ब्लॉगसेतु

2122 1122 22उल्फतों का वो समंदर होतापास में उसके कोई घर होतादर्द उसके हों और आँसू मेरेप्रेम का ऐसा ही मंजर होतादिल के जज़्बात कलम से बिखरेकाग़ज़ों पर वही अक्षर होतामुस्कुराता रहा जो बारिश मेंदीन में मस्त कलन्दर होतासर्द मौसम या तपन सूरज कीझेलता मैं तो सिकन्दर होता-ऋता
पुरस्कार लगभग चार वर्ष पहले अनीता की नियुक्ति मध्य विद्यालय में हुई थी| जिस दिन वह विद्यालय में योगदान देने गईं , सभी शिक्षक और बच्चे बहुत खुश हुए थे क्योंकि वहाँ गणित के लिए कोई शिक्षक न था| योगदान देने के बाद प्रधानाध्यापिका ने उन्हें बैठने को कहा और बो...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा
मिट्टी वाले खेतरडार ट्वेनटी फोर की साइट पर आसमान में वायुयानों का गमन देखने वाले अधिकारियों के बीच खलबली मच गई| तिरंगे साफे में ये कौन प्रकट हो रहा है| मजबूत नसों वाली दुबली काया किसकी है?किसी आशंका ने सबको डरा दिया| रक्षा मंत्रालय को फोन किया गया| मंत्रालय में फोन...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
बाल-गीतमौसम गर्मी का है आयासूरज छतरी से शरमायागुलमोहर की लाली देखोउसमें तुम खुशहाली देखोतरबूजों की शान निरालीशर्बत बनकर भरती प्यालीपीले पीले आम सुहानेठेलों पर आ गए रिझानेहुई गुलाबी लीची रानीपेटी में भर लाई नानीछुट्टी में तुम पढ़ो कहानीपीकर मीठा नरियल पानीबच्चों मन क...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता
आधुनिक कर्जकुछ देर पहले मोबाइल पर कोई मैसेज देखकर सोमेश का चेहरा उतर गया था। उसके पापा से यह छुपा नहीं रह सका। पूछने पर सोमेश ने बताया कि क्रेडिट कार्ड का बिल है। दस दिन पहले की ही तो बात है जब सोमेश का फोन आया था।"अम्मा पापा, गृहप्रवेश के लिए 20 मई का दिन रखा है म...
प्रेम लिखो पाषाण पर, मन को कर लो नीर।बह जाएगी पीर सब, देकर दिल को धीर।।1मन दर्पण जब स्वच्छ हो, दिखते सुन्दर चित्र।धब्बे कलुषित सोच के, धूमिल करें चरित्र।।2मन के तरकश में भरे, बोली के लख बाण।छूटें तो लौटें नहीं, ज्यों शरीर के प्राण।।3अवसादों की आँधियाँ, दरकाती हैं भ...
 पोस्ट लेवल : दोहे दोहा छंद छंद दोहा
उत्तरदायित्व का ज्ञान"अंजना, जरा पानी देना।""अंजना, चादर ठीक से ओढ़ा दो बेटा।""अंजना, मन भारी लग रहा, कुछ देर मेरे पास बैठो।""माँ, पानी भी दिया, चादर भी दिया। पास बैठने का समय नहीं, आपके बेटे आएंगे, वही बैठेंगे।"बहु की बात सुनकर प्रमिला जी की आंखें छलक गईं।प्रमिला ज...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
उधम की परिणतिशाम हो चली थी| हल्के अँधेरे अपने पाँव धीरे धीरे पसार रहे थे| मैं ऑफिस से लौट कर अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था| पार्क में खेलता हुआ मेरा छह वर्षीय बेटा मुझे देखते ही मेरे पास आ गया| हम आगे बढ़ते जा रहे थे तभी रोने की आवाज़ आई| कौन रो रहा, यह देखने के लिए...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
मी टू‘रमोला, ये तुम्हें क्या सूझी है| तुम्हारा हँसता खेलता परिवार बर्बाद हो जाएगा| परिणाम पर भी विचार किया है क्या?’’‘जी दीदी, सब सोच कर ही फैसला लिया है| अब बात बाहर आनी ही चाहिए|”‘किन्तु, रमेन्द्र जी ये सह नहीं पाएँगे| समाज में सशक्त लेखक के रूप में उनकी इज्जत है...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा