ब्लॉगसेतु

मैं वसुन्धरा खिले पलाशों से मिल मिल कर खुद बासंती होती जाऊँ सरस फाग के गीत सुहाने अलि पपीहा आए सुनाने पारिजात भर देता दामन मस्त हवा ने गाए तराने पीत रंग सरसो से लेकर मीठे सपनो को ले आऊँ ग्रंथों में न होगी पुरानी विरह मिलन की कथा कहानी शब्दों में भी जान आ गई जब मौसम...
शापित फल्गु"माँ, यहाँ तो रेत ही रेत है, फिर इसे नदी क्यों कहते हैं।" रेत पर बैठी मैनेजमेंट पढ़ रही प्रज्ञा पूछ रही थी।"बेटे, यहाँ गड्ढा करोगी तो पानी निकल आएगा। कहते हैं इस फल्गु नदी को सीता माता ने श्राप दिया था । नदी ने सीता माता के सच की गवाही न देकर गुप्त रखा इस...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
करती समर्पित काव्य उनको, देश हित में जो डटे|वे वेदना सहते विरह की, संगिनी से हैं कटे ||दिल में बसा के प्रेम तेरा, हर घड़ी वह राह तके|लाली अरुण या अस्त की हो, नैन उसके नहिं थके||जब देश की सीमा पुकारे, दूर हो सरहद कहीं|इतना समझ लो प्यार उसका, राह का बाधक नहीं||तुम हो...
 पोस्ट लेवल : छंद हरिगीतिका
जब छाए मन व्योम पर, पीर घटा घनघोर|समझो लेखन बढ़ चला, इंद्रधनुष की ओर||दिशा हवा की मोड़ते, हिम से भरे पहाड़।हिम्मत की तलवार से, कटते बाधा बाड़।।खुशी शोक की रागिनी, खूब दिखाते प्रीत। जीवन के सुर ताल पर, गाये जा तू गीत।।शब्द शब्द के मोल हैं, शब्द शब्द के बोल।मधुरिम बात व...
देखो बंधु बाँधवों,जिंदगी ने बिछायी हैबिसात शतरंज कीबिखरायी है उसनेमोहरें भाव-पुंज की श्वेत-श्याम खानों के संग दिख जाते सुख-दुःख के रंगप्यादे बनते सोच हमारीसीधी राह पर चलते हुएसरल मना को किश्ती प्यारीतीव्र चतुर दलबदलू हीकरते हैं घोड़ों की सवारीव्यंग्य वाण में माहिर...
स्वप्नलोक....बचपन का वह स्वप्नलोक अब विस्मृत होता जाता हैजलपरियाँ जादुई समंदर सन्नाटे में खोता जाता हैसीप वहाँ थे रंग बिरंगे मीन का नटखट खेल थासजा सजीला राज भवन जहाँ तिलस्म का मेल थासजा सजीला एक कुँवर बेमिसाल इक राजकुमारीप्रीत कँवल खिलते चुपके से छाती दोनो पर खुमार...
संक्रांति की सौगातमकर संक्रांति के दिन सुषमा ने नहा धोकर तिलवा और गुड़ चढ़ाकर विष्णु पूजन किया| सास, ससुर, देवर, ननद पति,जेठ, जेठानी सबको प्रसाद दे आई| यह सब करते हुए वह अनमयस्क सी लग रही थी| सास की अनुभवी आँखों ने समझ लिया था उसकी उदासी का कारण| कल जबसे बड़ी बहु क...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
यह नवगीत प्रतिष्ठित ई-पत्रिका "अनुभूति" के नववर्ष विशेषांक पर प्रकाशित है...यहाँ क्लिक करें |नए साल पर....फिर से रमिया चलो गाँव मेंलेकर अपनी टोलीछोड़ चलो अब महानगर की चिकनी चुपड़ी बोलीनए साल पर हम लीपेंगेचौखट गोबर वालीअँगना में खटिया के ऊपरछाँव तरेंगन वालीश्रीचरणों...
 पोस्ट लेवल : नवगीत गीत
सभी ब्लॉगर मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !!     ब्लॉग पर जितने भी मित्र हैं वो बहुत से बहुत तो बारह या तेरह वर्षों से ब्लॉग पर होंगे| ब्लॉग ने मन की बात कहने का सहज सरल रास्ता दिया| जो भावनाएँ या बातें पहले मन में घुटकर रह जाती थीं वो ब्लॉ...
 पोस्ट लेवल : आलेख
सरसी छंद -- बढ़े देश का मान.....नया साल लेकर आया है, पीत सुमन के हार| नए गगन में अब लो पंछी, अपने पंख पसार|| हम बसंत के मस्त पवन में, गाएँ अपना गान| झंडा ऊँचा रहे हमारा, बढ़े देश का मान||1||हिम की नदिया जब पिघलेगी, फेनिल होंगे धार| सुर की देवी फिर छेड़ेंगी, निज वीण...
 पोस्ट लेवल : सरसी छंद छंद