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चित्र -साभार गूगल एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा स्वर्ण मृग की लालसा मत पालना हे राम !दोष मढ़ना अब नहीं यह जानकी के नाम |आज भी मारीच ,रावण घूमते वन -वन ,पंचवटियों में लगाये माथ पर चन्दन ,सभ्यता को नष्ट करना रहा...
चित्र -साभार -गूगल एक गीत - कैक्टस का युग कैक्टस कायुग कहाँ अब बात शतदल की ?हो गयी कैसे विषैली हवा जंगल की |फेफड़ों मेंदर्द भरकर डूबता सूरज ,हो गया वातावरण का रंग कुछ असहज ,अब नहीं लगती सुरीली थाप मादल की |भैंस के&nb...
एक गीत-नदी में जल नहीं हैधुन्ध में आकाश,पीले वन,नदी में जल नहीं है ।इस सदी मेंसभ्यता के साथक्या यह छल नहीं है ?गीत-लोरीकहकहेदालान के गुम हो गये,ये वनैलेफूल-तितली,भ्रमर कैसे खो गये,यन्त्रवतहोना किसीसंवेदना का हल नहीं है ।कहाँ तुलसीऔर कबिरा कापढ़े यह मंत्र काशी,लहरतार...
एक गीत -बापू ! रहे हिमालयबापू रहेहिमालय ,उनकादर्शन गोमुख धारा है ।यह जलतीमशाल जैसा हैजहाँ-जहाँ अँधियारा है ।रंगभेद केप्रबल विरोधीगिरमिटिया कहलाते थे,चरखा-खादीलिए साथ मेंरघुपति राघव गाते थे,सत्य अहिंसामन्त्र उन्ही कामानवता का नारा है ।छुआछूतअभिशाप बतातेरहे स्वदेशी क...
एक देशगान-आज़ादी का पर्व बड़ा हैआज़ादी का पर्व बड़ा हैमज़हब के त्योहारों से ।आसमान को रंग दोअपने आज़ादी के नारों से ।मातृभूमि के लिए मरा जोवह सच्चा बलिदानी है,जो दुश्मन से हाथ मिलाएखून नहीं वह पानी है,भारत माँ से माफ़ी माँगेंकह दो अब ग़द्दारों से ।हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई...
चित्र-गूगल से साभारएक गीत-परदेसी केसर का एक फूल लानापरदेसीकेसर काएक फूल लाना ।धरती कीज़न्नत कोनज़र से बचाना ।शतदल कीगंध उठेमीठी डल झील से,पदमा सचदेवलिखेंकविता तफ़सील से,बंजारेघाटी केबाँसुरी बजाना ।हाथ मेंतिरंगा लेनीलगगन उड़ना,आतंकीआँधी सेले त्रिशूल लड़ना,बर्फ़ानी बाबाहरआ...
विश्व नेता -माननीय मोदी जी कश्मीर  पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन विपक्ष के कुछ सांसद अपने ही देश के ख़िलाफ़ बयान देकर राष्ट्र की अस्मिता से खिलवाड़ ही नहीं सही मायने में राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं । सरकार के साहसिक निर्णय के साथ...
एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके अब बारूदी गन्ध न महके खुलकर हँसे चिनार |हवा डोगरी में लिख जाये इलू -इलू या प्यार |जलपरियाँ लहरों से खेलें गयीं जो कोसों-मील ,फिर कल्हण की राजतारंगिणी गायेगी डल झील ,नर्म उँगलियाँ छेड़ें...
चित्र -साभार गूगल एक गीत -कहीं देखा गाछ पर गाती अबाबीलें ढूँढता है मन हरापन सूखतीं झीलें |कटे छायादार तरु अब  ठूँठ ही जी लें |धूप में झुलसे हुएचेहरे प्रसूनों के ,घर -पते बदले हुए हैं मानसूनों के ,कहीं देखा गाछ...
चित्र-साभार गूगलएक प्रेमगीत-सात रंग का छाता बनकरसात रंग काछाता बनकरकड़ी धूप में तुम आती हो ।अलिखितमौसम के गीतों कोमीरा जैसा तुम गाती हो ।जब सारासंसार हमाराहाथ छोड़कर चल देता है,तपते हुएमाथ पर तेराहाथ बहुत सम्बल देता है,आँगन मेंचाँदनी रात में,चौरे पर दिया -बाती हो ।कभ...