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पलाश की डालियों पर                         सज गए हो तुमदहक रहे होपूरे जंगल मेंमुझे पता हैकोई आये न आयेतुम ज़रूर आओगेसब कुछ बदल जायेगापर तुम न बदलोगेबने रहोगे तुमजस के तसआओ तुम्हारास्वागत है वसंत ...आप...
 पोस्ट लेवल : पलाश वसंत जंगल
धरती माँ ने सहीअसह्य वेदनाजन्मा कोरोनाकभी रफ़्तार होती थीमायने ज़िंदगी कीथम गई दुनियाएक ही पल मेंधरा ने खोल दियाअपने घर का झरोखाआसमान साफ़ कियाआँगन बुहाराकुछ परिंदे उड़ा दिएकुछ सहेज लिये जल पवित्र किया नदियाँ जी उठीं  हवा शुद्ध कीअल्प साधनों में...
आँचल उड़ा नभ से बादल गिराआह छन गईप्रीत बन गईभावनाएं गहराईअबीर बन गईगीत बरसेस्वर झनझनाने लगेबिन बाती बिन तेलदीप जगमगाने लगे...जब तेरा साथ हैमन में विश्वास हैमेरे गीतों कोतेरा आधार हैतेरे बिन जीवननिराधार हैजैसे पराग फूलों काश्रृंगार है....    &nbsp...
 पोस्ट लेवल : कुछ मन ने कहा
रंग-अबीर-गुलाल उड़ाती ढोल-नगाड़े-चंग बजातीफिरती मस्तों की टोली है होली है भई होली हैकहीं फाग, कहीं पर रसिया सबकी प्यारी बोली है भंग-रंग के मद में ग...
‘सपने’ सिर्फ़ कहानी नही, यह तो एक... सफ़र है – ज़िंदगी का सफ़र। जहाँ आँखें सपने देखती हैं, उनमे से कुछ पूरे होते हैं तो कुछ अधूरे रह जाते हैं।जैसे सपनों के पूरे होने पर ज़िन्दगी चलती रहती है, वैसे ही उनके टूटने पर थमती नहीं। वक़्त  और परिस्थितियां इस अधूरेपन क...
करवा चौथमैं यह व्रत करती हूँअपनी ख़ुशी सेबिना किसी पूर्वाग्रह केकरती हूँ अपनी इच्छा सेअन्न जल त्यागक्योंकि मेरे लिएयह रिश्ता ....इनसे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैमेरे लिए यह उत्सव जीवन मेंउस अहसास की ख़ुशी व्यक्त करता हैकि उस ख़ास व्यक्ति के लिएमैं भी उतनी ही ख़ास हूँमैं उल...
 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
नव पल्लव झूम उठते हैं , डालियाँ बल खाने लगती हैं। दादुर , मोर , पपीहे सरगम छेड़ने लगते हैं तो लोकजीवन भला कैसे पीछे रह जाये।  क्यों न वह भी झूमे-नाचे और गाये। इसी मनभावन सावन के मौसम में मल्हार और झूलों के पींगों से रंग जाता है जन जीवन। निभाई जाती हैं परम्पराएँ...
तुम्हारी कविता मेंखुश्बू है, फूल हैंपत्तियां, टहनी भीएक माली है जो करीने से संवारता हैशब्दों के नन्हे पौधेदेता है भावों की खादउखाड़ फेंकता हैअनचाहे विचारों कीखरपतवार...निदाई, गुड़ाई करता हैताकि पनप सकेंउम्मीदों की लतायेंऔर रखवाली भी करता हैकि कभी कोई तोड़ न लेअधख...
ईश्वर ने हमें सुंदर धरती प्रदान की। हमारे पूर्वजों ने इसे सहेजा हमारे लिए। धरती को माँ का सम्मान दिया, प्रकृति को हर रूप में पूजा, वृक्षों को, नदियों को यहाँ तक की पशु पक्षियों को त्योहारों, पर्वों से जोड़कर यही सीख देने का प्रयास किया।लेकिन हमने आधुनिकता की होड़ में...