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संवैधानिक अधिकार-सदुपयोग या दुरुपयोगअधिकार, एक ऐसा शब्द जो सुख, सुविधा और सहुलियत के दरवाजे खोलता है| कहते हैं जब मनुष्य अपना कर्तव्य करता है तो अधिकार खुद ब खुद मिल जाते हैं| समाज में रहने के लिए कर्तव्य और अधिकार, दोनों आवश्यक हैं|अब सवाल यह उठता है कि कानूनी रूप...
 पोस्ट लेवल : आलेख
ग्रीष्मग्रीष्म गुलमोहर हुई हैमोगरे खिलने लगेनभ अमलतासी हुआ जब भाव गहराने लगे|अब नवल हैं आम्रपल्लवबौर भी अमिया बनावीरता भी है पलाशीशस्त्र दीवाने लगे|तारबूजे ने दिखायारंग अब अपना यहाँदोपहर में जेठ कीस्वेदकण बहने लगे|नीम भी करने लगे हैंताप से अठखेलियाँजी गईं उनकी शिरा...
 पोस्ट लेवल : नवगीत गीत
4 धुंध नींद खुली नव रश्मियाँ भोर का सौंदर्य कलरव प्रकृति का माधुर्य खिड़कियाँ आज भी खोलीं बाहर झांकते हुए स्पष्ट नहीं था कुछ धुंध छायी थी। उज्ज्वल रास्तों के लिए करना होगा वक्त का इंतेज़ार धूप गहराएगी तभी दिखेंगे दूब और फूल कि सब कुछ हमारे वश में नहीं होता करना ही...
2जिजीविषामन की धरतीजब होने लगे पठारसंवेदनाएँ तोड़ने लगें दमउत्साह डूबने लगेनिराशा के समंदर मेंआसपास के सूखे पत्तेमन में शोर करने लगेंमधुर वाणी भीकानों को बेधने लगेंतब जाना उस पठार परजहाँ दरारों से झाँकती हैदो नन्हीं कोमल पत्तियाँतब लगता हैकहीं तो दबी है जड़उसके अहसास...
हैप्पी जर्नी-------------- जब भी कोई जाता हैसुदूर यात्रा परगाड़ी रेलगाड़ीया हवाई जहाज सेदही खिलाकर बोलतेहैप्पी जर्नीयह एक दुआ हैजो कवच बनने कीरखती है ताकतएक विश्वास हैहादसों से परेसुरक्षा कायह संदेश हैउस परमपिता कोकि वापस भेजना होगापरिजनों को सहेजना होगा।जब उतर जाती...
 पोस्ट लेवल : छंदमुक्त कविता
गाँव की पगडंडीखड़ी बोली/देशज बोलीहिंदी/मागधीबिहान* होते हीखुश हो जाती मेरे गाँव की पगडंडीबैलों की जोड़ी देखकरखेत की मोड़ी देखकरहरियर दुब्बी* से खेलकरखुश हो जातीमेरे गाँव की पगडंडीननका ननकी* खेले डेंगा पानी*घुप्पी* में पिलाएँ* गोली* पिट्टो* खेल में ढेर* दौड़ातेसुनकर प्य...
 पोस्ट लेवल : कविता सभी रचनाएँ
करना अगर है कुछ तुझे तो इन्क़िलाब करछोड़े जो छाप, उम्र को ऐसी किताब करकीमत बहुत है वक़्त की जेहन में तू बिठाबेकार बात में न समय को ख़राब करये ज़िंदगी तेरी है तेरी ही रहे सदाशिद्दत से तू निग़ाह को अपनी रुआब करशब भर रहेगा चाँद सितारे भी जाएँगेलम्हे बिताए जो यहाँ उनका हिसाब...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
नाज करो कि तुम नारी होनाज करो कि सब पर भारी होनाज करो कि तुमसे संसार हैनाज करो कि धुरी के साथ हाशिया भी होइतनी संपूर्णता किसे मिलती हैतुम बया हो जो खूबसूरत नीड़ बुनती हैगर आंधियों में बिखर भी गए तो सम्बल और धैर्य चुनती होदुआ तुम्हारी प्रभु भी स्वीकारतेइतनी संपूर्णता...
 पोस्ट लेवल : कविता दिवस
महिला दिवस विशेष रचना-दोहे----------------------------------------नारी से ही रीत है, नारी से है प्रीत।नारी से है सर्जना, नारी सुन्दर गीत।।एक वृत्त के केंद्र में, नारी का संसार।प्रेम त्याग के भाव से , देती है आकार।।रिश्तों को सम्भालती, बन माला की डोर।नारी से है अर्च...
 पोस्ट लेवल : दोहे छंद दिवस
वक्त का बदलाव"जहाँ देखो सिर्फ बेटियों के लिए ही स्लोगन बन रहे।मेरी बेटी मेरा अभिमान।बेटी पढ़ाओ बेटी बढाओ।बेटियों से संसार है....हुंह"ननद रानी की बातें सुनकर सुहासिनी मुस्कुरा रही थी।"तो इसमें दिक्कत क्या है जीजी। बेटियों को तो बढ़ावा मिलना ही चाहिए।""पर इस तरह के नार...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा