ब्लॉगसेतु

नवगीत: पत्थरों की फाड़कर छाती उगे अंकुर. चीथड़े तन पर लपेटेखोजते बाँहें कोई आकर समेटे। खड़े हो गिर-उठ सम्हलतेसिसकते चुप हो विहँसते।अंधड़ों की चुनौती स्वीकार पल्लव लिये अनगिन जकड़कर जड़ में तनिक माटी बढ़े अंकुर।. आँख से आँखें मिलाते बनाते राहें नये सपने सजाते। जवाबों से प्...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
नवगीत : कैंसर!मत प्रीत पालो . अभी तो हमने बिताया साल भर था साथसच कहूँ पूरी तरह छूटा ही नहीं है हाथ कर रहा सत्कार अब भी यथोचित मैं और तुम बैताल से फिर आ लदे हो काँध अरे भाई! पिंड तो छोड़ो चदरिया निज सम्हालो . मत बनो आतंक के पर्याय प्यारे!बनो तो आतंकियों के जाओ द्वारे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत कैंसर
विश्ववाणी हिंदी संस्थान जबलपुर : दिल्ली ईकाई व्यवस्थापक -  अंजू खरबंदा  ११-१२--२०२०, अपराह्न १४.२०  काव्य रचना संगोष्ठी : विषय - अभिलाषासंचालक - सदानंद कवीश्वर *त्वरित प्रतिक्रिया :१. निशि शर्मा 'जिज्ञासु'अभिलाषा जिज्ञासु रहे, निशि-दिन...
मुक्तिका * भय की नाम-पट्टिका पर, लिख दें साहस का नामकोशिश कभी न हारेगी, बाधा को दें पैगाम*राम-राम कह बिदराएँ, जप राम-राम भव पार लूटें-झपटें पा प्रसाद, हँस भक्त करें आराम *लेख समय का अजब गजब, है इंसानों की जात जाम खा रहे; पीते भी, करते...
 पोस्ट लेवल : मुक्तिका
सामयिक गीत खाट खड़ी है *बड़े-बड़ों की खाट खड़ी है मोल बढ़ गया है छोटों का. हल्ला-गुल्ला,शोर-शराबा है बिन पेंदी के लोटों का. *नकली नोट छपे थे जितने पल भर में बेकार हो गए.आम आदमी को डँसने से पहले विषधर क्षार हो गए. ऐसी हवा चली है यारो!उतर गया है मुँह खोटों काबड़े-बड़ों की ख...
 पोस्ट लेवल : सामयिक गीत
नवगीत: संजीव *लेटा हूँमखमल गादी परलेकिन नींद नहीं आती है .इस करवट में पड़े दिखाई कमसिन बर्तनवाली बाई देह साँवरी नयन कटीले अभी न हो पाई कुड़माई मलते-मलते बर्तन खनके चूड़ी जाने क्या गाती हैमुझ जैसे लक्ष्मी पुत्र को बना भिखारी वह जाती है . उस करवट ने साफ़-सफाई करनेवा...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
[12/12, 06:45] आचार्य संजीव वर्मा "सलिल": मुक्तक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*कुंज में पाखी कलरव करते हैंगीत-गगन में नित उड़ान नव भरते हैंस्नेह सलिल में अवगाहन कर हाथ मिला-भाव-नर्मदा नहा तारते तरते हैं*मनोरमा है हिंदी भावी जगवाणीसुशोभिता मम उर में शारद कल्याणीलिप...
 पोस्ट लेवल : मुक्तक
krishnotsavmagzine20@gmail.com आलेख :द्वापरकालीन सामाजिक व्यवस्था और कृष्ण आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' *उत्तर वैदिक काल के अंत से लेकर बुध्द काल को द्वापर या महाभारत काल कहा जाता है। इस काल में समाज का आधार संयुक्त परिवार था। परिवारों के समूह ग्राम थे...
कुछ वर्णिक छंद अठ अक्षरी छंद विद्युन्माला छंद  *गणसूत्र - म म ग ग , कलबाँट - २२२ २२२ २२ उदाहरण -१. राणा को घेरे में देखा     झाला ने होनी को लेखा      आगे आ पागा ले धारा     राणा पे प्र...
 ध्वनि और भाषा :सृष्टि की उत्पत्ति नाद अथवा ध्वनि से, सूर्य से नि:सृत ध्वनि तरंगों का रेखांकन कर उसे ॐ के आकार का, व्याकरण और पिंगल का विकास गीति काव्य में छंद-गणित के समुच्चय सिद्धांत (सेट थ्योरी) तथा क्रमचय और समुच्चय (परमुटेशन-कॉम्बिनेशन) का प्रयो...