ब्लॉगसेतु

सबकी अपनी राम कहानी=================जितने जन उतनी ही बानीसबकी अपनी राम कहानीऊपर ऊपर हँसी खिली हैअंदर में मायूस गली हैकिसको बोले कैसे बोले अँखियों में अपनापन तोलेपाकर के बोली प्रेम भरीआँखों में भर जाता पानीमन का मौसम बड़ा निरालापतझर में रहता मतवालादिखे चाँदनी कड़ी धूप...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
फेसबुक पर एक समूह में पत्र लेखन प्रतियोगिता थी|62 प्रविष्टियों में...अच्छे पत्रों में हमारे पत्र को भी रखा गया इसके लिए खुश हूँ
 पोस्ट लेवल : कहानी सभी रचनाएँ
विधा- ललित छंद (सार छंद)... 16-12 पर यति अंत में वाचिक भार 22, कुल चार चरण, दो-दो चरण में तुकांत अनिवार्य है. नेह-सिक्त निर्मल धारा से , मिलती कंचन काया | अम्बर जैसा प्यार पिता का, शीतल माँ का साया || जाने कितने दुख सुख सहकर, तिनका तिनका जोड़े| ऊँची शिक्षा की खातिर...
 पोस्ट लेवल : ललित छंद छंद
ग्रीष्म ऋतु ============ ग्रीष्म की दुपहरिया कोयल की कूक से टूट गयी काँच सी छत पर के पँखेसर्र सर्र नाच रहेहाथों में प्रेमचंदनैंनों से बाँच रहेनिर्मला की हिचकियाँ दिल में हैं खाँच सी कोलतार पर खड़े झुंड हैं मजूरों के द्वार पर नाच रहे बानर जमूरों के लू की बड़ी तपन खस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत मौसम
मनोरम छंदमापनी-2122.2122***************************गीतिका पदांत - देनासमांत- आर***************************जिन्दगी को सार देनानेह को विस्तार देनाफूल की चाहत सभी कोशूल को भी प्यार देनाराह में फिसलन बहुत हैचाल को आधार देनास्वप्न होते अनगढ़े सेकर्म से आकार देनाबोल मीठे...
 पोस्ट लेवल : प्रेरणात्मक छंद
नलिन की वापसी    सुपर फ़ास्ट ट्रेन तीव्र गति से अपने गंतव्य की ओर बढ़ती जा रही थी| जनरल डब्बे की निचली बर्थ पर खिड़की के पास बैठी सुमेधा पवन के शीतल झोंकों का आनन्द ले रही थी| मन के भीतर की खुशियाँ चेहरे पर झलक रही थीं, कभी एक उदासी भी झलक जा रही थी| वह अ...
 पोस्ट लेवल : कहानी
मल्लिका छंद 21 21 21 21....(212 121 21)1दूब से मिलें गणेश।प्रेम ने किया प्रवेश।।दान मान ज्ञान संग।श्वाँस श्वाँस मे उमंग।।2है जिया उदास आज।वीतराग छेड़ साज।।मंद मंद है समीर।क्यों पपीहरा अधीर?।।3सिंधु में हजार सीप।पास एक आस दीप।।हाथ मे लिए गुलाब।छंद की नई किताब।।--ऋता...
 पोस्ट लेवल : छंद
लघुकथा-पितृदिवस पर आप अच्छे हो "निभा, कहाँ है हमारी लाडली बिटिया। देखो!हम तुम्हारे लिए क्या लाये हैं।" घर में घुसते ही नीलेश ने बड़े प्यार से तेज आवाज़ में कहा । सामने विभा खड़ी थी। उसने इशारे से बताया कि निभा अपने कमरे में है। आज दोपहर में निभा का बारहवीं के रिज...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
कल माँ पर लिखा...आज एक माँ लिखेगी ।हम उनके दिलों में रहते हैंइसको वे कहते नहींउनके काम बताते हैंलेखनी थामी जब हाथों मेंवे ब्लॉग बनाकर खड़े रहेममा को तुक की कमी न होशब्दों के व्यूह में पड़े रहेshabdvyuh.comहम उनके दिलों में रहते हैंइसको वे कहते नहींउनके काम बताते हैंज...
 पोस्ट लेवल : कविता दिवस सभी रचनाएँ
अभिनंदन राम काभारत की माटी ढूँढ रहीअपना प्यारा रघुनंदनभारी भरकम बस्तों मेंदुधिया किलकारी खोई होड़ बढ़ी आगे बढ़ने कीलोरी भी थक कर सोईमहक उठे मन का आँगनबिखरा दो केसर चंदनवर्जनाओं की झूठी बेड़ीललनाएँ अब तोड़ रहींअहिल्या होना मंजूर नहींरेख नियति की मोड़ रहींविकल हुई मधुबन की...