ब्लॉगसेतु

आग लगाई संस्कारों में सारी शिक्षा भुला गुरु कीदाढ़ी तिलक लगाये देखो  महिमा गाते हैं,रावण की !डर की खेती करते,जीते नफरत फैला,निर्मम गीत !करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !खद्दर पहने नेतागण सबलेके चलते , भूखे खप्पर,इन पर श्रद्धा कर के बैठेजान...
कलियों ने अक्सर बेचारेभौंरे  को बदनाम किया !खूब खेल खेले थे फिर भी  मौका पा अपमान किया !किसने शोषण किया अकेले, किसने फुसलाये थे गीत !किसको बोलें,कौन सुनेगा,कहाँ से हिम्मत लाएं गीत !अक्सर भोली ही कहलायेये सजधज कर रहने वाली !मगर मनोहर सुंदरता...
हम तो केवल हंसना चाहें सबको ही, अपनाना चाहें मुट्ठी भर जीवन  पाए  हैं हंसकर इसे बिताना चाहें खंड खंड संसार बंटा है , सबके अपने अपने गीत ।  देश नियम,निषेध बंधन में,क्यों बांधा जाए संगीत ।  नदियाँ,झीलें,जंगल,पर्वतहमने...
अक्सर अपने ही कामों से हम अपनी पहचान कराते नस्लें अपने खानदान की आते जाते खुद कह जाते ! चेहरे पर मुस्कान, ह्रदय से गाली देते, अक्सर मीत !कौन किसे सम्मानित करता,खूब जानते मेरे गीत !सरस्वती को ठोकर मारें ये कमज़ोर लेखनी वाले !डमरू ब...
कौन हवन को पूरा करनेकमल, अष्टदल लाएगा ?अक्षत पुष्प हाथ में लेकरकौन साथ में  गायेगा  ?यज्ञ अग्नि में समिधा देने,कहीं से आयें मेरे मीत !पद्मनाभ की, स्तुति करते ,आहुति देते मेरे गीत !तुम्हें देखकर ही लिखने को सबसे पहले कलम उठायी !तुम्हें देखकर ही पहले द...
किसी कवि की रचना देखें,दर्द छलकता,  दिखता है  !प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,शोक हर जगह मिलता है !क्या शिक्षा विद्वानों को दें ,रचनाओं  में, रोते गीत !निज रचनाएं,दर्पण मन की, दर्द समझते, मेरे गीत ! अपना दर्द किसे दिखलाते ?सब हंसकर आनंद उठाते !दर्द,...
क्या खोया क्या पाया हमने ,क्या छीना , इन नन्हों से !क्यों न आज हम खुद से पूंछेक्या पाया,  इन  राहों  से !बचपन की मुरझाई आँखें, खूब रुलाये , हँसते  गीत !देख सको तो, आँखें देखें ,अपने शिशु की, मेरे मीत !अहम् हमारे ने,हमको तोशक्ति दिलाई , जीने में...
जब भी कभी घोंसला नोचा,अपने ही घर  वालों   ने  !तब तब आश्रय दिया मुझेकुछ, हंसों के दरवाजे ने  !चूजों  तक ने सेवा की थी,जब मुरझाये थे ये गीत !कभी न, वे दिन भुला सकेंगे, आभारी हैं मेरे गीत ! याद खूब अपमान, अश्रु काजिसे देख,कुछ लोग हँसे थे...
कितने लोग मिले जीवन मेंजिनके पैर पड़े थे, छाले !रोते थे हिचकी, ले लेकरउनको घर में दिए सहारे !प्यार और अहसान न माने,बड़े लालची थे, वे मीत !घायल हो हो  कर पहचानें ,गद्दारों को, मेरे गीत !चंद दिनों में दौलत पाकरडींग  मारते , भड़क  रहे !चंद तालियों को सु...
पता नहीं,कुल साँसे अपनीहम  खरीद  कर , लाये हैं !कल का सूरज नहीं दिखेगाआज  समझ , ना  पाए हैं !भरी वेदना, मन में लेकर , कैसे समझ  सकेंगे   प्रीत  ?मूरखमन फिर चैन न पाए,जीवन भर अकुलायें गीत ! जीवन की कुछ भूलें ऐसी ,याद , आज &nbs...