ब्लॉगसेतु

करवा चौथमैं यह व्रत करती हूँअपनी ख़ुशी सेबिना किसी पूर्वाग्रह केकरती हूँ अपनी इच्छा सेअन्न जल त्यागक्योंकि मेरे लिएयह रिश्ता ....इनसे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हैमेरे लिए यह उत्सव जीवन मेंउस अहसास की ख़ुशी व्यक्त करता हैकि उस ख़ास व्यक्ति के लिएमैं भी उतनी ही ख़ास हूँमैं उल...
 ख़यालों के पंख लगाकरख़्वाबों की उड़ान भरकरकितनी भी दूर क्यों न चली जाएलेकिन लौट आती है "मेरी नज़्म"उतर आती है ज़मी परमेरे साथ नंगे पाँव घूमती हैपत्ता-पत्ता, डाल-डाल, बूटा -बूटाइसलिए तो तरोताज़ा रहती हैजब कभी यादों के सात समंदर पार करकेथककर निढाल हो जाती हैतो बैठ जा...
नव पल्लव झूम उठते हैं , डालियाँ बल खाने लगती हैं। दादुर , मोर , पपीहे सरगम छेड़ने लगते हैं तो लोकजीवन भला कैसे पीछे रह जाये।  क्यों न वह भी झूमे-नाचे और गाये। इसी मनभावन सावन के मौसम में मल्हार और झूलों के पींगों से रंग जाता है जन जीवन। निभाई जाती हैं परम्पराएँ...
तुम्हारी कविता मेंखुश्बू है, फूल हैंपत्तियां, टहनी भीएक माली है जो करीने से संवारता हैशब्दों के नन्हे पौधेदेता है भावों की खादउखाड़ फेंकता हैअनचाहे विचारों कीखरपतवार...निदाई, गुड़ाई करता हैताकि पनप सकेंउम्मीदों की लतायेंऔर रखवाली भी करता हैकि कभी कोई तोड़ न लेअधख...
ईश्वर ने हमें सुंदर धरती प्रदान की। हमारे पूर्वजों ने इसे सहेजा हमारे लिए। धरती को माँ का सम्मान दिया, प्रकृति को हर रूप में पूजा, वृक्षों को, नदियों को यहाँ तक की पशु पक्षियों को त्योहारों, पर्वों से जोड़कर यही सीख देने का प्रयास किया।लेकिन हमने आधुनिकता की होड़ में...
स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर आप सभी को बहुत - बहुत बधाई व शुभकामनाएं। जय हिंद! वन्दे मातरम् ....इस मंगलमय पुनीत वेला मेंआओ एक संकल्प करेंअनाचार कुविचार परपूरे मन से नियंत्रण करेंअपने अपने दायित्वों कानिष्ठा पूर्वक निर्वाह करेंनिज संस्कृति को अपनाकरसुसंस्कारित समा...
गौरैया बिटिया एक समानदोनों घर- आँगन की शानआँगन में कुछ दाने रखनाएक दिए में पानी रखनातिनकों की निगरानी रखनाअपनी कोई निशानी रखनायाद मेरी कहानी रखना.....(आऊँगी चिड़िया बनकर)
"सेल्फी मैंने ले ली आज, सेल्फी मैंने ले ली आज" ढिंचैक पूजा के इस वाहियात गर्दभगान से आज के युवाओं की मानसिकता का पता चलता है कि स्वचित्र के प्रति अनुराग किस जानलेवा स्तर तक बढ़ गया है। पिकनिक स्पॉट, समंदर की लहरें, ऊंची चट्टानें, नदी की जलधारा, चलती ट्रेन जैसी...
आदिकाल से ही नदियों के साथ मनुष्य का एक भावनात्मक रिश्ता रहा है, लेकिन हमारे देश भारत में इन्सान का जो रिश्ता नदियों के साथ रहा है, उसकी मिसाल शायद ही किसी दूसरी सभ्यता में देखने को मिले। नदियों के साथ भारत के लोगों का रिश्ता जितना भावनात्मक है, उससे कहीं ज्यादा आध...
ओ गौरैया !अब लौट आओबदल गया है इंसानप्रकृति प्रेमी हो गया हैआकर देखो तो ज़राइसके कमरे की दीवारेंभरी पड़ी है तुम्हारे चित्र सेऐसे चित्रजिनमें तुम हो,तुम्हारा नीड़ है,तुम्हारे बच्चे हैसीख ली है इसनेतुम्हारी नाराज़गी सेसर आँखों पर बिठाएगातिनका- तिनका संभालेगाओ गौरैया !आ भ...
 पोस्ट लेवल : आँगन घर गौरैया