,पानी में फूल खिलते रहेहज़ार रंग लिए ख़ुशबुएं बदलते रहेबड़े हुए तो सफ़र में थकान होने लगीतमाम बच्चे जो घुटनों के बल पे चलते रहेसुनामी,आँधियाँ, बारिश,हवाएँ हार गईंबुझे चराग़ नई तीलियों से जलत...
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-मौसम अच्छा धूप गुलाबीमौसम अच्छा धूप गुलाबी क्या दूँ इसको नामराधा कृष्ण कहूँ या इसको लिख दूँ सीतारामचन्दन की खुशबू में लिपटे दीपक यादों केरामचरितमानस को लेकर बैठी दूल्हन शामभींगे पंखों वाली तितली लिपटी फूलों सेमौसम आया फूल तोड़ने करके चार...
 चित्र साभार गूगलएक ग़ज़ल-धूप निकल जाए तो अच्छासंक्रान्ति है मौसम ये बदल जाए तो अच्छाभींगी हैं छतें धूप निकल जाए तो अच्छालो अपनी ही शाखों से बग़ावत में परिंदेअब इनका ठिकाना ही बदल जाए तो अच्छाअब ख़त्म हो ये लूट,घरानों की सियासतकुछ देश का कानून बदल जाए तो अच्छाजो द...