ब्लॉगसेतु

धुँधली आँखचारो तरफ ॐ कृष्णाय नमः की भक्तिमय धूम मची हुई थी। देवलोक में बैठे कृष्ण इस कोशिश में लगे थे कि किसी की पुकार अनसुनी न रह जाये। कृष्ण के बगल में बैठे सुदामा मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।" रहस्यमयी मुस्कान तो हमारे अधरों पर विराजमान रहती है मित्र, आज आपने क्यों...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
अपनी अपनी नौकरीसरकार की ओर से जमींदारी प्रथा खत्म हो चुकी थी।फिर भी लोकेश बाबू जमींदार साहब ही कहलाते थे।उनके सात बेटे शहर में रहकर पढ़ाई करते और लोकेश बाबू मीलों तक फैले खेत की देखरेख और व्यवस्था में लगे रहते। धीरे धीरे सातों बेटे ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और पदाधि...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
सोरठाहर पूजन के बाद, जलता है पावन हवन।खुशबू से आबाद,खुशी बाँटता है पवन।।1प्रातःकाल की वायु , ऊर्जा भर देती नई।बढ़ जाती है आयु, मिट जाती है व्याधियाँ।।2छाता जब जब मेह, श्यामवर्ण होता गगन।भरकर अनगिन नेह, पवन उसे लेकर चला।।3शीतल मंद समीर, तन को लगता है भला।बढ़ी कौन सी प...
 पोस्ट लेवल : छंद सोरठा सभी रचनाएँ
सबकी अपनी राम कहानी=================जितने जन उतनी ही बानीसबकी अपनी राम कहानीऊपर ऊपर हँसी खिली हैअंदर में मायूस गली हैकिसको बोले कैसे बोले अँखियों में अपनापन तोलेपाकर के बोली प्रेम भरीआँखों में भर जाता पानीमन का मौसम बड़ा निरालापतझर में रहता मतवालादिखे चाँदनी कड़ी धूप...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
फेसबुक पर एक समूह में पत्र लेखन प्रतियोगिता थी|62 प्रविष्टियों में...अच्छे पत्रों में हमारे पत्र को भी रखा गया इसके लिए खुश हूँ
 पोस्ट लेवल : कहानी सभी रचनाएँ
विधा- ललित छंद (सार छंद)... 16-12 पर यति अंत में वाचिक भार 22, कुल चार चरण, दो-दो चरण में तुकांत अनिवार्य है. नेह-सिक्त निर्मल धारा से , मिलती कंचन काया | अम्बर जैसा प्यार पिता का, शीतल माँ का साया || जाने कितने दुख सुख सहकर, तिनका तिनका जोड़े| ऊँची शिक्षा की खातिर...
 पोस्ट लेवल : ललित छंद छंद
ग्रीष्म ऋतु ============ ग्रीष्म की दुपहरिया कोयल की कूक से टूट गयी काँच सी छत पर के पँखेसर्र सर्र नाच रहेहाथों में प्रेमचंदनैंनों से बाँच रहेनिर्मला की हिचकियाँ दिल में हैं खाँच सी कोलतार पर खड़े झुंड हैं मजूरों के द्वार पर नाच रहे बानर जमूरों के लू की बड़ी तपन खस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत मौसम
मनोरम छंदमापनी-2122.2122***************************गीतिका पदांत - देनासमांत- आर***************************जिन्दगी को सार देनानेह को विस्तार देनाफूल की चाहत सभी कोशूल को भी प्यार देनाराह में फिसलन बहुत हैचाल को आधार देनास्वप्न होते अनगढ़े सेकर्म से आकार देनाबोल मीठे...
 पोस्ट लेवल : प्रेरणात्मक छंद
नलिन की वापसी    सुपर फ़ास्ट ट्रेन तीव्र गति से अपने गंतव्य की ओर बढ़ती जा रही थी| जनरल डब्बे की निचली बर्थ पर खिड़की के पास बैठी सुमेधा पवन के शीतल झोंकों का आनन्द ले रही थी| मन के भीतर की खुशियाँ चेहरे पर झलक रही थीं, कभी एक उदासी भी झलक जा रही थी| वह अ...
 पोस्ट लेवल : कहानी
मल्लिका छंद 21 21 21 21....(212 121 21)1दूब से मिलें गणेश।प्रेम ने किया प्रवेश।।दान मान ज्ञान संग।श्वाँस श्वाँस मे उमंग।।2है जिया उदास आज।वीतराग छेड़ साज।।मंद मंद है समीर।क्यों पपीहरा अधीर?।।3सिंधु में हजार सीप।पास एक आस दीप।।हाथ मे लिए गुलाब।छंद की नई किताब।।--ऋता...
 पोस्ट लेवल : छंद