ब्लॉगसेतु

कैसा मिला है साथशीतल उष्ण मिल गएजैसे तुम और हमचक्र घूम कर बता रहाकभी खुशी या गमजो पिघला वह ठोस हुआजीवन अनबुझ राजपतझर की लीला बड़ीबजा बसन्त का साजसूर्य बिना वह कुछ नहींचँदा का मन जान रहाकहाँ तपन घट जाएगीसूरज को भी भान रहाएक दूजे बिन हैं अधूरेपर मिलन की राह नहींअवनी अ...
 पोस्ट लेवल : कविता सभी रचनाएँ
"अस्तित्व"दिल की धड़कन बन्द होती सी महसूस हो रही थी। मैंने झटपट मशीन निकाली और कलाई पर लगाया। नब्ज रेट वाकई कम था। "ओह, क्या तुम मुझे कुछ दिनों की मोहलत दे सकती हो प्रिय", मैंने डूबते स्वर में उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।"तुम्हारे पास समय की कमी नहीं थी। पर अब ऐसा क्या ह...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
सोरठे - हिन्दी पखवारा विशेष छंदमेरा हिन्दुस्तान, जग में बहुत महान है।हिन्दी इसकी जान, मिठास ही पहचान है।।व्यक्त हुए हैं भाव, देवनागरी में मधुर।होता खास जुड़ाव, कविता जब सज कर मिली।।कोमलता से पूर्ण, अपनी हिन्दी है भली।छोटे बड़े अपूर्ण, ऐसे तो न भेद करे।।होता है व्याया...
गीत जाना जीवन पथ पर चलकरलगता नया नया हर पल हैधरती पर आँखें जब खोलींनया लगा माँ का आलिंगननयी हवा में नयी धूप मेंनये नये रिश्तों का बंधनशुभ्र गगन में श्वेत चन्द्रमालगता बालक सा निश्छल हैनया लगा फूलों का खिलनालगा नया उनका झर जानामौसम की आवाजाही मेंफिर से बगिया का भर ज...
 पोस्ट लेवल : गीत सभी रचनाएँ
सबको राह दिखाने वालेहे सूर्य! तुझको नमननित्य भोर नारंगी धारआसमान पर छा जातेखग मृग दृग को सोहेऐसा रूप दिखा जातेआरती मन्त्र ध्वनि गूँजेतम का हो जाता शमनहर मौसम की बात अलगशरद शीतल और जेठ प्रचंडभिन्न भिन्न हैं ताप तुम्हारेपर सृष्टि में रहे अखंडउज्ज्वलता के घेरे मेंनिरा...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
सोरठेस्वप्न हुए साकार, जब कर्म की राह चले।गंगा आईं द्वार, उनको भागीरथ मिले ।।1नारी का शृंगार, बिन्दी पायल चूड़ियाँ।पहन स्वप्न का हार, नभ मुठ्ठी में भर चलीं।।2नन्हें नन्हें ख़्वाब, नन्हों के मन में खिले।बोझिल हुए किताब, ज्यों ज्यों वे वजनी हुए।।3लिए हाथ में हाथ, पथिक...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा
धुँधली आँखचारो तरफ ॐ कृष्णाय नमः की भक्तिमय धूम मची हुई थी। देवलोक में बैठे कृष्ण इस कोशिश में लगे थे कि किसी की पुकार अनसुनी न रह जाये। कृष्ण के बगल में बैठे सुदामा मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।" रहस्यमयी मुस्कान तो हमारे अधरों पर विराजमान रहती है मित्र, आज आपने क्यों...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
अपनी अपनी नौकरीसरकार की ओर से जमींदारी प्रथा खत्म हो चुकी थी।फिर भी लोकेश बाबू जमींदार साहब ही कहलाते थे।उनके सात बेटे शहर में रहकर पढ़ाई करते और लोकेश बाबू मीलों तक फैले खेत की देखरेख और व्यवस्था में लगे रहते। धीरे धीरे सातों बेटे ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और पदाधि...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
सोरठाहर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन।।1प्रातःकाल की वायु , ऊर्जा भर देती नई।बढ़ जाती है आयु, मिट जाती है व्याधियाँ।।2छाता जब जब मेह, श्यामवर्ण होता गगन।भरकर अनगिन नेह, पवन उसे लेकर चला।।3शीतल मंद समीर, तन को लगता है भला।बढ़ी कौन सी प...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा सभी रचनाएँ
सबकी अपनी राम कहानी=================जितने जन उतनी ही बानीसबकी अपनी राम कहानीऊपर ऊपर हँसी खिली हैअंदर में मायूस गली हैकिसको बोले कैसे बोले अँखियों में अपनापन तोलेपाकर के बोली प्रेम भरीआँखों में भर जाता पानीमन का मौसम बड़ा निरालापतझर में रहता मतवालादिखे चाँदनी कड़ी धूप...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ