ब्लॉगसेतु

 छंद- शक्ति /वाचिक भुजंगी 122 122 122 12****************************जिसे चाहिये जो दिया है सदामिला है हमें जो लिया है सदान रखते शिकायत न शिकवा कभीसुधा संग विष भी पिया है सदालुभाते नहीं रूप दौलत कभीहृदय से गुणों को जिया है सदासमेकित हुआ नाद ओंकार मेंभ्रमर योग ह...
*अँधियारी रातों का साथी,बनकर साथ निभाना प्रियवर।रोज नए दीपों की माला, राहों पर धर जाना प्रियवर।अँधियारी रातों का साथी, बनकर साथ निभाना प्रियवर।।जिनके दृग की ज्योति छिन गईमन उनका रौशन कर देना।रंगोली जिस द्वार मिटी हैरंगों की छिटकन भर देना।।ख्वाबों के मोती चुन चुन कर...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
ऋतुराज की आहट हुई है, माघ का विस्तार है| माँ शारदे ! घर में पधारो, पंचमी त्योहार है||१|| * है राह भीषण ज़िन्दगी की, पग कहाँ पर हम धरें| मझधार में नौका फँसी है, पार कैसे हम करें || तूफ़ान में पर्वत बनें हम, शक्ति इतनी दो हमें | बन कर चरण-सेवी रहें हम, भक्ति भी दे दो...
हे विनायक एकदंता ! इस जगत को सार दे दो || क्यों भरा हिय में हलाहल, क्यों दिखे बिखरे कपट छल| सोच में संस्कार दे दो, सतयुगी अवतार दे दो || हे गजानन बुद्धिदाता ! ज्ञान का विस्तार दे दो || इस जगत को सार दे दो ||१ खो रहीं संवेदनाएँ, भूलती मधुरिम ऋचाएँ | साज को झंकार दे...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
गीतिका ...समसामयिकमोह बढ़े जब-जब धन से तब, ईश्वर ही सिखलायेगा | अपना घर अपना रिश्ता ही, काम हमेशा आयेगा ||१|| जन्मभूमि से अपनापन ही, गाँव सभी को ले आया | ‘कोविड के कारण लौटे थे’, इतिहास यही बतलायेगा||२|| अपनी छत अपनी होती है, चाहे होते छेद कई| यही बात समझाने को तो,...
 पोस्ट लेवल : गीतिका कविता लावणी छंद
गीतिकाआधार छन्द - रजनी (मापनीयुक्त मात्रिक) मापनी - गालगागा गालगागा गालगागा गा 2122   2122   2122 2 समान्त - आर, पदान्त - को देखो लिख रहे जो गीतिका उस सार को देखो लेखनी से उठ रहे उद्गार को देखो हो रहे हैं शब्द हर्षित भाव बहने लगे हर्ष में छुपते...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद सभी रचनाएँ
विधा:-गीतिका आधार छंद-रजनी मापनी- २१२२ २१२२ २१२२ २ ======================= फूल है अपनी जगह खुशबू रुहानी है | झूमती गाती हवा लाती रवानी है |१| मौत के डर से न जीना छोड़ना साथी प्राण का तन से मिलन जीवन कहानी है|२| बोलते हैं जब पपीहे प्रीत के सुर में वह मिलन की रागिनी...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद सभी रचनाएँ
महँगा कचरा “दादी, सब कहते हैं कि हम मनुष्यों ने पर्यावरण का बहुत नुकसान किया है| पर मुझे तो ऐसा कुछ नहीं दिखता, आपको दिखता है क्या? ,” रेस्तरां में बैठे दस वर्षीय पीयूष ने बर्गर खाते हुए सवाल किया| “बिल्कुल दिखता है पीयूष, मैं तो अभी ही गिना सकती हूँ कि बर्गर खाते...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
ताटंक छंद में दिनकर पूर्व दिशा से लाल चुनरिया, ओढ़ धरा पर आते हैं | ज्योति-पुँज हाथों में लेकर, शनै-शनै बिखराते हैं || सफर हमारा चले निरंतर, घूम-घूम बतलाते हैं | अग्नि-कलश माथे पर धरकर, हम दिनकर कहलाते हैं || स्वर्ण रश्मियों की आहट से, खेतों ने अँगड़ाई ली | हाथ उठ...
चित्र गूगल से साभाररिक्शावाला.....राह को स्वेद से सींचता हुआ रिक्शे को दम से खींचता हुआ बाहों पर उभरी नसें लिये वह कृशकाय, वृद्धावस्था में रिक्शे को लिए जा रहा है आसमान में धूप चढ़ी है सवारी को तिरपाल से बचाता अपना सिर गमछ से बचा रहा हाँ, वह रिक्शा चला रहा सवारी को...
 पोस्ट लेवल : कविता