ब्लॉगसेतु

 विशेष -प्रोफ़ेसर सदानन्दप्रसाद गुप्त कार्यकारी अध्यक्ष उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान आप सभी को प्रणाम करते हुए एक ग़ज़ल पोस्ट कर रहा हूँ |इस ग़ज़ल कुछ नामों की प्रशंसा भी है इसका स्पष्टीकरण भी दे रहा हूँ |जीवन के किसी मोड पर कुछ गुरू ,शुभचिंतक मिल जात...
 चित्र -साभार गूगल  एक ग़ज़ल-उड़ भी सकता हूँ मैं ,पानी पे भी चल सकता हूँसिद्ध हूँ ख़्वाब हक़ीकत में बदल सकता हूँकुछ भी मेरा हैं कहाँ, घर नहीं, असबाब नहींजब भी वो कह दे मैं घर छोड़ के चल सकता हूँपानियों पर, मुझे मन्दिर में, या घर में रख दोमैं तो मिट्टी का दिया ह...
 चित्र -साभार गूगल एक गीत -क्रांतिकारियों के बलिदानों को हम कैसे भूल गए क्रांतिकारियों के बलिदानों को हम कैसे भूल गए । उनकी गाथा फिर से लिक्खो जो फाँसी पर झूल गए। आज़ादी का मतलब केवल धरना और उपवास लिखे, भगत सिंह आज़ाद से नायक उन चश्मों को नहीं दिखे, लाठी...
  चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है तुम्हारा जन्म भारत भूमि पर अपवाद जैसा है कोई आज़ाद बतलाओ कि जो आज़ाद जैसा है शहीदों की कहानी हाशिए पर कौन लिखता था मेरे मानस पटल पर चित्र यह अवसाद जैसा है वो ऐसा भक्...
 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -रंग- पिचकारी लिए मौसम खड़ा ख़त 'बिहारी' लिख रहा होकर विकल ऐ मेरे 'जयसिंह 'मोहब्बत से निकल फिक्र है विद्वत सभा दरबार को कब तू छोड़ेगा नई रानी महल अब प्रजा का हाल वह कैसे सुने इत्र विस्तर पर बगीचे में कं...
 प्रभु श्रीरामएक गीत आस्था काराम तुम्हारे निर्वासन को दुनिया राम कथा कहती हैराम तुम्हारेनिर्वासन कोदुनिया रामकथा कहती है ।इसकी पीड़ासरयू जानेअश्रु लिए युग-युग बहती है ।राम तुम्हारीचरण पादुका कितनी पूजनीय हो जाती,जोगन वस्त्रपहनकर के भीमाँ सीता दुनिया को भात...
 चित्र -साभार गूगल आस्था और प्रेम के दोहे तम के आँगन को मिले पावन ज्योति अमन्द  केसर ,चन्दन शुभ लिखें घर -घर हो मकरंद हे मैहर की शारदा हे विन्ध्याचल धाम मेरी पावन आस्था करती रहे प्रणाम सरयू उठकर भोर में जपती सीताराम वंशी...
 चित्र -साभार गूगल एक ग़ज़ल -मढ़ेंगे किस तरह इस मुल्क की तस्वीर सोने में मढ़ेंगे किस तरह भारत की हम तस्वीर सोने में लगे हैं मुल्क के गद्दार सब जादू औ टोने में यहाँ हड़ताल और धरना भी प्रायोजित विदेशों से पड़ोसी मुल्क से आती है बिरयानी भगोने म...
 चित्र -साभार गूगल एक गीत -अबकी शाखों पर वसंत तुम अबकी शाखों पर वसंत तुम फूल नहीं रोटियाँ खिलाना |युगों -युगों से प्यासे होठों को अपना मकरंद पिलाना |धूसर मिट्टी की महिमा पर कालजयी कविताएं लिखना ,राजभवन जाने से पहले&...
चित्र -साभार गूगल संगम प्रयागराजएक आस्था का गीत -संगम/कुम्भमिलन हो दोबाराहमारा तुम्हारा ।ओ संगम की रेतीओ गंगा की धारा ।ये यमुना की लहरेंकिले की कहानी,यहाँ संत ,साधूयहाँ ब्रह्म ज्ञानी,ये भक्ति का रंगसारे रंगों से प्यारा ।यहाँ लेटे हनुमानकी वन्दना है,त्रिधारा से नदिय...