ब्लॉगसेतु

हिन्दी दिवस पर समर्पित कुछ हाइकु-पुष्प...१.हिंद-संविधाचौदह सितम्बरहिन्दी दिवस|२.संविधा धारातीन सौ तेतालिसवर्णित हिन्दी|३.राष्ट्र की भाषालिपि देवनागरीबोलें तो हिन्दी|४.गरिमामयीलेखन में सरलसौम्य है हिन्दी|५.हिन्दी दीपकरौशन हिन्दुस्तानफैला उजास|६.सुख का मूलभारतेन्दु क...
यूँ फ़लक को चूमने कीऔर हवा में घूमने कीआरजू है नव उमंग कीकोशिशें हैं नव तरंग कीआगाज तुम नव उदय कासाज तुम मधुर हृदय काले चलो ये कश्तियाँ तुमबनोगे इक दिन हस्तियाँ तुमराष्ट्रगिरी को तुम उठा लोबन कान्हा सबको बचा लोनव सुरों में राग भर दोशिक्षित बन नवगीत रच दोतुम धरा के...
'भगिनी का सुत काल है’, सुनकर सिहरा कंस।शिशु वध करने के लिए, भाई बना नृशंस।।गर्भवती जकड़ी गई, हा! कैसा था पाप।वसुदेव संग देवकी, झेल रही संताप।।चमक रही थी दामिनी, गरजा था घन घोर।रखवाले बेसुध हुए, नींद पड़ी अति जोर।।कारा में गूँजा रुदन, खुली लौह जंजीर।पुत्र आठवाँ देखक...
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ...प्रस्तुत है लोकगीत विधा पर आधारित मुरली मनोहर से शिकायत करता एक गीत...काहे सताया बोलो काहे सताया राधे को कान्हा तूने काहे सतायामार कंकरी उसकी फोड़ी गगरिया पनघट की डगर पर उसको रुलाया काहे रुलाया बोलो काहे रुलाया राधे को कान्हा तूने...
http://www.youtube.com/watch?v=N9dfJcOWXcsन स्वार्थ का है लेपन इच्छाओं का अवलंबनहै चट्टान सा मजबूतभाई-बहन का बंधनमोती मोती नेह भरा है डोरी डोरी मंत्रबहन की रेशम राखी मेंपिरोया आशीष अनंतसर्वरोगोपशमनं सर्वाशुभविनाशनम्|सकृतकृतेनाब्दमेकं येन रक्षाकृतो भवेत्||रक्षा...
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँहिंद देश के रखवालो तुमकिस खास तत्व से बनते हो ओ सरहद पर रहने वालोसिकुड़े शीत आए तूफ़ानया धरा बने जब गर्म तवाडट कर रहते हर मौसम मेंहिंद देश के रखवालो तुमकिस खास तत्व से बनते हो ओ सरहद पर रहने वालोमाँ का आँचल पितृ का सायायाद हमे...
जोशीला हर प्रान्त हिन्द का...(आल्हा छंद)हूँक भरो तुम वीर बंकुरो , भरो धनुष में तुम टंकारमातृभूमि पर आँच न आए,करो दुश्मनों का संहारभारत देश जान से प्यारा, भारतवासी की यह शानजाग उठो अब वीर सपूतो, आजादी की रख लो आनऋषियों के यह तपोभूमि है, और वीरों की करमभूमि...
ईश्वर के वरदान से मिले मनुज का रूपबल विवेक अरु बुद्धि से सहते छाया- धूपउर जब निश्छल हो सदा प्रभु आते हैं पासकुछ तो इस संसार में कर जाएँ हम खासहर मौन सिर्फ़ मौन नहीं होतातूफ़ान के पहले की शांति तो नहींचीत्कार भरा हो अंतर्मन में जबखामोशियों की यह भ्रांति तो नहीं.दिखत...
मेरी माँ...अभी तो उसके ही तन का हिस्सा हूँ मैंख्वाबों में मुझसे मिल रही है मेरी माँपा न जाऊँ कहीं अमावस का अंधकारजतन से रुपहली चादर सिल रही है मेरी माँजहाँ भी लूँ श्वास, सुवास ही मिले सदापिटारे में गुलाबौं को गिन रही है मेरी माँशीतल समीर संग हिंडोले पर झुला सकेमधुर...
बारिश का मौसम सुहाना हैपावस ने छेड़ा तराना हैकाँधे सजते झूलते काँवरभजनों में शिव-गुण को गाना हैसुंदर पत्ते बेल के लाओशिवशंकर जी पर चढ़ाना हैसावन में चुनरी हरी लहरीहाथों में लाली रचाना हैबच्चे पन्ने फाड़ते झटपटधारा में किश्ती चलाना हैचूड़ी धानी सी खरीदे वेपरिणीता को...