ब्लॉगसेतु

करना अगर है कुछ तुझे तो इन्क़िलाब करछोड़े जो छाप, उम्र को ऐसी किताब करकीमत बहुत है वक़्त की जेहन में तू बिठाबेकार बात में न समय को ख़राब करये ज़िंदगी तेरी है तेरी ही रहे सदाशिद्दत से तू निग़ाह को अपनी रुआब करशब भर रहेगा चाँद सितारे भी जाएँगेलम्हे बिताए जो यहाँ उनका हिसाब...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
नाज करो कि तुम नारी होनाज करो कि सब पर भारी होनाज करो कि तुमसे संसार हैनाज करो कि धुरी के साथ हाशिया भी होइतनी संपूर्णता किसे मिलती हैतुम बया हो जो खूबसूरत नीड़ बुनती हैगर आंधियों में बिखर भी गए तो सम्बल और धैर्य चुनती होदुआ तुम्हारी प्रभु भी स्वीकारतेइतनी संपूर्णता...
 पोस्ट लेवल : कविता दिवस
महिला दिवस विशेष रचना-दोहे----------------------------------------नारी से ही रीत है, नारी से है प्रीत।नारी से है सर्जना, नारी सुन्दर गीत।।एक वृत्त के केंद्र में, नारी का संसार।प्रेम त्याग के भाव से , देती है आकार।।रिश्तों को सम्भालती, बन माला की डोर।नारी से है अर्च...
 पोस्ट लेवल : दोहे छंद दिवस
वक्त का बदलाव"जहाँ देखो सिर्फ बेटियों के लिए ही स्लोगन बन रहे।मेरी बेटी मेरा अभिमान।बेटी पढ़ाओ बेटी बढाओ।बेटियों से संसार है....हुंह"ननद रानी की बातें सुनकर सुहासिनी मुस्कुरा रही थी।"तो इसमें दिक्कत क्या है जीजी। बेटियों को तो बढ़ावा मिलना ही चाहिए।""पर इस तरह के नार...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
मैं वसुन्धरा खिले पलाशों से मिल मिल कर खुद बासंती होती जाऊँ सरस फाग के गीत सुहाने अलि पपीहा आए सुनाने पारिजात भर देता दामन मस्त हवा ने गाए तराने पीत रंग सरसो से लेकर मीठे सपनो को ले आऊँ ग्रंथों में न होगी पुरानी विरह मिलन की कथा कहानी शब्दों में भी जान आ गई जब मौसम...
शापित फल्गु"माँ, यहाँ तो रेत ही रेत है, फिर इसे नदी क्यों कहते हैं।" रेत पर बैठी मैनेजमेंट पढ़ रही प्रज्ञा पूछ रही थी।"बेटे, यहाँ गड्ढा करोगी तो पानी निकल आएगा। कहते हैं इस फल्गु नदी को सीता माता ने श्राप दिया था । नदी ने सीता माता के सच की गवाही न देकर गुप्त रखा इस...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
करती समर्पित काव्य उनको, देश हित में जो डटे|वे वेदना सहते विरह की, संगिनी से हैं कटे ||दिल में बसा के प्रेम तेरा, हर घड़ी वह राह तके|लाली अरुण या अस्त की हो, नैन उसके नहिं थके||जब देश की सीमा पुकारे, दूर हो सरहद कहीं|इतना समझ लो प्यार उसका, राह का बाधक नहीं||तुम हो...
 पोस्ट लेवल : छंद हरिगीतिका
जब छाए मन व्योम पर, पीर घटा घनघोर|समझो लेखन बढ़ चला, इंद्रधनुष की ओर||दिशा हवा की मोड़ते, हिम से भरे पहाड़।हिम्मत की तलवार से, कटते बाधा बाड़।।खुशी शोक की रागिनी, खूब दिखाते प्रीत। जीवन के सुर ताल पर, गाये जा तू गीत।।शब्द शब्द के मोल हैं, शब्द शब्द के बोल।मधुरिम बात व...
देखो बंधु बाँधवों,जिंदगी ने बिछायी हैबिसात शतरंज कीबिखरायी है उसनेमोहरें भाव-पुंज की श्वेत-श्याम खानों के संग दिख जाते सुख-दुःख के रंगप्यादे बनते सोच हमारीसीधी राह पर चलते हुएसरल मना को किश्ती प्यारीतीव्र चतुर दलबदलू हीकरते हैं घोड़ों की सवारीव्यंग्य वाण में माहिर...
स्वप्नलोक....बचपन का वह स्वप्नलोक अब विस्मृत होता जाता हैजलपरियाँ जादुई समंदर सन्नाटे में खोता जाता हैसीप वहाँ थे रंग बिरंगे मीन का नटखट खेल थासजा सजीला राज भवन जहाँ तिलस्म का मेल थासजा सजीला एक कुँवर बेमिसाल इक राजकुमारीप्रीत कँवल खिलते चुपके से छाती दोनो पर खुमार...