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छंद सलिलारूपमाला२४ मात्रिक अवतारी जातीय छंद *पदभार २४, यति १४-१०, पदांत गुरु लघु।विविध गणों का प्रयोग कर कई मापनियाँ बनाई जा सकती हैं। उदाहरण१ रूपमाला फेरता ले, भूप जैसा भाग।राग से अनुराग करता, भोग दाहक आग।।त्यागता वैराग हँसकर, जगत पूजे किंतु-त्याग द...
मुक्तक: अधरों पर मुस्कान, आँख में चमक रहे मन में दृढ़ विश्वास, ज़िन्दगी दमक कहे बाधा से संकल्प कहो कब हारा है?आओ! जीतो, यह संसार तुम्हारा है*नवगीत: जितनी रोटी खायी की क्या उतनी मेहनत?. मंत्री, सांसद मान्य विधायक प्राध्यापक जो बने नियामक अफसर, जज, डॉक्टर, अभियंता जनस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत मुक्तक
एक हाइकु-बहा पसीना चमक उठी देह जैसे नगीना।*त्वरित कविता*दागी है कुलदीप, बुझा दो श्रीराधे आगी झट से उसे लगा दो श्रीराधे रक्षा करिए कलियों की माँ काँटों सेमाँगी मन्नत शांति दिला दो श्रीराधे*संजीव९४२५१८३२४४ १६-१२-२०१९http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : हाइकु
 दोहा मुक्तिकासंजीव * दोहा दर्पण में दिखे, साधो सच्चा रूप। पक्षपात करता नहीं, भिक्षुक हो या भूप।।*सार-सार को गह रखो, थोथा देना फेंक। मनुज स्वभाव सदा रखो, जैसे रखता सूप।।*प्यासा दर पर देखकर, द्वार न करना बंद। जल देने से कब करे, मना बताएँ कूप।। *बिसरा गौतम-सीख...
गीत: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*दरिंदों से मनुजता को जूझना है . सुर-असुर संघर्ष अब भी हो रहा है पा रहा संसार कुछ, कुछ खो रहा हैमज़हबी जुनून पागलपन बना है ढँक गया है सूर्य, कोहरा भी घना है आत्मघाती सवालों को बूझना है .नहीं अपना या पराया दर्द होता कहीं भी हो, किसी...
 पोस्ट लेवल : गीत
दोहा दोहा पालक :आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*पलकर पल भर भूल मत, पालक का अहसान। गंध हीन कटु स्वाद पर, पालक गुण की खान।।*पालक दृढ़ता से करे, शिशु-पालन दिन-रैन। पालक से लोहा मिले, पाचक देती चैन।। *पालक पालन कर कभी, कहे न कर आभार।पालक पोषण कर कहे, रखो संतुलित भार।।*पालक से...
 पोस्ट लेवल : दोहा पालक पालक दोहा
भावांजलिबहुमुखी प्रतिभा की धनी डॉक्टर इला घोषडॉ. साधना वर्मा*[लेखक: डॉ. साधना वर्मा, प्राध्यापक अर्थशास्त्र विभाग, शासकीय मानकुँवर बाई कला वाणिज्य स्वशासी महिला महाविद्यालय जबलपुर। ]*मस्तिष्क में सहेजी पुरानी यादें किताब के पृष्ठों पर टंकित कहानियों की तरह होती हैं...
कृति चर्चा: जिजीविषा : पठनीय कहानी संग्रह चर्चाकार: आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' *[कृति विवरण: जिजीविषा, कहानी संग्रह, डॉ. सुमनलता श्रीवास्तव, द्वितीय संस्करण वर्ष २०१५, पृष्ठ ८०, १५०/-, आकार डिमाई, आवरण पेपरबैक जेकट्युक्त, बहुरंगी, प्रकाशक त्रिवेणी परि...
गीत तुम्हें प्रणाम *मेरे पुरखों! तुम्हें प्रणाम। *सूक्ष्म काय थे,भार गहा फिर,अणु-परमाणु , विष्णु-विषाणु धारे तुमने। कोष-वृद्धि कर 'श्री' पाई है। जल-थल--नभ पर कीर्ति-पताका फहराई है। पंचतत्व तुमनाम अनाम। मेरे पुरखों! तुम्हें प्रणाम। *भू-नभ दिग्दिगंत यश गाते। भूत-अभूत...
 पोस्ट लेवल : गीत तुम्हें प्रणाम
 माँ को अर्पित चौपदेबारिश में आँचल को छतरी, बना बचाती थी मुझको माँ जाड़े में दुबका गोदी में, मुझे सुलाती थी गाकर माँ गर्मी में आँचल का पंखा, झलती कहती नयी कहानी-मेरी गलती छिपा पिता से, बिसराती थी मुस्काकर माँ मंजन स्नान आरती थी माँ, ब्यारी दूध कलेवा थी माँखेल-...
 पोस्ट लेवल : चौपदे माँ