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मात्रा रस्व/दीर्घ/प्लुत उच्चार संस्कृत की अधिकतर सुप्रसिद्ध रचनाएँ पद्यमय है अर्थात् छंदबद्ध और गेय हैं । इस लिए यह समज लेना आवश्यक है कि इन रचनाओं को पढते या बोलते वक्त किन अक्षरों या वर्णों पर ज़ादा भार देना और किन पर कम । उच्चारण की इस न्यूनाधिकता को “मात्रा” द्...
विसर्गजैसे आगे बताया गया है, विसर्ग यह अपने आप में कोई अलग वर्ण नहीं है; वह केवल स्वराश्रित है । विसर्ग का उच्चार विशिष्ट होने से उसे पूर्णतया शुद्ध लिखा नहीं जा सकता, क्यों कि विसर्ग अपने आप में हि किसी उच्चार का प्रतिक मात्र है ! किसी भाषातज्ज्ञ के द्वारा उसे प्र...
संन्धि सामान्य संधि नियम जैसे कि पहले बताया गया है, संस्कृत में व्यंजन और स्वर के योग से ही अक्षर बनते हैं । संधि के विशेष नियम हम आगे देखेंगे, पर उसका सामान्य नियम यह है कि संस्कृत में व्यंजन और स्वर आमने सामने आते ही वे जुड जाते हैं;पुष्पम् आनयति = पुष्पमानयतिशीघ...
वर्णमालासंस्कृत में हर अक्षर, स्वर और व्यंजन के संयोग से बनता है, जैसे कि “क” याने क् (हलन्त) अधिक अ । “स्वर” सूर/लय सूचक है, और “व्यंजन” शृंगार सूचक । संस्कृत वर्णॅ-माला में 13 स्वर, 33 व्यंजन और 2 स्वराश्रित ऐसे कुल मिलाकर के 49 वर्ण हैं । स्वर को ‘अच्’ और ब्यंजन...
 एकन्यूनेन पूर्वेन विधि (Eknunen Purven method)           इस विधि का उपयोग 9,  99, 999,................................ आदि संख्यों का वर्ग निकालने के लिए किया जाता है।ऊपर दी गई संख्यों का वर्ग निकालने के सबसे पहले बायी...
भौगोलिक स्थिति 21° 6 ' उत्तरी अक्षांश से 26° 54 ' उत्तरी अक्षांश तथा 74° पूर्वी देशांतर से 82° 47' पूर्वी देशांतर तक है।लंबाई पूर्व से पश्चिम 870 km तथा चौड़ाई उत्तर से दक्षिण 605 km तथा क्षेत्रफल 308,245 हजार वर्ग km, भारत के क्षेत्रफल का 9.38%, तथा  क्ष...
वैदिक सभ्यता                                          &...
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