ब्लॉगसेतु

संक्रांति की सौगातमकर संक्रांति के दिन सुषमा ने नहा धोकर तिलवा और गुड़ चढ़ाकर विष्णु पूजन किया| सास, ससुर, देवर, ननद पति,जेठ, जेठानी सबको प्रसाद दे आई| यह सब करते हुए वह अनमयस्क सी लग रही थी| सास की अनुभवी आँखों ने समझ लिया था उसकी उदासी का कारण| कल जबसे बड़ी बहु क...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
यह नवगीत प्रतिष्ठित ई-पत्रिका "अनुभूति" के नववर्ष विशेषांक पर प्रकाशित है...यहाँ क्लिक करें |नए साल पर....फिर से रमिया चलो गाँव मेंलेकर अपनी टोलीछोड़ चलो अब महानगर की चिकनी चुपड़ी बोलीनए साल पर हम लीपेंगेचौखट गोबर वालीअँगना में खटिया के ऊपरछाँव तरेंगन वालीश्रीचरणों...
 पोस्ट लेवल : नवगीत गीत
सभी ब्लॉगर मित्रों को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !!     ब्लॉग पर जितने भी मित्र हैं वो बहुत से बहुत तो बारह या तेरह वर्षों से ब्लॉग पर होंगे| ब्लॉग ने मन की बात कहने का सहज सरल रास्ता दिया| जो भावनाएँ या बातें पहले मन में घुटकर रह जाती थीं वो ब्लॉ...
 पोस्ट लेवल : आलेख
सरसी छंद -- बढ़े देश का मान.....नया साल लेकर आया है, पीत सुमन के हार| नए गगन में अब लो पंछी, अपने पंख पसार|| हम बसंत के मस्त पवन में, गाएँ अपना गान| झंडा ऊँचा रहे हमारा, बढ़े देश का मान||1||हिम की नदिया जब पिघलेगी, फेनिल होंगे धार| सुर की देवी फिर छेड़ेंगी, निज वीण...
 पोस्ट लेवल : सरसी छंद छंद
     पढ़ाई पूरी करने के बाद जब रोजी रोटी की बात आती है तो हमारे पास तीन विकल्प होते हैं|1बहुराष्ट्रीय कम्पनी/प्राइवेट की नौकरी2.सरकारी नौकरी3.स्वरोजगारफेसबुक पर मैंने एक वोटिंग कराई| वोटिंग सिर्फ एक दिन के लिए थी और सिर्फ मित्रसूची में शामिल मित्रों...
 पोस्ट लेवल : आलेख
राह....राह अनगिन हैं जग मेंराह का ले लो संज्ञानकहीं राह सीधी सरलकहीं वक्र बन जातीकहीं पर्वत कहीं खाईकभी नदिया में समातीसभी पार कर लोगे बंधुत्याग चलो अभिमानकहीं मिलेंगे सुमन राह मेंकहीं कंटक वन पाओगेकहीं है मुनियों का बसेराकहीं चंबल से घबराओगेधैर्य जरा रख लेना बंधुख...
न्यु इयरमाँ के स्वर्गवास के बाद अवनि को मैके जाने का मन नहीं होता था| फोन पर भाई भाभी हमेशा उसे बुलाते किन्तु वह उदासीन भाव से मना कर देती| उसे लगता कि अब सभी भाई बहनों का अपना अपना परिवार है तो वह किसी को डिस्टर्ब करने क्यों जाए| उस दिन भी फोन पर भाई से बातें हो र...
 पोस्ट लेवल : लघुकथा
धूप एक नन्हीं सीधुंध को ठेल करहवा से खेलकरधूप एक नन्हीं सीधरती पर आईबगिया के फूलों पर ओज फैलाती हैफुनगी पर बैठकरबच्चों को बुलाती हैसन्नाटों के भीड़ मेंउनको न देखकरकूद फांद भागकरकी है ढूँढाईधूप एक नन्हीं सीधरती पर आईस्कूल की कोठरी मेंपोथियों का ढेर हैअनगिन है सी एफ ए...
नौका समय की जब बनी वो, अनवरत बहने लगी |मासूम बचपन की कहानी, प्यार से कहने लगी ||कोमल घरौंदे रेत के वो, टूटकर बिखरे रहे |हम तो वहीं पर आस बनकर, पुष्प में निखरे रहे ||1||तरुणी परी बन खिलखिलाई, चूड़ियों में आ बसी |अनुराग की वो प्रीत बनकर, रागिनी में जा बसी ||वो बंसरी...
 पोस्ट लेवल : छंद हरिगीतिका
निग़ाहों की बातें छुपाने से पहलेनज़र को झुकाए थे आने से पहलेनदी के किनारे जो नौका लगी थीबहुत डगमगाई बिठाने से पहलेजो आज़ाद रहने के आदी हुए थेबहुत फड़फड़ाए निभाने से पहलेकरामात होती नहीं ज़िन्दगी मेंपकड़ना समय बीत जाने से पहलेबहन की दुआ आँक पाते न भाईकलाई पे राखी सज...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल