ब्लॉगसेतु

महिला क्रिकेट*जा विदेश में बोलिए,हिन्दी तब हो गर्व. क्या बोला सुन समझ लें,भारतीय हम सर्व.*चौको से यारी करो,छक्को से हो प्यार. शतक साथ डेटिग करो, मीताली सौ बार.*खेलो हर स्ट्रोक तुम, पीटो हँस हर गेंद.गेंदबाज भयभीत हो, लगा न पाए सेंध.*दस हजार...
 पोस्ट लेवल : cricket mahila क्रिकेट महिला
दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनित हर, कर दे बे-पीर।। *रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को। उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राच...
मुक्तिका *कल दिया था, आज लेता मैं सहारा चल रहा हूँ, नहीं अब तक तनिक हारा सांस जब तक, आस तब तक रहे बाकी जाऊँगा हँस, ईश ने जब भी पुकारा देह निर्बल पर सबल मन, हौसला है चल पड़ा हूँ, लक्ष्य भूलूँ? ना गवारा पाँव हैं कमजोर तो बल हाथ का ले...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका muktika
द्विपदी / दोहे*गौर गुरु! मीत की बातों पे करो दिल किसी का दुखाना ठीक नहीं*श्री वास्तव में हो वहीं, जहां रहे श्रम साथजीवन में ऊन्चा रखे श्रम ही हरदम माथ*खरे खरा व्यव्हार कर, लेते हैं मन जीतजो इन्सान न हो खरे, उनसे करें न प्रीत.*गौर करें मन में नहीं, 'सलिल' तनिक...
 पोस्ट लेवल : dwipadi/dohe द्विपदी / दोहे
सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...
हास्य सलिला:यादसंजीव 'सलिल'*कालू से लालू कहें, 'दोस्त! हुआ हैरान.घरवाली धमका रही, रोज खा रही जान.पीना-खाना छोड़ दो, वरना दूँगी छोड़.जाऊंगी मैं मायके, रिश्ता तुमसे तोड़'कालू बोला: 'यार! हो, किस्मतवाले खूब.पिया करोगे याद में, भाभी जी की डूब..बहुत भली हैं जा रहीं, कर तुम...
 पोस्ट लेवल : hasya kvita हास्य याद
छंद सलिलाआर्द्रा छंदसंजीव*द्विपदीय, चतुश्चरणी, मात्रिक आर्द्रा छंद के दोनों पदों पदों में समान २२-२२ वर्ण तथा ३५-३५ मात्राएँ होती हैं. प्रथम पद के २ चरण उपेन्द्र वज्रा-इंद्र वज्रा (जगण तगण तगण २ गुरु-तगण तगण जगण २ गुरु = १७ + १८ = ३५ मात्राएँ) तथा द्वितीय पद के २ च...
 पोस्ट लेवल : आर्द्रा छंद aardra chhand
त्रिभंगी सलिला:हम हैं अभियंतासंजीव*(छंद विधान: १० ८ ८ ६ = ३२ x ४)*हम हैं अभियंता नीति नियंता, अपना देश सँवारेंगेहर संकट हर हर मंज़िल वर, सबका भाग्य निखारेंगेपथ की बाधाएँ दूर हटाएँ, खुद को सब पर वारेंगेभारत माँ पावन जन मन भावन, श्रम-सीकर चरण पखारेंगे*अभियंता मिलकर आग...
हरिगीतिका सलिलासंजीव*(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर)*कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकीबढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रिकीउगती रहे, पलती रहे, खिलती रहे, अभियांत्रि...
 पोस्ट लेवल : हरिगीतिका छंद harigitika chhand
गीत:ज्ञान सुरा पी.…संजीव*ज्ञान सुरा पी बहकें ज्ञानी,श्रेष्ठ कहें खुद को अभिमानी।निज मत थोप रहे औरों पर-सत्य सुनें तो मरती नानी…*हाँ में हाँ चमचे करते हैं,ना पर मिल टूटे पड़ते हैं.समाधान स्वीकार नहीं है-सद्भावों को चुभ-गड़ते हैं.खुद का खुद जयकारा बोलेंकलह करेंगे मन मे...
 पोस्ट लेवल : geet गीत